सिक्किम में 19 वर्षीय युवक की आईएस से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधि में गिरफ्तारी, पुलिस ने कहा कोई आतंकी मॉड्यूल नहीं

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गंगटोक, 1 जुलाई। सिक्किम पुलिस ने एक 19 वर्षीय युवक को कथित तौर पर इस्लामिक स्टेट (आईएस) से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में किसी भी संगठित आतंकी मॉड्यूल, स्थानीय उग्रवादी नेटवर्क या सांप्रदायिक साजिश का कोई सबूत नहीं मिला है। यह मामला फिलहाल एक व्यक्ति के खुद से कट्टरपंथी बनने (सेल्फ-रेडिकलाइजेशन) से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, नाम नांग निवासी 19 वर्षीय मोहम्मद अर्जू को दिल्ली पुलिस के सहयोग से एक संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई राज्य स्पेशल ब्रांच और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर की गई। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

डीएसपी मिंग्यूर टेंपो नादिक के नेतृत्व में चल रही जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए किसी भी सीधे संपर्क के बिना ऑनलाइन कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ। जांच के दौरान लोअर एमजी मार्ग, नाम नांग रोड स्थित एक घर पर छापेमारी की गई। इस दौरान परिवार के छह सदस्यों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया और उनके लैपटॉप, आईपैड और पेन ड्राइव जब्त किए गए। आरोपी के सैमसंग मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में चरमपंथी एप्लीकेशन, “जीआईएम (ग्रुप ऑफ इस्लामिक मेंबर्स)” नामक इंस्टाग्राम ग्रुप से जुड़ी सक्रिय चैट, आतंकी फंडिंग पर बातचीत और India तथा Pakistan के लोगों से संपर्क के रिकॉर्ड मिले। जांचकर्ताओं को चरमपंथी विचारधारा के समर्थन से जुड़े चैटजीपीटी बातचीत के रिकॉर्ड भी मिले। हालांकि, परिवार के अन्य पांच सदस्यों के खिलाफ कोई आपत्तिजनक सबूत नहीं मिलने पर उन्हें जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि मामले का सार्वजनिक खुलासा इसलिए देर से किया गया क्योंकि जांच के दौरान विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर सूचनाओं का सत्यापन जरूरी था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम, 2008 की धारा-6 के तहत आवश्यक रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारियों को भेज दी गई है।
गंगटोक रेंज के डीआईजी और पुलिस के प्रमुख प्रवक्ता तेनजिंग लोडेन लेपचा ने कहा, “सिक्किम पुलिस सभी नागरिकों को आश्वस्त करना चाहती है कि फिलहाल राज्य में सार्वजनिक सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द या कानून-व्यवस्था के लिए किसी आसन्न खतरे की कोई खुफिया सूचना नहीं है। अभी तक राज्य में किसी संगठित आतंकी मॉड्यूल, स्थानीय उग्रवादी नेटवर्क या सांप्रदायिक कोण का कोई प्रमाण नहीं मिला है। जांच फिलहाल एक व्यक्ति की कथित गतिविधियों तक सीमित है।” उन्होंने आगे कहा कि जांच में अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के संकेत मिले हैं, जिनकी केंद्रीय एजेंसियों और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर गहन जांच की जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऑनलाइन कट्टरपंथ आज एक उभरती हुई सुरक्षा चुनौती है और अभिभावकों, शैक्षणिक संस्थानों तथा आम लोगों को डिजिटल माध्यमों पर फैलाए जा रहे चरमपंथी कंटेंट के प्रति सतर्क रहना चाहिए तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को देनी चाहिए।

इस बीच, अपर बर्तुक के विधायक काला राय ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सिक्किम अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से घिरा राज्य है और ऐसी घटनाओं को बहुत गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी Pakistan के दो संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी हुई थी और अतीत में उल्फा का एक शीर्ष नेता कई वर्षों तक राज्य में रहकर स्कूल में पढ़ाता रहा था। राय ने प्रशासन से बाहरी लोगों के सत्यापन अभियान को तेज करने, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और दुकानों का व्यापक सत्यापन कराने तथा मकान मालिकों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि दुकानें कौन चला रहा है, उनकी पृष्ठभूमि क्या है और वे कहां से आए हैं। उन्होंने प्रशासन से इस दिशा में सख्त और सतर्क कार्रवाई करने का आग्रह किया।

पुलिस ने बताया कि 19 वर्षीय मोहम्मद अर्जू को दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी राज्य स्पेशल ब्रांच और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के बाद हुई। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह सब तब हुआ जब जांच में पता चला कि अर्जू सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ था। उसे किसी से सीधे संपर्क करने की जरूरत नहीं पड़ी।

जांच के दौरान, पुलिस ने नाम नांग रोड स्थित एक घर पर छापा मारा। वहां से परिवार के छह सदस्यों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। उनके लैपटॉप, आईपैड और पेन ड्राइव जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। आरोपी के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में कई चौंकाने वाली चीजें सामने आईं। इसमें चरमपंथी एप्लीकेशन, “जीआईएम (ग्रुप ऑफ इस्लामिक मेंबर्स)” नामक इंस्टाग्राम ग्रुप से जुड़ी सक्रिय चैट, आतंकी फंडिंग पर बातचीत और India तथा Pakistan के लोगों से संपर्क के रिकॉर्ड मिले। इतना ही नहीं, जांचकर्ताओं को चैटजीपीटी के साथ हुई बातचीत के रिकॉर्ड भी मिले, जो चरमपंथी विचारधारा के समर्थन से जुड़े थे। हालांकि, परिवार के बाकी पांच सदस्यों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।

पुलिस ने यह भी बताया कि इस मामले का खुलासा करने में देरी हुई क्योंकि जांच के दौरान विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर सूचनाओं की पुष्टि करना जरूरी था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम, 2008 की धारा-6 के तहत आवश्यक रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है।

गंगटोक रेंज के डीआईजी और पुलिस के मुख्य प्रवक्ता तेनजिंग लोडेन लेपचा ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य में फिलहाल सार्वजनिक सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द या कानून-व्यवस्था के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं है। उन्होंने साफ किया कि अभी तक किसी भी संगठित आतंकी मॉड्यूल, स्थानीय उग्रवादी नेटवर्क या सांप्रदायिक साजिश का कोई सबूत नहीं मिला है। जांच केवल एक व्यक्ति की कथित ऑनलाइन गतिविधियों तक सीमित है। उन्होंने स्वीकार किया कि जांच में अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के संकेत मिले हैं, जिनकी केंद्रीय एजेंसियों और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर जांच की जा रही है।

लेपचा ने ऑनलाइन कट्टरपंथ को एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बताया। उन्होंने अभिभावकों, स्कूलों और आम लोगों से अपील की कि वे डिजिटल माध्यमों पर फैलाई जा रही चरमपंथी सामग्री के प्रति सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

इस बीच, अपर बर्तुक के विधायक काला राय ने इस घटना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सिक्किम की सीमाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ी हुई हैं, इसलिए ऐसी घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने अतीत की घटनाओं का भी जिक्र किया, जैसे Pakistan के दो संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी और उल्फा के एक शीर्ष नेता का राज्य में छिपकर रहना। राय ने प्रशासन से बाहरी लोगों की पहचान की प्रक्रिया तेज करने, दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों की गहन जांच कराने और मकान मालिकों को जवाबदेह ठहराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह जानना महत्वपूर्ण है कि राज्य में कौन सी दुकानें चल रही हैं, उनका बैकग्राउंड क्या है और वे कहां से आए हैं। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में सख्त और सतर्क कार्रवाई करने का आग्रह किया।

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