निर्माण पर रोक से तीन लाख मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट!

नवभारतटाइम्स.कॉम•
construction ban puts livelihoods of three lakh workers at risk
nNBT रिपोर्ट, गुड़गांव

शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से धूल उड़ाने वाले निर्माण व तोड़फोड़ के काम पर 15 दिनों की रोक लगाने का फैसला लाखों मजदूरों की रोजी-रोटी पर भारी पड़ सकता है। जिले में रियल एस्टेट व निर्माण क्षेत्र से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 2.5 से तीन लाख मजदूर जुड़े हुए हैं। इनमें दिहाड़ी श्रमिक, मिस्त्री, क्रेन और साइट ऑपरेटर के साथ बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर शामिल हैं। निर्माण कार्य रुकने से इनकी रोजाना की कमाई प्रभावित होने की आशंका है।
जिले में रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े स्तर पर निर्माण कार्य चल रहा है। शहर में एक हजार से अधिक रजिस्टर्ड प्रॉजेक्ट हैं। इनमें करीब 850 आवासीय व कमर्शल अलग-अलग चरणों में चल रहे हैं। इन प्रॉजेक्ट्स में बड़ी संख्या में श्रमिक काम कर रहे हैं। इसके अलावा टाउनशिप डिवेलपमेंट और निर्माण सामग्री की सप्लाई से जुड़े कामों में भी हजारों लोगों की आजीविका निर्भर है। निर्माण गतिविधियों के प्रमुख केंद्रों में द्वारका एक्सप्रेस-वे, सदर्न पेरिफेरल रोड (SPR), गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और न्यू गुड़गांव के सेक्टर-75 से 95 तक का इलाका शामिल है। इन क्षेत्रों में आवासीय सोसायटी, कमर्शियल बिल्डिंग और सैकड़ों करोड़ के बड़े प्रॉजेक्ट्स का निर्माण अलग-अलग चरणों में चल रहा है। निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले अधिकतर मजदूरों को रोजाना के हिसाब से भुगतान मिलता है। ऐसे में काम बंद होने का सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ता है। दूसरे राज्यों से आए प्रवासी श्रमिकों के लिए स्थिति और मुश्किल हो सकती है। इनमें से कई मजदूर परिवार के साथ गुड़गांव में किराये पर रहते हैं और उनकी रोजमर्रा की जरूरतें इसी कमाई पर निर्भर हैं। 15 दिनों तक काम नहीं मिलने की स्थिति में किराया, राशन और दूसरे जरूरी खर्च पूरे करना चुनौती बन सकता है।

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