हत्यारोपितों के मकान गिराने की मांग

नवभारत टाइम्स

बाराबंकी में मिथुन रावत की हत्या के मामले में पुलिस ने दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। मृतक के परिजन और लाखन आर्मी ने आरोपितों के मकान गिराने, परिवार को शस्त्र लाइसेंस, जमीन और आर्थिक मदद देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रशासन ने मदद का आश्वासन देकर प्रदर्शन समाप्त करवाया।

protest demanding demolition of murderers houses allegations of police negligence
बाराबंकी में 21 वर्षीय मिथुन रावत की हत्या के मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों साहिल उर्फ बाली और गाटन उर्फ अब्दुल करीम को गिरफ्तार किया है। इस बीच, मृतक के परिवार और लाखन आर्मी ने आरोपियों के मकान गिराने और अन्य मांगों को लेकर तीन घंटे तक सड़क पर प्रदर्शन किया। पुलिस और प्रशासन पर कार्रवाई में खानापूर्ति का आरोप लगाते हुए, प्रदर्शनकारियों ने मृतक के परिवार को शस्त्र लाइसेंस, जमीन और आर्थिक मदद की मांग की। अंत में, फतेहपुर तहसीलदार ने मदद का आश्वासन देकर प्रदर्शन समाप्त करवाया।

यह घटना लखनऊ के महिगवां स्थित श्रीरामपुरवा के रहने वाले मिथुन रावत (21) की हत्या से जुड़ी है। छह मार्च की रात को उसकी हत्या कर शव को बाराबंकी के दुर्रीपुरवा में फेंक दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने गुरुवार को कुर्सी के ब्राह्मणी टोला निवासी साहिल उर्फ बाली और गाटन उर्फ अब्दुल करीम को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तारी के बावजूद, मृतक के परिजन और लाखन आर्मी के कार्यकर्ता संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने इटौंजा-कुर्सी रोड पर तीन घंटे तक जोरदार प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांगें थीं कि आरोपियों के बचे हुए मकानों को भी गिराया जाए। इसके अलावा, उन्होंने मृतक मिथुन के परिवार के लिए सुरक्षा की मांग करते हुए शस्त्र लाइसेंस देने की बात कही। साथ ही, परिवार को दो बीघा जमीन और एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद देने की भी मांग की गई।

लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए पुलिस और राजस्व प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। उनकी मांगें सीधे तौर पर प्रशासन को जवाबदेह ठहराने वाली थीं।

प्रदर्शन के अंत में, फतेहपुर की तहसीलदार वैशाली अहलावत मौके पर पहुंचीं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को मदद का आश्वासन दिया, जिसके बाद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन से मामला फिलहाल शांत हुआ है, लेकिन परिवार और संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।