ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट में सिंगल टू वे रूट बनाने पर बातचीत कर रहे हैं
ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट में सिंगल टू-वे रूट बनाने पर बातचीत कर रहे हैं
NewsPoint•
ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए एक नया, सिंगल टू-वे रूट बनाने पर विचार कर रहे हैं। यह कदम जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और शिपिंग को लेकर चल रही चिंताओं के बीच आया है। तेहरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि यह प्रस्तावित व्यवस्था मौजूदा कई अलग-अलग लेन की जगह लेगी, जिससे जहाजों के लिए नेविगेट करना आसान हो जाएगा। यह कॉरिडोर दोनों देशों के हितों और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा। हालांकि, ओमान की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह नया रूट उन देशों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा जिनकी अर्थव्यवस्था ऊर्जा शिपिंग पर निर्भर है और जो इस मार्ग पर रोक लगने से परेशान हैं। आईआरएनए समाचार एजेंसी के अनुसार, प्रवक्ता बाघेई ने स्पष्ट किया कि इस बातचीत में किसी तीसरे देश की भागीदारी नहीं है, जिसका मतलब है कि अमेरिका इस योजना से बाहर रहेगा। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के विपरीत है जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ स्ट्रेट को फिर से खोलने पर बातचीत चल रही है।ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव काफी समय से चल रहा है। ईरान ने जलडमरूमध्य में समुद्री सुरंगें (माइनिंग) बिछाई हैं और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमले भी किए हैं। इसके जवाब में, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों को ब्लॉक कर दिया है और उल्लंघन करने वाले जहाजों पर फायरिंग की है। आईआरएनए ने बताया कि यह प्रस्तावित अंतरिम कॉरिडोर तब तक इस्तेमाल में रहेगा जब तक ईरान और ओमान मौजूदा इंटरनेशनल ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (टीएसएस) के स्थायी विकल्प पर सहमत नहीं हो जाते।
टीएसएस, जिसे 1968 में ईरान और ओमान ने संयुक्त रूप से संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (आईएमओ) को प्रस्तावित किया था, समुद्री यातायात के लिए शिपिंग लेन निर्धारित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य जहाजों के बीच टकराव को कम करना और सुरक्षा को बढ़ाना है। आईएमओ के अनुसार, टीएसएस में दोनों दिशाओं के लिए 2 मील चौड़ी लेनें तय की गई हैं और उनके बीच 2 मील का अलगाव वाला हिस्सा है। हालांकि, हाल ही में खदानों की मौजूदगी की खबरों के कारण, आईएमओ ने जहाजों को टीएसएस से बचने की सलाह दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मस्कट-तेहरान योजना के तहत, होर्मुज जलडमरूमध्य को एक हाईवे की तरह चलाया जाएगा, जिसमें जहाज दाहिने हाथ की लेन में चलेंगे। खाड़ी देशों की ओर जाने वाले जहाज ईरान के किनारे वाले रास्ते का इस्तेमाल करेंगे, जबकि बाहर निकलने वाले जहाज ओमान की तरफ वाले रास्ते से जाएंगे। लेकिन, बाघेई ने इस बात पर जोर दिया कि ओमान के जल क्षेत्र से होकर गुजरने वाला दक्षिणी मार्ग, जिसे वाशिंगटन चलाना चाहता था, वह अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुए सहमति-पत्र का उल्लंघन था। इससे पर्यावरणीय और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी पैदा हुईं।
अमेरिकी नौसेना ने कुछ जहाजों को ओमान की तरफ से सुरक्षा प्रदान की थी, लेकिन उन जहाजों पर हमले हुए जिसके बाद इस व्यवस्था को रोक दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि इस नई व्यवस्था के तहत, ईरान अपने हिस्से से गुजरने वाले जहाजों से एक सर्विस फीस ले सकता है। इसे टोल नहीं कहा जाएगा ताकि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन न हो, जिसका अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ा विरोध किया है। हालांकि, ब्रीफिंग की रिपोर्ट्स के अनुसार, बाघेई ने फीस के सवाल पर सीधे जवाब देने से परहेज किया।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक है, खासकर तेल और गैस के परिवहन के लिए। इस जलडमरूमध्य से हर दिन लाखों बैरल तेल गुजरता है। इसलिए, यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।
ईरान का यह प्रस्ताव, ओमान के साथ मिलकर, इस रणनीतिक जलमार्ग पर शिपिंग को सुरक्षित और सुचारू बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। यह उन देशों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है जो ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता को लेकर चिंतित हैं। हालांकि, ओमान की चुप्पी इस मामले में एक अनिश्चितता बनाए हुए है। यह देखना बाकी है कि ओमान इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है और क्या यह दोनों देशों के बीच एक स्थायी समाधान की ओर ले जाता है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि ईरान ने हाल के महीनों में जलडमरूमध्य में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है और कई बार अमेरिकी नौसेना के जहाजों के साथ टकराव की स्थिति भी बनी है। ऐसे में, एक साझा और सुरक्षित मार्ग का प्रस्ताव तनाव कम करने और क्षेत्र में स्थिरता लाने में मददगार साबित हो सकता है। यह योजना ईरान को अपनी संप्रभुता बनाए रखने और साथ ही अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को सुविधाजनक बनाने का एक तरीका प्रदान करती है।
प्रवक्ता बाघेई ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह बातचीत पूरी तरह से द्विपक्षीय है और इसमें किसी अन्य देश का हस्तक्षेप नहीं होगा। यह ईरान की अपनी विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें वह अपने पड़ोसियों के साथ सीधे संवाद के माध्यम से मुद्दों को हल करने पर जोर देता है। अमेरिका की ओर से इस मामले में किसी भी तरह की दखलअंदाजी को ईरान स्वीकार नहीं करेगा, जैसा कि पहले भी कई मौकों पर स्पष्ट किया जा चुका है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया प्रस्ताव कैसे आकार लेता है और क्या यह वास्तव में होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग के लिए एक स्थायी समाधान प्रदान कर पाता है। फिलहाल, यह एक उम्मीद की किरण है जो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर बढ़ते तनाव को कम करने में मदद कर सकती है।