National Lok Adalat In Ayodhya And Barabanki Record Number Of Cases Settled Crores In Fines And Compensation Recovered
अयोध्या में 81 हजार, बाराबंकी में 1.76 लाख वाद निस्तारित
नवभारत टाइम्स•
बाराबंकी और अयोध्या में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। बाराबंकी में 1.76 लाख से अधिक मामले निपटाए गए। अयोध्या में 81 हजार से अधिक वादों का समाधान हुआ। दोनों जिलों में करोड़ों रुपये का जुर्माना और प्रतिकर वसूला गया। लोक अदालत ने हजारों लोगों को राहत प्रदान की। यह वैकल्पिक व्यवस्था प्रभावी साबित हुई।
राष्ट्रीय लोक अदालत ने बाराबंकी और अयोध्या में हजारों लोगों को बड़ी राहत दी है। शनिवार को आयोजित इस अदालत में दोनों जिलों में कुल 2,58,466 मामलों का निपटारा किया गया, जिसमें करोड़ों रुपये का जुर्माना और प्रतिकर वसूला गया। बाराबंकी में 1,76,663 मामलों का समाधान हुआ और 34 करोड़ से अधिक का जुर्माना व प्रतिकर प्राप्त हुआ, जबकि अयोध्या में 81,803 वादों का निपटारा हुआ और 18 करोड़ से अधिक की समझौता राशि जमा हुई।
बाराबंकी जिला सत्र न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन जिला सत्र न्यायाधीश प्रतिमा श्रीवास्तव ने किया। यहां विभिन्न न्यायालयों ने 34,670 वादों का निपटारा किया और 11 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया व प्रतिकर वसूला। प्री-लिटिगेशन स्तर पर, यानी अदालत जाने से पहले ही, वैवाहिक, राजस्व, बैंक और अन्य विभागों के 1,41,993 मामलों को सुलझाया गया, जिससे 22 करोड़ से अधिक की राशि वसूली गई।पारिवारिक न्यायालयों ने 197 मामलों में फैसले सुनाए। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण न्यायालय ने 143 मुकदमों का निपटारा करते हुए 9 करोड़ से अधिक के प्रतिकर भुगतान का आदेश दिया। सीजेएम सुधा सिंह ने 10,619 मुकदमों का निपटारा कर 4.62 लाख रुपये का जुर्माना वसूला। दीवानी न्यायालयों ने 147 दीवानी और 67 उत्तराधिकार के मामलों को सुलझाया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव श्रीकृष्ण चन्द्र सिंह ने बताया कि विभिन्न राजस्व न्यायालयों से 75,206 वाद निपटाए गए। बैंकों ने 2,737 एनपीए खातों का निपटारा करके 19.60 करोड़ से अधिक की राशि वसूली।
अयोध्या में जनपद न्यायालय परिसर में हुई लोक अदालत में जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की मूल भावना लोक कल्याण और आपसी सद्भाव पर आधारित है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रंजिनी शुक्ला ने बताया कि मुकदमों की बढ़ती संख्या के बीच लोक अदालत एक बहुत ही प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में सामने आई है। इस दौरान, जनपद न्यायालय, कलेक्ट्रेट और तहसीलों को मिलाकर कुल 81,803 वादों का निपटारा हुआ और 18 करोड़ 23 लाख 50 हजार 335 रुपये की समझौता राशि जमा हुई। यह लोक अदालतें आम लोगों के लिए न्याय पाने का एक सरल और त्वरित माध्यम साबित हो रही हैं।