मोटर दुर्घटनाओं में ~6.92 करोड़ मुआवजा

नवभारत टाइम्स

लखीमपुर खीरी में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। इसमें 80 हजार से अधिक मामलों का समाधान किया गया। मोटर दुर्घटना के 126 मामलों में पीड़ितों को 6 करोड़ 92 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा दिलाया गया। बैंकों ने भी 10 करोड़ 45 लाख रुपये की समझौता राशि जमा करवाई।

lakhimpur kheri lok adalat motor accident victims received 692 crore compensation over 80000 cases resolved
लखीमपुर खीरी में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता जनपद न्यायाधीश शिव कुमार सिंह ने की। इस लोक अदालत में 80 हजार से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। खास बात यह रही कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) में 126 पीड़ितों को 6 करोड़ 92 लाख 638 रुपये का मुआवजा मिला। परिवार न्यायालय में भी 126 मामलों को सुलझाकर टूटे रिश्तों को जोड़ने की कोशिश की गई। बैंकों ने भी इस लोक अदालत में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और 1339 मामलों में 10 करोड़ 45 लाख रुपये की समझौता राशि जमा करवाकर वादों का निपटारा कराया। सबसे ज्यादा मामले राजस्व न्यायालयों में निपटाए गए, जहां 71,847 वादों का समाधान हुआ।

जनपद न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष शिव कुमार सिंह की अगुवाई में हुई इस राष्ट्रीय लोक अदालत में लोगों को न्याय दिलाने का काम तेजी से हुआ। 80 हजार से ज्यादा मामलों को सुलझाया गया, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिली।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) में 126 ऐसे मामले थे जिनमें दुर्घटना के शिकार लोगों को मुआवजा मिलना था। इस लोक अदालत में इन सभी मामलों को निपटाया गया और पीड़ितों को कुल 6 करोड़ 92 लाख 638 रुपये का मुआवजा दिलाया गया। यह रकम उन लोगों के लिए बहुत मायने रखती है जिन्होंने दुर्घटनाओं में अपनों को खोया या खुद चोटिल हुए।

परिवार न्यायालय में भी 126 मामले सुलझाए गए। यहां कोशिश की गई कि जो रिश्ते टूट रहे हैं, उन्हें जोड़ा जा सके। कई बार छोटी-मोटी बातों पर परिवार में अनबन हो जाती है, ऐसे मामलों को लोक अदालत में सुलझाकर लोगों को फिर से एक साथ लाने का प्रयास किया गया।

बैंकों ने भी इस लोक अदालत में अपनी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने 1339 ऐसे मामले निपटाए जिनमें पैसों का लेन-देन या कर्ज से जुड़े मामले थे। इन मामलों में कुल 10 करोड़ 45 लाख रुपये की समझौता राशि जमा करवाई गई, जिससे बैंक और ग्राहक दोनों के बीच मामले सुलझ गए।

सबसे ज्यादा मामले राजस्व न्यायालयों में निपटाए गए। यहां कुल 71,847 वादों का समाधान हुआ। राजस्व न्यायालयों में जमीन-जायदाद, खेती-किसानी से जुड़े मामले आते हैं। इतने सारे मामलों का एक साथ निपटारा होना यह दिखाता है कि लोगों को अपनी जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में कितनी जल्दी न्याय मिला।