ग्लोबल तनाव से चुनौतियां शॉर्ट टर्म के लिए : RBI मेंबर

नवभारत टाइम्स

पश्चिम एशिया में जारी जंग भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कुछ समय की मुश्किलें खड़ी कर सकती है। आरबीआई सदस्य नागेश कुमार का मानना है कि देश की लंबी अवधि की तरक्की की रफ्तार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और एक्सपोर्ट में रुकावट जैसी चुनौतियां हैं।

global tensions pose short term challenges to economy no impact on long term growth rbi member
मुंबई: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से भारत की अर्थव्यवस्था को कुछ समय के लिए दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन देश की लंबी अवधि की तरक्की पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। यह बात आरबीआई (RBI) की ब्याज दरें तय करने वाली कमिटी (MPC) के बाहरी सदस्य नागेश कुमार ने कही है। उन्होंने यह भी बताया कि GDP ग्रोथ को और तेज़ करने के लिए सरकार और केंद्रीय बैंक को मिलकर काम करना होगा।

नागेश कुमार के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, निर्यात में रुकावटें और विदेश से आने वाले पैसे (रेमिटेंस) पर पड़ने वाला असर भारत की तरक्की के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां हैं। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इस्राइल के हमलों से तनाव बढ़ रहा है, जिससे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि दुनिया के हित को देखते हुए यह संकट जल्द ही सुलझ जाएगा।
इस तनाव के बावजूद, नागेश कुमार का मानना है कि महंगाई काबू में रहेगी और फिलहाल घबराने जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि छोटी अवधि की चुनौतियों से निपटना होगा। कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के पास अपनी ग्रोथ को 7 फीसदी से बढ़ाकर 8 फीसदी तक ले जाने का एक शानदार मौका है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का बड़ा योगदान होगा।

उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कुछ समय की मुश्किलें खड़ी कर सकता है। लेकिन, देश की लंबी अवधि की तरक्की की रफ्तार पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। आरबीआई (RBI) की ब्याज दरें तय करने वाली कमिटी (MPC) के बाहरी सदस्य नागेश कुमार ने यह बात कही है।

कुमार ने आगे कहा कि आने वाले समय में GDP ग्रोथ को और तेज करने के लिए सरकार और केंद्रीय बैंक को तालमेल बिठाकर काम करने की जरूरत है। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, एक्सपोर्ट में रुकावट और विदेश से आने वाले पैसे (रेमिटेंस) पर पड़ने वाला असर भारत की तरक्की के सामने खड़ी कुछ बड़ी चुनौतियां हैं। साथ ही, वहां रह रहे भारतीय लोगों की सुरक्षा का मुद्दा भी अहम है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल अमेरिका और इस्राइल के हमलों से तनाव बढ़ रहा है, जिससे तेल की कीमतें और चढ़ सकती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि पूरी दुनिया का हित इस क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए यह संकट जल्द ही सुलझ जाएगा।

तनाव के बावजूद कुमार का मानना है कि महंगाई काबू में रहेगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल घबराने की कोई बात नहीं दिख रही है। लेकिन, तनाव से पैदा होने वाली छोटी अवधि की चुनौतियों से निपटना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के पास अपनी ग्रोथ को 7 फीसदी से बढ़ाकर 8 फीसदी तक ले जाने का सुनहरा मौका है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और सर्विस सेक्टर की बड़ी भूमिका होगी।