Now Seven Subjects In 9th 10th Result To Be Based On Best Six Haryana Board Changes Rules
9वीं-10वीं में सात विषय पढ़ने होंगे, बेस्ट सिक्स पर तैयार होगा रिजल्ट
नवभारत टाइम्स•
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने नौवीं और दसवीं के छात्रों के लिए नए नियम जारी किए हैं। अब छात्रों को सात विषय पढ़ने होंगे और छह विषयों के आधार पर उनका परिणाम तय होगा। त्रि-भाषाई फॉर्म्युला लागू किया गया है। संस्कृत, उर्दू या पंजाबी में से एक भाषा का चयन अनिवार्य होगा।
भिवानी: हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने राज्य के स्कूलों में त्रि-भाषाई फॉर्म्युला लागू कर दिया है। यह बदलाव कक्षा 9वीं में सत्र 2025-26 से और कक्षा 10वीं में सत्र 2026-27 से लागू होगा। इस नए नियम के तहत अब छात्रों को सात विषयों में से छह विषयों के आधार पर पास किया जाएगा। यह बदलाव परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया है और हरियाणा मुक्त विद्यालय के छात्रों पर भी लागू होगा।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन पवन कुमार ने शनिवार को इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि त्रि-भाषाई व्यवस्था के तहत अब छात्रों को कुल सात विषय पढ़ने होंगे। पहले 'बेस्ट फाइव' फॉर्म्युला चलता था, लेकिन अब उसकी जगह 'बेस्ट सिक्स' फॉर्म्युला लागू होगा। इसका मतलब है कि छात्रों का रिजल्ट सात में से उनके छह सबसे अच्छे नंबर वाले विषयों के आधार पर बनेगा।इस नई व्यवस्था में छात्रों के लिए एक खास बात यह है कि उन्हें संस्कृत, उर्दू या पंजाबी में से कोई एक भाषा चुनना अनिवार्य होगा। पहले एक नियम था कि अगर कोई छात्र संस्कृत में फेल हो जाता था, तो उसे हिंदी विषय में पास माना जाता था। लेकिन अब यह नियम खत्म कर दिया गया है।
बोर्ड ने आठवीं के बाद आईटीआई करने वाले छात्रों के लिए भी नियमों में बदलाव किया है। अब कक्षा 10वीं के बराबर सर्टिफिकेट पाने के लिए छात्रों को तीन भाषाएं पास करनी होंगी। इनमें हिंदी, अंग्रेजी और एक वैकल्पिक भाषा (संस्कृत, उर्दू या पंजाबी) शामिल है। पहले यह संख्या दो भाषाओं की थी।
यह नया फॉर्म्युला सिर्फ रेगुलर छात्रों के लिए ही नहीं है। हरियाणा मुक्त विद्यालय (ओपन स्कूल) के छात्रों पर भी यह नियम वैसे ही लागू होगा। चेयरमैन पवन कुमार ने कहा कि यह बदलाव परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। इससे छात्रों को भाषाओं पर ज्यादा ध्यान देने का मौका मिलेगा और वे बहुभाषी बनेंगे।
इस बदलाव से छात्रों को अपनी पसंद की भाषा चुनने की आजादी मिलेगी, लेकिन साथ ही उन्हें एक अतिरिक्त भाषा पर भी ध्यान देना होगा। यह कदम छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।