भारत और मलेशिया ने रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए 12वीं उप समिति बैठक की
भारत और मलेशिया ने रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए 12वीं उप-समिति बैठक की
NewsPoint•
नई दिल्ली, 1 जुलाई। भारत और मलेशिया ने अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नई दिल्ली में 1 जुलाई को सैन्य सहयोग पर 12वीं भारत-मलेशिया उप-समिति बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा से जुड़े लगभग सभी अहम मुद्दों पर चर्चा की और भविष्य में सहयोग की रूपरेखा तैयार की।
बैठक में दोनों देशों ने सैन्य सहयोग की अब तक की प्रगति की समीक्षा की। सैन्य अभ्यास, सैनिकों के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, स्टाफ वार्ताओं, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में हुए सहयोग पर दोनों पक्षों ने संतोष व्यक्त किया। दोनों देशों ने माना कि पिछले कुछ वर्षों में रक्षा संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और अब इन्हें अगले स्तर तक ले जाने का समय आ गया है। भारत और मलेशिया ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच संपर्क और बढ़ाया जाएगा। सैनिकों को एक-दूसरे के प्रशिक्षण संस्थानों में भेजने, पेशेवर अनुभव साझा करने और संयुक्त गतिविधियों की संख्या बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर समझ और तालमेल विकसित होगा।बैठक में रक्षा उद्योग और आधुनिक तकनीक पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने रक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, रक्षा उत्पादन तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया। तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल को देखते हुए इन क्षेत्रों को भविष्य की जरूरत बताया गया।
क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा हालात पर भी चर्चा हुई। भारत और मलेशिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था के जरिए ही क्षेत्र में स्थायी शांति सुनिश्चित की जा सकती है।
आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को भी महत्वपूर्ण विषय माना गया। दोनों पक्षों ने आतंकवाद-रोधी प्रयासों में मिलकर काम करने और क्षेत्रीय मंचों के माध्यम से सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि रक्षा सहयोग भारत और मलेशिया की उन्नत रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख आधार बन चुका है। दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि आपसी विश्वास, साझा हितों और सुरक्षित एवं समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र की समान सोच के आधार पर रक्षा संबंधों को और गहरा किया जाएगा।
भारत यात्रा के दौरान मलेशियाई सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर भारत के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा सचिव से मुलाकात की और भारत के रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिष्ठानों का भी दौरा किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियानों और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलेगी। यह न केवल भारत और मलेशिया के संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को भी बढ़ावा देगा।
बैठक में दोनों देशों ने सैन्य अभ्यास को बढ़ाने पर भी जोर दिया। इसका मतलब है कि भारतीय और मलेशियाई सैनिक मिलकर और ज्यादा ट्रेनिंग करेंगे। इससे वे एक-दूसरे की युद्ध लड़ने की तकनीकों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे। सैनिकों के एक-दूसरे के देशों में जाकर प्रशिक्षण लेने से भी आपसी समझ बढ़ेगी। यह एक तरह से दोनों देशों की सेनाओं के बीच दोस्ती का नया अध्याय खोलेगा।
रक्षा उद्योग और नई तकनीकों पर भी खास ध्यान दिया गया। दोनों देश मिलकर रक्षा से जुड़ी नई तकनीकें विकसित करने पर काम करेंगे। साइबर सुरक्षा, यानी कंप्यूटर और इंटरनेट से जुड़े हमलों से बचाव के तरीकों पर भी सहयोग बढ़ेगा। इसके अलावा, अगर कहीं प्राकृतिक आपदा आती है, तो दोनों देश मिलकर लोगों की मदद करेंगे। यह दिखाता है कि दोनों देश सिर्फ सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि इंसानी मदद के कामों में भी साथ हैं।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर भी दोनों देशों ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस इलाके में शांति और सुरक्षा बनाए रखना बहुत जरूरी है। समुद्री रास्ते खुले रहने चाहिए ताकि व्यापार आसानी से हो सके। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने और एक नियम-आधारित व्यवस्था बनाने पर जोर दिया। इसका मतलब है कि सभी देशों को नियमों का पालन करना चाहिए ताकि कोई भी देश मनमानी न कर सके।
आतंकवाद एक बड़ी समस्या है और इस पर भी दोनों देशों ने मिलकर लड़ने का फैसला किया है। वे आतंकवाद से लड़ने के लिए अपनी जानकारी और अनुभव साझा करेंगे। क्षेत्रीय मंचों पर भी वे एक-दूसरे का साथ देंगे। यह दिखाता है कि दोनों देश आतंकवाद को एक गंभीर खतरा मानते हैं और इससे निपटने के लिए एकजुट हैं।
यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि रक्षा सहयोग भारत और मलेशिया के बीच दोस्ती का एक मजबूत स्तंभ बन गया है। दोनों देशों ने साफ कहा है कि वे एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं और उनके हित एक जैसे हैं। वे मिलकर एक ऐसा हिंद-प्रशांत क्षेत्र बनाना चाहते हैं जो सुरक्षित और समृद्ध हो।
मलेशियाई सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने भारत आकर हमारे वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यह भारत के प्रति उनके सम्मान को दिखाता है। उन्होंने भारत के रक्षा सचिव से भी मुलाकात की और हमारे रक्षा उद्योग से जुड़ी जगहों का दौरा किया। इससे उन्हें भारत की सैन्य क्षमता को समझने में मदद मिली होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के बाद भारत और मलेशिया के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद से लड़ने और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग में तेजी आएगी। यह न केवल दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करेगा, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को भी बढ़ावा देगा। यह एक अच्छी खबर है क्योंकि जब दो देश मिलकर काम करते हैं, तो वे दुनिया को एक बेहतर जगह बना सकते हैं।