आईएनएस सुदर्शिनी न्यूयॉर्क के लिए रवाना, समुद्री सहयोग और भारत की विरासत को बढ़ावा

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Navbharat Times
वॉशिंगटन, 1 जुलाई: भारतीय नौसेना का जहाज आईएनएस सुदर्शिनी बुधवार को न्यूयॉर्क के लिए रवाना हो गया, जहाँ वह 'सेल-फोर्थ टू-हंड्रेड-फिफ्टी न्यूयॉर्क' और 'सेल बोस्टन' जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा। इस यात्रा का उद्देश्य समुद्री सहयोग को मजबूत करना और भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है। भारतीय नौसेना ने 'एक् स' पर यह जानकारी साझा करते हुए कहा, "अगला पड़ाव न्यूयॉर्क। समुद्री यात्रा की पुरानी परंपरा और India की समृद्ध समुद्री विरासत को आगे बढ़ाते हुए आईएनएस सुदर्शिनी न्यूयॉर्क के लिए रवाना हो गया है। यह सेल-फोर्थ टू-हंड्रेड-फिफ्टी न्यूयॉर्क और सेल बोस् टन कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा। यह यात्रा देशों के बीच दोस्ती, सहयोग, सद्भावना और आपसी भरोसे के लिए India की मजबूत प्रतिबद्धता को दिखाती है।"

इससे पहले, आईएनएस सुदर्शिनी ने बाल्टीमोर बंदरगाह पर अपने प्रवास के दौरान कई अहम कार्यक्रमों में भाग लिया। इस दौरान अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा और मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने जहाज का दौरा किया। जहाज के दल ने बाल्टीमोर सिटी परेड में भी हिस्सा लिया। भारतीय नौसेना ने 'एक् स' पर इस बारे में बताते हुए लिखा, "अटलांटिक के पार समुद्री रिश्तों को मजबूत करते हुए। बाल्टीमोर में अपने प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना के टॉल शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लिया। जहाज पर India के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा और मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर का स्वागत किया गया। चालक दल ने सेल-टू-फिफ्टी मैरीलैंड के तहत आयोजित बाल्टीमोर सिटी परेड में भी हिस्सा लिया।"
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आईएनएस सुदर्शिनी का बाल्टीमोर बंदरगाह पहुंचना भारत की शानदार समुद्री विरासत और भारत-अमेरिका नौसेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे दोस्ती और सहयोग के रिश्तों का प्रतीक है। यह जहाज अपने खास ट्रांसओशैनिक अभियान 'लोकायन 26' के तहत 26 जून को वर्जीनिया के नॉरफॉक से यात्रा करते हुए बाल्टीमोर पहुंचा था। इस दौरान जहाज ने ऐतिहासिक चेसापीक एंड डेलावेयर (सी एंड डी) नहर से होकर सफर तय किया और मिड-अटलांटिक क्षेत्र के कई बड़े पुलों के नीचे से गुजरा।

आईएनएस सुदर्शिनी ने 19 से 23 जून तक नॉरफॉक में आयोजित 'सेल टू-फिफ्टी वर्जीनिया' समारोह में भी भाग लिया था। इस बड़े कार्यक्रम में दुनिया भर से कई टॉल शिप (बड़े पाल वाले जहाज) शामिल हुए थे। भारतीय जहाज ने 'परेड ऑफ सेल' और 'सिटी क्रू परेड' में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह यात्रा भारत की समुद्री शक्ति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।

'टॉल शिप' ऐसे बड़े जहाज होते हैं जिनमें पाल (कपड़े के बड़े पर्दे जो हवा से चलते हैं) लगे होते हैं। ये जहाज ऐतिहासिक रूप से समुद्री यात्राओं में इस्तेमाल होते रहे हैं। आईएनएस सुदर्शिनी भारत का एक ऐसा ही टॉल शिप है जो अब समुद्री सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए दुनिया भर की यात्राएं कर रहा है। इस तरह की यात्राएं देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह जहाज न केवल भारत की नौसैनिक क्षमता का प्रदर्शन करता है, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दुनिया के सामने पेश करता है। न्यूयॉर्क और बोस्टन में होने वाले कार्यक्रम इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम हैं।

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