डीएमके ने तमिलनाडु के सीएम विजय और वाइको पर विधायकों को प्रलोभन देने का लगाया आरोप, डीवीएसी जांच की मांग

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Navbharat Times
चेन्नई, 1 जुलाई। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) ने तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि से मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके) के महासचिव वाइको के खिलाफ दो विधायकों को विधानसभा से इस्तीफा देने के लिए कथित तौर पर उकसाने के मामले की निदेशालय सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक (डीवीएसी) से जांच कराने की मांग की है। डीएमके का आरोप है कि यह राजनीतिक प्रलोभन के जरिए विधानसभा की मौजूदा संरचना को असंवैधानिक तरीके से बदलने का प्रयास है। यह शिकायत वाइको के एक सार्वजनिक बयान पर आधारित है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मुख्यमंत्री स्टालिन ने उनसे दोनों विधायकों को इस्तीफा देने के लिए मनाने का अनुरोध किया था।

डीएमके के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने राज्यपाल और डीवीएसी को सौंपे एक विस्तृत ज्ञापन में कहा कि मुख्यमंत्री स्टालिन और वाइको ने कथित तौर पर कडायनल्लूर से विधायक टी.एम. राजेंद्रन और सिर्काझी से विधायक एस. सेंथिल सेल्वन को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने और फिर उपचुनाव लड़ने के लिए प्रेरित करने की साजिश रची। हालांकि ये दोनों विधायक एमडीएमके से जुड़े हैं, लेकिन वे पिछले गठबंधन के तहत डीएमके के चुनाव चिह्न ‘राइजिंग सन’ पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। डीएमके का मानना है कि इन विधायकों से इस्तीफा दिलाने की कोई भी कोशिश, राजनीतिक लालच देकर विधानसभा की मौजूदा स्थिति को गैर-कानूनी तरीके से बदलने का एक प्रयास है।
पार्टी की शिकायत एमडीएमके की आम परिषद की बैठक में वाइको द्वारा दिए गए एक बयान पर आधारित है। आर.एस. भारती के अनुसार, वाइको ने बैठक में कहा था कि मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने पट्टिनापक्कम स्थित आवास पर हुई मुलाकात के दौरान उनसे दोनों विधायकों को इस्तीफा देने के लिए मनाने का अनुरोध किया था। भारती ने यह भी आरोप लगाया कि वाइको ने कहा कि यदि दोनों विधायक इस्तीफा देकर उपचुनाव लड़ते हैं, तो मुख्यमंत्री स्टालिन खुद उनके लिए चुनाव प्रचार करेंगे।

डीएमके ने कहा कि यदि वाइको के ये बयान सच हैं, तो यह निर्वाचित प्रतिनिधियों को राजनीतिक लालच देकर प्रभावित करने और “हॉर्स ट्रेडिंग” का एक सीधा मामला बनता है। पार्टी का यह भी कहना है कि इस तरह की हरकतें जनता द्वारा चुने गए विधायकों के संवैधानिक अधिकार में दखलअंदाजी हैं। राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन में आर.एस. भारती ने आरोप लगाया कि वाइको के सार्वजनिक बयान खुद मुख्यमंत्री स्टालिन की कथित भूमिका की ओर इशारा करते हैं, इसलिए इस मामले में आपराधिक जांच जरूरी है।

डीएमके ने राज्यपाल आर.एन. रवि से अपील की है कि वे इस कथित भ्रष्ट आचरण पर “आंखें बंद” न करें, क्योंकि इससे संवैधानिक मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंचती है। पार्टी ने राज्यपाल से डीवीएसी को तत्काल प्राथमिकी (First Information Report) दर्ज करने और कानून के अनुसार इसकी पूरी जांच कराने का निर्देश देने की मांग की है। भारती ने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा संज्ञेय अपराधों के पंजीकरण और जांच को लेकर तय किए गए सिद्धांतों के अनुसार, डीवीएसी का इस शिकायत पर कार्रवाई करना उसका कानूनी कर्तव्य है। यह पूरा मामला तमिलनाडु की राजनीति में एक नया मोड़ ले सकता है, जहां विधायकों की निष्ठा और राजनीतिक सौदेबाजी पर सवाल उठ रहे हैं। डीएमके इस मामले को लेकर काफी गंभीर है और चाहती है कि राज्यपाल हस्तक्षेप करें और दोषियों को सजा मिले।

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