फार्मेसी काउंसिल ने 139 पर करवाई FIR

नवभारत टाइम्स

उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल ने 139 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। इन लोगों पर जाली मार्कशीट लगाकर फार्मासिस्ट के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने का आरोप है। जांच में यह फर्जीवाड़ा सामने आया। काउंसिल ने संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है। गाजीपुर पुलिस ने तहरीर के आधार पर FIR दर्ज की है।

fraud exposed pharmacy council registers fir against 139 pharmacists made using fake marksheets
लखनऊ: उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल ने 139 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। इन लोगों पर जाली मार्कशीट लगाकर फार्मासिस्ट बनने और रजिस्ट्रेशन कराने का आरोप है। काउंसिल ने पाया कि 65 लोगों ने जाली मार्कशीट से रजिस्ट्रेशन कराया, जबकि 74 अन्य ने ऑनलाइन डीफार्मा की फर्जी मार्कशीट लगाकर आवेदन किया था। यह खुलासा दस्तावेजों की जांच के बाद हुआ।

उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि काउंसिल डिप्लोमा और डिग्री धारक फार्मेसी छात्रों का रजिस्ट्रेशन करती है। काउंसिल ने उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद से उत्तीर्ण 74 और 40 रजिस्टर्ड फार्मासिस्टों का दोबारा परीक्षण करवाया। शिक्षा परिषद से मिले दस्तावेजों की जांच में पता चला कि ज्यादातर लोगों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था।
जांच के लिए 31 दिसंबर 2025 को 74 फार्मासिस्टों और 40 अभ्यर्थियों के डिप्लोमा इन फार्मेसी की मार्कशीट के बारे में पत्राचार किया गया था। प्राविधिक शिक्षा परिषद ने 16 जनवरी को भेजे एक पत्र में स्पष्ट किया कि 74 में से 65 फार्मासिस्टों और 40 में से 37 अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन जाली दस्तावेज अपलोड करके रजिस्ट्रेशन कराया था। इसके अलावा, 37 अन्य अभ्यर्थियों ने मध्यप्रदेश के कृष्णा विश्वविद्यालय छतरपुर की जाली मार्कशीट लगाकर पंजीकरण कराया था।

यह फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद रजिस्ट्रार ने प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं परिवार कल्याण, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को इसकी रिपोर्ट भेजी। इसके बाद गाजीपुर पुलिस ने रजिस्ट्रार की तहरीर पर 139 लोगों के खिलाफ जाली दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। यह मामला फार्मेसी के क्षेत्र में हो रहे फर्जीवाड़े को उजागर करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

फार्मेसी काउंसिल का काम यह सुनिश्चित करना है कि केवल योग्य और प्रशिक्षित व्यक्ति ही फार्मासिस्ट के रूप में काम करें। जाली मार्कशीट का इस्तेमाल करके लोग न केवल कानून तोड़ते हैं, बल्कि वे मरीजों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ करते हैं। ऐसे फर्जीवाड़े से आम जनता की सुरक्षा को खतरा होता है। इसलिए, इस तरह के मामलों पर सख्त कार्रवाई होना बहुत जरूरी है।

यह घटना दर्शाती है कि फर्जीवाड़े को रोकने के लिए और भी कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रियाओं में और अधिक सुरक्षा उपाय लागू किए जाने चाहिए ताकि जाली दस्तावेजों को अपलोड करना मुश्किल हो सके। साथ ही, ऐसे मामलों की समय पर जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से दूसरों को भी सबक मिलेगा। उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल द्वारा की गई यह कार्रवाई सराहनीय है और यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कि फार्मेसी का पेशा सुरक्षित और विश्वसनीय बना रहे।