वेटलैंड में अतिक्रमण के ठोस सबूत दें: NGT

नवभारत टाइम्स

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने बाराबंकी के वेटलैंड में अतिक्रमण के मामले में प्रशासन की रिपोर्ट पर शिकायतकर्ताओं से ठोस सबूत मांगे हैं। अगली सुनवाई 18 मई को होगी। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कई क्षेत्रों में जल निकायों पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण का मुद्दा उठाया था। अधिकरण ने पहले अवैध निर्माण रोकने का निर्देश दिया था।

ngt seeks concrete evidence on wetland encroachment next hearing on may 18
एनजीटी ने बाराबंकी के जल निकायों में अतिक्रमण की रिपोर्ट पर शिकायतकर्ताओं से सबूत मांगे हैं। अगली सुनवाई 18 मई को होगी। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सरायबरई, सराही, फतेहपुर बघार, नटकौली, हैदरगढ़, चकरौरा, भीतरी और रामनगर जैसे इलाकों में जल निकायों पर कब्जे और अवैध निर्माण की शिकायत की थी। दिसंबर 2025 में हुई सुनवाई में एनजीटी ने जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इन जल निकायों और उनके आसपास किसी भी तरह के अवैध निर्माण को रोकने का आदेश दिया था। प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कहीं भी अतिक्रमण या अवैध निर्माण नहीं हुआ है।

एनजीटी ने अब शिकायत करने वाले पर्यावरण कार्यकर्ताओं, नरेन्द्र कुशवाहा, चंद्रप्रकाश तिवारी, बीएल भास्कर और डॉ. अजय कुमार से इस मामले में ठोस सबूत पेश करने को कहा है। यह मामला बाराबंकी के कई महत्वपूर्ण जल स्रोतों से जुड़ा है, जिन पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण की बात कही गई थी।
अधिकरण ने पहले ही जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया था कि वे सुनिश्चित करें कि जल निकायों और उनके बफर जोन (सुरक्षा क्षेत्र) में कोई भी अवैध निर्माण न हो। इसके जवाब में प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि ऐसी कोई भी गतिविधि नहीं हो रही है।

अब एनजीटी इस मामले की अगली सुनवाई 18 मई को करेगा। इस सुनवाई में शिकायतकर्ताओं को अपने दावों के समर्थन में सबूत पेश करने होंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या शिकायतकर्ता अपने दावों को साबित कर पाते हैं या नहीं।