डिजिटल जनगणना के लिए अफसरों को मिली ट्रेनिंग

नवभारत टाइम्स

राष्ट्रीय जनगणना 2027 को डिजिटल बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। गुड़गांव में अधिकारियों को मकानों की गणना और डेटा भरने का प्रशिक्षण दिया गया। यह जनगणना पूरी तरह तकनीक पर आधारित होगी। फील्ड से जुटाई गई जानकारी सीधे केंद्रीय सर्वर पर दर्ज होगी। इससे काम की निगरानी और वेरिफिकेशन आसान होगा। यह प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित रहेगी।

digital census 2027 officers trained in gurgaon counting to be technology based
गुड़गांव में राष्ट्रीय जनगणना-2027 को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए एक खास ट्रेनिंग वर्कशॉप आयोजित की गई। इस वर्कशॉप में अधिकारियों और कर्मचारियों को 'हाउस लिस्टिंग' और 'हाउसिंग सेंसस' यानी घरों की गिनती के बारे में विस्तार से समझाया गया। इस बार की जनगणना पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, जिससे डेटा सुरक्षित रहेगा और काम में पारदर्शिता आएगी। मास्टर ट्रेनर प्रशांत शर्मा ने डिजिटल तरीकों, डेटा भरने और फील्ड में आने वाली दिक्कतों पर जानकारी दी।

गुरुवार को गुड़गांव में हुई इस खास ट्रेनिंग में अधिकारियों को बताया गया कि कैसे राष्ट्रीय जनगणना-2027 को एकदम नया और बेहतर बनाया जाएगा। इस बार की जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी। इसका मतलब है कि अब कागजों पर गिनती नहीं होगी, बल्कि सब कुछ कंप्यूटर या मोबाइल पर होगा। इससे काम में गड़बड़ी की गुंजाइश कम हो जाएगी और सब कुछ साफ-साफ दिखेगा।
मास्टर ट्रेनर प्रशांत शर्मा ने बताया कि डिजिटल तरीके से डेटा कैसे भरा जाएगा। उन्होंने यह भी समझाया कि फील्ड में काम करते समय क्या-क्या परेशानियां आ सकती हैं और उनसे कैसे निपटा जाएगा। उन्होंने कहा, "फील्ड से इकट्ठा की गई जानकारी सीधे केंद्रीय सर्वर पर दर्ज होगी, जिससे काम की निगरानी और वेरिफिकेशन आसान हो जाएगा।" इसका मतलब है कि जो भी जानकारी इकट्ठी होगी, वह तुरंत सरकार के बड़े कंप्यूटर सिस्टम में चली जाएगी। इससे यह देखना आसान होगा कि काम सही हो रहा है या नहीं।

इस ट्रेनिंग में नगर निगम मानेसर के कमिश्नर प्रदीप सिंह, मानेसर के एसडीएम दर्शन यादव, सोहना के एसडीएम अखिलेश, डीसीओ अधिकारी गुरविंदर पाल सिंह और डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटिंग ऑफिसर देवेश बंसल जैसे कई बड़े अधिकारी मौजूद थे। इन सभी को जनगणना के नए डिजिटल तरीकों के बारे में सिखाया गया ताकि वे अपने-अपने इलाकों में इस काम को अच्छे से करवा सकें। इस बार की जनगणना में तकनीक का भरपूर इस्तेमाल होगा, जिससे यह पहले से कहीं ज्यादा सटीक और तेज होगी।