राम मंदिर ट्रस्ट में गोपाल राव की भूमिका पर सवाल, साधुओं ने की निष्पक्ष जांच की मांग

NewsPoint
Navbharat Times
अयोध्या में राम मंदिर को लेकर चल रहे विवाद के बीच गोपाल राव नाम के एक व्यक्ति की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। साधु कल्कि राम और वरुण दास ने आरोप लगाया है कि गोपाल राव का राम मंदिर ट्रस्ट में कोई योगदान नहीं है और उन्हें तुरंत वहां से हटा दिया जाना चाहिए। दोनों संतों ने उनकी भूमिका की जांच कराने और उचित कार्रवाई की मांग की है।

साधु कल्कि राम ने बातचीत में बताया कि पूज्य दिनेंद्र दास ने भी गोपाल राव के बारे में चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि गोपाल राव "अच्छे नहीं लग रहे हैं"। हाल ही में चढ़ावा चोरी के मामले में जब पत्रकारों ने गोपाल राव से सवाल किए, तो उन्होंने हंसते हुए कहा, "लगता है कि मीडिया ने इस मामले को ऐसे उछाल दिए हैं कि चंपत राय का इस्तीफा लेकर मानेंगे।" साधु कल्कि राम के अनुसार, ऐसी गंभीर स्थिति में इस तरह हंसना बहुत कुछ कहता है। किसी भी गंभीर घटना के दौरान व्यक्ति के हाव-भाव बहुत कुछ स्पष्ट कर देते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि सुनने में आया है कि मंदिर में पुजारियों द्वारा श्रद्धालुओं को दिए जाने वाले चरणोदक (पवित्र जल) पर रोक लगा दी गई है। साधु कल्कि राम के अनुसार, अयोध्या की परंपरा के अनुसार हर भक्त को मंदिर में दर्शन के बाद चरणोदक और चंदन मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि साधु-संतों के साथ सामान्य व्यवहार किया जाता है, जबकि बाहर से आने वाले वीआईपी लोगों के स्वागत के लिए खास इंतजाम किए जाते हैं। साधु कल्कि राम का कहना है कि गोपाल राव मंदिर के पदाधिकारियों से भी ज्यादा प्रभावशाली भूमिका निभाते हुए दिखाई देते थे। इसलिए, उनकी भूमिका संदिग्ध लगती है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अगर वे पूरी तरह निर्दोष हैं, तो जांच के बाद यह बात भी सामने आ जानी चाहिए।

साधु वरुण दास ने भी गोपाल राव की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की कमेटी में गोपाल राव की कोई भूमिका नहीं है और वे मंदिर के कर्मचारी भी नहीं हैं। इसके बावजूद, जब देश के राष्ट्रपति या किसी अन्य राष्ट्राध्यक्ष का आगमन होता है, तो गोपाल राव उनके पास खड़े दिखाई देते हैं। मंदिर परिसर में कहीं भी जाने पर गोपाल राव आसानी से दिख जाते हैं। साधु वरुण दास के अनुसार, पूज्य दिनेंद्र दास द्वारा उठाया गया मुद्दा बहुत गंभीर है। उन्होंने सवाल किया कि जिस व्यक्ति का ट्रस्ट से कोई संबंध नहीं है और जो मंदिर का कर्मचारी भी नहीं है, वह आखिर मंदिर में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका कैसे निभा रहा है? इससे समाज में गलत संदेश जा रहा है, जबकि पहले से ही लोगों में गुस्सा है।

साधु वरुण दास ने आगे कहा कि वे खुद हर दिन दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं और लगातार गोपाल राव को मंदिर परिसर में देखते हैं। उन्होंने मांग की कि गोपाल राव के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए और उन्हें अयोध्या से बाहर भेजा जाए।

रेकमेंडेड खबरें