Gas Crisis In Kgmu Rotis Reduced For Patients Rice Increased Mess Stoves Cold
मरीज़ों के लिए रोटियां घटीं, चावल बढ़ा, मेस में चूल्हे ठंडे
नवभारत टाइम्स•
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में कमर्शल गैस की सप्लाई बंद होने से भोजन व्यवस्था चरमरा गई है। मरीजों के लिए रोटियां कम कर दी गई हैं और चावल बढ़ा दिया गया है। हॉस्टलों में गैस खत्म होने से छात्र बाहर खाना खाने को मजबूर हैं। प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रहा है।
लखनऊ: कमर्शल गैस की सप्लाई ठप होने से किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) की व्यवस्था चरमरा गई है। बुधवार को मरीजों के लिए रोटियां कम बनीं और चावल ज्यादा परोसा गया। हॉस्टलों में गैस खत्म होने से छात्रों के लिए खाना ही नहीं बन पाया, जिससे उन्हें बाहर जाकर खाना पड़ा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर इस समस्या के जल्द समाधान की मांग की है, क्योंकि इसका असर छात्रों की पढ़ाई और मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है।
KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि हॉस्टलों में गैस न होने के कारण छात्रों के लिए खाना नहीं बन सका। प्रशासन ने कोयले पर खिचड़ी बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन ज्यादातर छात्रों ने बाहर खाना पसंद किया। सरदार पटेल छात्रावास के वॉर्डन डॉ. जितेंद्र कुशवाहा ने बताया कि गुरुवार से खुले में तंदूर लगाकर खाना बनाने की योजना है।केंद्रीय किचन की इंचार्ज डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव ने बताया कि बुधवार तक किसी तरह काम चल गया, लेकिन गुरुवार से वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है। रोटी बनाने में गैस ज्यादा लगती है, इसलिए रोटियां कम बनाकर चावल की मात्रा बढ़ाई गई है। सोलर कुकर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में चल रही कैंटीन में गैस का इस्तेमाल बंद है। चाय और नाश्ता इंडक्शन पर बनाया जा रहा है।
इस गैस सप्लाई की समस्या का असर सीधे तौर पर मरीजों और छात्रों पर पड़ रहा है। मरीजों को मिलने वाले भोजन में रोटी की जगह चावल की मात्रा बढ़ानी पड़ी है, जो कि एक चिंता का विषय है। वहीं, हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को खाने के लिए बाहर भटकना पड़ रहा है। यह स्थिति छात्रों की पढ़ाई पर भी असर डाल सकती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस गंभीर समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि अगर जल्द ही गैस सप्लाई बहाल नहीं हुई तो छात्रों की पढ़ाई और मरीजों के इलाज में बाधा आ सकती है। प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी काम कर रहा है, जैसे कि कोयले पर खिचड़ी बनाना या खुले में तंदूर लगाना, लेकिन ये व्यवस्थाएं कितनी कारगर होंगी, यह देखना बाकी है।
यह घटना दिखाती है कि कैसे एक आवश्यक सेवा की कमी बड़े संस्थानों की व्यवस्था को बिगाड़ सकती है। KGMU जैसी महत्वपूर्ण जगह पर भोजन जैसी बुनियादी जरूरत का प्रभावित होना चिंताजनक है। उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और जल्द से जल्द गैस सप्लाई बहाल करवाएगा ताकि मरीजों और छात्रों को परेशानी न हो।