सागर: बंडा अस्पताल में बच्चे की दृष्टि जाने का मामला, कुपोषण और विटामिन ए की कमी निकली वजह
सागर: बंडा अस्पताल में बच्चे की दृष्टि जाने का मामला, कुपोषण और विटामिन ए की कमी निकली वजह
NewsPoint•
सागर/भोपाल, 1 जुलाई। मध्य प्रदेश के सागर जिले में बंडा सिविल अस्पताल में इलाज के बाद 19 महीने के बच्चे की आँखों की रोशनी जाने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बच्चा कुपोषण और विटामिन ए की गंभीर कमी से पीड़ित था, जिसके कारण उसकी आँखों के कॉर्निया में अल्सर (घाव) हो गए थे। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में यह भी साफ हो गया है कि बच्चे की दृष्टि जाने का कारण कथित तौर पर दी गई सामान्य सलाइन नेजल ड्रॉप्स नहीं थे।
कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी देवेश पाटेरिया ने बताया कि बच्चा फिलहाल एम्स भोपाल में भर्ती है। वहाँ डॉक्टर उसके कॉर्निया का ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, "बच्चा कुपोषित था और विटामिन ए की गंभीर कमी के कारण उसे कॉर्नियल अल्सर हो गया था। जिस बैच के नेजल ड्रॉप्स की बात की जा रही है, वह अस्पताल के स्टॉक में उपलब्ध ही नहीं था। डॉक्टरों ने भी स्पष्ट किया है कि सामान्य सलाइन नेजल ड्रॉप्स से दृष्टि नहीं जा सकती।" उन्होंने यह भी बताया कि इस बात की जांच अभी भी चल रही है कि बच्चे को ये ड्रॉप्स कैसे दिए गए। सरकार ने बच्चे के इलाज में हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।यह मामला तब प्रकाश में आया जब बच्चे के पिता इंद्रज विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि 29 मई को बंडा सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान उनके 19 महीने के बेटे विनय को आँखों की दवा की जगह गलती से नेजल ड्रॉप्स दे दिए गए थे। परिवार का कहना है कि ड्रॉप्स डालने के तुरंत बाद बच्चे को आँखों में तेज जलन हुई और बाद में उसकी आँखों की रोशनी चली गई। बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे पहले जिला अस्पताल सागर और फिर बेहतर इलाज के लिए एम्स भोपाल भेजा गया।
इस शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति ने दो दिन की जांच के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है। समिति ने इस निष्कर्ष पर पहुँचा है कि बच्चे की आँखों की समस्या का मुख्य कारण कुपोषण, विटामिन ए की गंभीर कमी और उससे बने कॉर्नियल अल्सर हैं। हालांकि, समिति ने यह भी कहा है कि यह मामला अभी पूरी तरह से सुलझा नहीं है और इस बात की जांच जारी है कि बच्चे को नेजल ड्रॉप्स कैसे दिए गए। पुलिस भी इस मामले की अलग से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी भी तरह की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना बच्चों के स्वास्थ्य और दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कुपोषण एक बड़ी समस्या है जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करती है। विटामिन ए की कमी से आँखों की गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं, जिनमें अंधापन भी शामिल है। ऐसे मामलों में अस्पतालों में दवाओं के वितरण और इस्तेमाल में अत्यधिक सावधानी बरतना आवश्यक है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीजों को सही दवा और सही मात्रा में ही दी जाए।
बच्चे के पिता इंद्रज विश्वकर्मा ने बताया कि उनके बेटे विनय को बंडा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहाँ इलाज के दौरान कथित तौर पर गलती से आँखों की दवा की जगह नेजल ड्रॉप्स दे दिए गए। परिवार का आरोप है कि इन ड्रॉप्स के कारण बच्चे की आँखों में तेज जलन हुई और धीरे-धीरे उसकी आँखों की रोशनी चली गई। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट हो गई है कि बच्चे की आँखों की रोशनी जाने का कारण कुपोषण और विटामिन ए की कमी है। कॉर्निया में अल्सर (घाव) होने से उसकी आँखों की रोशनी चली गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिस बैच के नेजल ड्रॉप्स का जिक्र किया जा रहा है, वह अस्पताल के स्टॉक में था ही नहीं। डॉक्टरों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि सामान्य सलाइन नेजल ड्रॉप्स से आँखों की रोशनी नहीं जा सकती। यह एक राहत की बात है कि नेजल ड्रॉप्स को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है, लेकिन यह जांच अभी भी जारी है कि आखिर बच्चे को ये ड्रॉप्स दिए कैसे गए।
फिलहाल, बच्चा एम्स भोपाल में भर्ती है और डॉक्टरों ने उसके कॉर्निया ट्रांसप्लांट की योजना बनाई है। सरकार ने बच्चे के इलाज का पूरा खर्च उठाने और हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही और सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करता है। पुलिस भी अपनी जांच कर रही है और अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।