पारंपरिक तरीके से निर्माण पर जोर

नवभारत टाइम्स

नई दिल्ली में हिमालयन राउंडटेबल का आयोजन हुआ। विशेषज्ञों ने हिमालय क्षेत्र में बढ़ते पर्यावरण दबाव और विकास की चुनौतियों पर चर्चा की। तेजी से पिघलते ग्लेशियरों के कारणों और समाधानों पर मंथन किया गया। अरुणाचल प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने स्थानीय लोगों की आजीविका बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

construction in himalayan region emphasis on traditional methods and environmental protection initiatives
नई दिल्ली में गुरुवार को 'हिमालयन राउंडटेबल' का आयोजन हुआ। इसमें विशेषज्ञों ने हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण पर बढ़ते दबाव और विकास की चुनौतियों पर चर्चा की। खासकर, तेजी से पिघलते ग्लेशियरों के कारणों और उनके समाधान पर मंथन किया गया। अरुणाचल प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक पी. सुब्रह्मण्यम ने जोर देकर कहा कि संसाधनों को बचाने के लिए स्थानीय लोगों की आजीविका को बचाना बहुत ज़रूरी है।

इंडिया इंटरनैशनल सेंटर में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं और विकास से जुड़ी मुश्किलों का हल खोजना था। बैठक में कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और अपने विचार रखे।
विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता जताई कि ग्लेशियर बहुत तेज़ी से पिघल रहे हैं। उन्होंने इसके कारणों को समझने और इसके समाधान खोजने के तरीकों पर गहन विचार-विमर्श किया।

अरुणाचल प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक, पी. सुब्रह्मण्यम ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि अगर हमें हिमालय के कीमती संसाधनों को बचाना है, तो सबसे पहले वहां रहने वाले लोगों की रोज़ी-रोटी का ख्याल रखना होगा। उनकी आजीविका सुरक्षित रहेगी, तभी हम पर्यावरण को भी बचा पाएंगे।