डकैत जगन गुर्जर की अजमेर जेल में हत्या: पैतृक गांव में कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार, जेल प्रशासन पर उठे सवाल

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Navbharat Times
अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल में 29 जून को कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई थी. इस सनसनीखेज वारदात के बाद, बुधवार को धौलपुर के पैतृक गांव भावुतिपुरा में कड़ी सुरक्षा के बीच जगन गुर्जर का अंतिम संस्कार किया गया. उसके बेटे आसाराम ने मुखाग्नि दी. इस दौरान, जगन के तीन भाइयों, पान सिंह, लाल सिंह और पप्पू सिंह को एसटीएफ की कड़ी निगरानी में जेल से लाया गया था. भाई को आखिरी बार देखने के बाद, उन्हें तुरंत वापस जेल भेज दिया गया. इस पूरी घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जगन गुर्जर के अंतिम संस्कार के लिए उसके भाइयों को विशेष सुरक्षा में लाया गया था. उन्हें अजमेर पुलिस, धौलपुर एसटीएफ और धौलपुर पुलिस की टीमों ने अलग-अलग संभाला. अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए लगभग 100 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था. सुबह करीब 7:30 बजे जगन का शव भावुतिपुरा पहुंचा. इस दौरान पूरा गांव एक किले में तब्दील हो गया था. नौ थानों की पुलिस, जिनमें सोने का गुर्जा, बाड़ी सदर, बाड़ी कोतवाली, बसई डांग, कंचनपुर, निहालंगंज, धौलपुर सदर, राजाखेड़ा और मनिया शामिल थे, पूरे इलाके में तैनात थीं. सुरक्षा व्यवस्था की कमान खुद एडिशनल एसपी श्रवण कुमार और सर्कल ऑफिसर महेंद्र कुमार ने संभाली थी.
यह आरोप है कि 29 जून को अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल के अंदर ही जगन गुर्जर की हत्या हुई. परिवार का कहना है कि भरतपुर के कुलदीप जघीना मर्डर केस के आरोपी विष्णु ने बैरक के अंदर ही तौलिए से जगन का गला घोंट दिया. यह दोनों खतरनाक कैदी एक ही बैरक में रखे गए थे. इस घटना के बाद जगन के परिवार ने जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था. मंगलवार को अधिकारियों से बातचीत के बाद, परिवार पोस्टमार्टम के लिए राजी हो गया, जो शव सौंपने से पहले अजमेर में किया गया.

बाड़ी के पूर्व प्रधान पूरन सिंह ने इस घटना को 'जेल प्रशासन की पूरी विफलता' करार दिया. उन्होंने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. वहीं, जगन के बेटे आसाराम ने बाड़ी पुलिस स्टेशन के एसएचओ पर उसे एक क्रिमिनल केस में झूठा फंसाने का आरोप लगाया. इस हत्या ने अजमेर हाई-सिक्योरिटी जेल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

जेल सुपरिटेंडेंट पारस जांगिड़ ने बताया कि बैरक के बाहर के cctv फुटेज में घटना से पहले जगन और विष्णु को सामान्य रूप से बातचीत करते देखा गया था. हालांकि, जांच करने वालों को cctv कैमरे पर टूथपेस्ट लगा मिला. इससे यह शक पैदा होता है कि रिकॉर्डिंग में जानबूझकर रुकावट डालने की कोशिश की गई थी. इसके अलावा, पंखे से एक गमछा लटका हुआ मिला, जिससे यह संकेत मिलता है कि हत्या को आत्महत्या दिखाने का प्रयास किया गया था. यह सब मिलकर इस मामले को और भी पेचीदा बना देता है.

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