Iran israel War Impact Gurgaon Industries Face Up To 20 Cut In Png Supply
उद्योगों को PNG सप्लाई में हो सकती है 20% कटौती
नवभारत टाइम्स•
ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर गुड़गांव की इंडस्ट्री पर पड़ रहा है। उद्योगों को पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) सप्लाई में 20 फीसदी तक की कटौती हो सकती है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और गैस की किल्लत से पेट्रो केमिकल प्रॉडक्ट के दामों में करीब 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर हजारों किलोमीटर दूर गुड़गांव की इंडस्ट्री पर भी पड़ रहा है। इस युद्ध के कारण उद्योगों को मिलने वाली पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) की सप्लाई में 20 फीसदी तक की कटौती हो सकती है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पीएनजी सप्लाई में प्रेशर की कमी, गैस की किल्लत, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट में दिक्कतें, पेट्रो केमिकल प्रॉडक्ट के दामों में करीब 30 फीसदी की बढ़ोतरी और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता ने यहां के उद्योगपतियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। उद्यमियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ते ही सबसे पहले कारोबारी वर्ग को ही नुकसान होता है।
मीवा के प्रेसिडेंट राजेश गुप्ता ने बताया कि ईरान-इजरायल युद्ध का असर इंडस्ट्री पर दिखने लगा है। गुड़गांव में कई ऐसी इंडस्ट्री हैं जो अपने प्रोडक्ट बनाने के लिए प्लास्टिक और मेटल का इस्तेमाल करती हैं। इन दोनों चीजों के दाम बढ़ गए हैं। प्लास्टिक के दाम करीब 30 फीसदी और मेटल के दाम करीब 15 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। कई पेट्रो केमिकल प्रोडक्ट, जो इंडस्ट्री के लिए बाहर से मंगाए जाते हैं, उनमें भी दिक्कतें आ रही हैं। इस वजह से प्रोडक्ट बनाने की लागत बढ़ गई है। अगर युद्धविराम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं।कई इंडस्ट्री में प्रोडक्ट बनाने के लिए हीट गैस या जनरेटर का इस्तेमाल होता है। अगर गैस नहीं मिली और डीजल की भी कमी हो गई, तो दाम बढ़ने से और भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। फिलहाल, जो सामान बाहर एक्सपोर्ट (निर्यात) होना है, उसे बनाने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
यह युद्ध सिर्फ तेल और गैस की सप्लाई को ही प्रभावित नहीं कर रहा है, बल्कि इसका सीधा असर उन उद्योगों पर पड़ रहा है जो इन चीजों पर निर्भर हैं। कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई चेन में रुकावटें उत्पादन को धीमा कर रही हैं। इससे न केवल घरेलू बाजार प्रभावित हो रहा है, बल्कि निर्यात पर भी असर पड़ रहा है। उद्योगपतियों का कहना है कि वे इस स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक तरीकों पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
वैश्विक बाजारों में अस्थिरता का मतलब है कि कीमतें कभी भी ऊपर-नीचे हो सकती हैं। यह कंपनियों के लिए अपने खर्चों का अनुमान लगाना और योजना बनाना मुश्किल बना देता है। पेट्रो केमिकल प्रोडक्ट के दाम में करीब 30 फीसदी की बढ़ोतरी का मतलब है कि प्लास्टिक और अन्य संबंधित उत्पादों को बनाने की लागत काफी बढ़ गई है। यह सीधे तौर पर अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने वाले उत्पादों की कीमतों को भी प्रभावित कर सकता है।
यह स्थिति उन छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है जिनके पास बड़े उद्योगों की तरह इन झटकों को झेलने की क्षमता कम होती है। उन्हें कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत के कारण उत्पादन रोकना पड़ सकता है, जिससे रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।