इबादते इलाही में मशगूल रहे इबादतगुज़ार

नवभारत टाइम्स

रमजान के 22वें रोजे के इफ्तार के बाद रोजेदार शब-ए-कद्र की इबादत में लीन हो गए। मस्जिदों और घरों में कुरआन की तिलावत से माहौल रुहानी हो गया। अल्लाह के बंदों ने रात भर इबादत कर गुनाहों की माफी मांगी। यह सिलसिला फज्र की नमाज तक जारी रहा। मस्जिदों को रोशनी से सजाया गया था।

worshippers engaged in shab e qadr prayers sought forgiveness for sins
लखनऊ: रमजान के 22वें रोजे के बाद रोजेदारों ने शब-ए-कद्र की रात इबादत में गुजारी। उन्होंने मस्जिदों और घरों में कुरान की तिलावत की और गुनाहों की माफी मांगी। यह इबादत सुबह की नमाज तक जारी रही।

गुरुवार को रोजा इफ्तार के बाद शाम आठ बजे से ही लोग मस्जिदों की ओर जाने लगे। वहां इमामों ने खास इबादत करवाई। लोगों ने खुद भी दीन की किताबों और कुरान से इबादत की। उन्होंने फर्ज नमाजों के साथ-साथ नफिल नमाजें भी पढ़ीं और तस्बीह पढ़ी। घरों में महिलाएं भी इबादत में लगी रहीं। उन्होंने जहन्नम से आजादी के लिए दुआएं मांगीं।
रमजान की सबसे खास रात शब-ए-कद्र में मस्जिदों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था। झालरों से मस्जिद की मीनारें और गुंबद जगमगा रहे थे। शब-ए-कद्र की इबादत के बाद लोगों ने मस्जिदों में जाकर छह दिन की कजा नमाजें भी पढ़ीं। उन्होंने तस्बीह जनाबे फातेमा जहरा के बाद सुरह कौसर, सूरह अलम, सूरह कुलोवल्लाह और दूसरी सूरतों की तिलावत की। इससे उन्होंने अपने गुनाहों की तौबा की।

इस रात को अल्लाह से माफी मांगने का खास मौका माना जाता है। रोजेदार दिन भर भूखे-प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत करते हैं और रात में खास दुआएं मांगते हैं। यह रात रमजान के आखिरी अशरे में आती है और इसे हजार महीनों से बेहतर माना जाता है।