प्रफेशनल डिवेलपमेंट ट्रेनिंग का खर्चा उठाएगा राज्य शिक्षा विभाग

नवभारत टाइम्स

प्रदेश के पीएम श्री और संस्कृति मॉडल स्कूलों के शिक्षकों को अब सीपीडी ट्रेनिंग के लिए अपनी जेब से भुगतान नहीं करना होगा। शिक्षा विभाग ने यह बड़ा फैसला लिया है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने निर्देश जारी किए हैं कि ट्रेनिंग का आयोजन विभाग द्वारा किया जाएगा। किसी भी शिक्षक को व्यक्तिगत खर्च उठाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

प्रफेशनल डिवेलपमेंट ट्रेनिंग का खर्चा उठाएगा राज्य शिक्षा विभाग
चंडीगढ़: हरियाणा शिक्षा विभाग ने पीएम श्री और संस्कृति मॉडल स्कूलों के शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। अब शिक्षकों को सीबीएसई द्वारा अनिवार्य सीपीडी (सतत व्यावसायिक विकास) ट्रेनिंग के लिए अपनी जेब से पैसे नहीं देने होंगे। शिक्षा विभाग खुद इस ट्रेनिंग का आयोजन करेगा और शिक्षकों पर कोई व्यक्तिगत वित्तीय बोझ नहीं डाला जाएगा। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि कुछ जगहों पर शिक्षकों को खुद पैसे देकर यह ट्रेनिंग लेने के निर्देश दिए जा रहे थे, जिसे विभाग ने अनुचित बताया है।

विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और पीएम श्री व संस्कृति मॉडल स्कूलों के प्राचार्यों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने साफ कहा है कि किसी भी शिक्षक को सीबीएसई पोर्टल पर अनिवार्य सीपीडी ट्रेनिंग के लिए व्यक्तिगत खर्च उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। यह ट्रेनिंग अब पूरी तरह से शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी होगी।
यह कदम शिक्षकों को बड़ी राहत देने वाला है। पहले कुछ स्कूलों में शिक्षकों को सीपीडी ट्रेनिंग के लिए खुद भुगतान करने के लिए कहा जा रहा था। विभाग को जब यह बात पता चली तो उन्होंने तुरंत इस पर संज्ञान लिया और ऐसे निर्देशों को अनुचित करार दिया। विभाग ने सख्त लहजे में कहा है कि कोई भी स्कूल मुखिया किसी भी शिक्षक को अपने खर्च पर ट्रेनिंग लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

सीबीएसई द्वारा निर्धारित ट्रेनिंग को पूरा करने के लिए शिक्षकों पर किसी भी तरह की व्यक्तिगत वित्तीय जिम्मेदारी नहीं डाली जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी शिक्षक बिना किसी आर्थिक चिंता के इस महत्वपूर्ण ट्रेनिंग को पूरा कर सकें।

आने वाले शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किया जा रहा है। इस कैलेंडर में सीबीएसई के अनिवार्य सीपीडी मानकों को भी शामिल किया जाएगा। इसका मतलब है कि भविष्य में भी शिक्षकों के लिए यह ट्रेनिंग जारी रहेगी, लेकिन इसका पूरा खर्च विभाग ही उठाएगा।

सीपीडी ट्रेनिंग का मतलब है 'सतत व्यावसायिक विकास'। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक समय-समय पर नई चीजें सीखते हैं और अपने ज्ञान और कौशल को बेहतर बनाते हैं। यह शिक्षकों के लिए बहुत जरूरी है ताकि वे बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकें। सीबीएसई ने इसे सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य कर दिया है।

इस फैसले से शिक्षकों में खुशी की लहर है। उन्हें अब ट्रेनिंग के लिए पैसे की चिंता नहीं करनी पड़ेगी और वे पूरी तरह से सीखने पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। यह शिक्षा विभाग का एक सराहनीय कदम है जो शिक्षकों के हित में उठाया गया है।