दौसा बस हादसा: 8 की मौत, 4 लापता, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सड़क सुरक्षा पर सवाल

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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दौसा के पास हुई एक भयानक बस दुर्घटना ने कई परिवारों की ज़िंदगी तबाह कर दी है। इस हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 4 यात्री अभी भी लापता हैं। घायलों और मृतकों के परिवारों की दर्दनाक आपबीती इस हादसे की भयावहता को बयां कर रही है।

इंदौर की रहने वाली दिव्या ने इस हादसे में अपने पति दीपक को खो दिया। रोते हुए उन्होंने बताया कि दुर्घटना के समय पूरा परिवार बस में सो रहा था। "अचानक बस में जोर का झटका लगा। मेरी बच्ची का सिर आगे जाकर टकरा गया। मैंने अपने पति को ढूंढना चाहा, लेकिन वे अपनी सीट पर नहीं थे। बस में हर तरफ चीख-पुकार मची हुई थी। किसी तरह दोनों बच्चों को लेकर नीचे उतरी। पति को बहुत तलाशा, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चला।" दिव्या ने बताया कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां भी वह पुलिस और प्रशासन से लगातार अपने पति को ढूंढने की गुहार लगाती रहीं।
हादसे में अपनी पत्नी को खो चुके जितेंद्र की आंखों के सामने आज भी वह भयानक रात का मंजर ताजा है। उन्होंने भावुक होकर कहा, "टक्कर के बाद मेरी पत्नी सीट के पास फंस गई थी। आग इतनी तेजी से फैली कि मैं चाहकर भी उन्हें बाहर नहीं निकाल सका। मेरी आंखों के सामने वह जल गईं... मैं उन्हें बचा नहीं सका।" इतना कहते ही जितेंद्र अपने बेटे के साथ फूट-फूटकर रो पड़े।

यह भयानक हादसा मंगलवार देर रात हुआ। उस समय बस में करीब 40 यात्री सवार थे। अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई घायल अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। प्रशासन के अनुसार, चार यात्रियों की तलाश अभी भी जारी है।

हादसे के बाद कई परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पतालों और दुर्घटनास्थल पर भटक रहे हैं। इस हादसे ने कई बच्चों के सिर से माता-पिता का साया छीन लिया, तो कई परिवारों ने अपने सबसे करीबी सदस्य को हमेशा के लिए खो दिया। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है और लापता यात्रियों की तलाश जारी है।

इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लंबी दूरी की बस यात्राओं में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि यात्रा के दौरान सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है।

बस में सवार यात्रियों के लिए यह यात्रा एक बुरे सपने में बदल गई। जब बस दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दौसा के पास पहुंची, तो अचानक एक जोरदार झटका लगा। यह झटका इतना भयानक था कि बस अनियंत्रित हो गई और एक भीषण दुर्घटना का शिकार हो गई। चीख-पुकार और अफरातफरी का माहौल बन गया।

दिव्या ने बताया कि जब उन्हें होश आया तो उन्होंने देखा कि उनकी बेटी का सिर आगे की सीट से टकरा गया था। उन्होंने तुरंत अपने पति को ढूंढना शुरू किया, लेकिन वह अपनी सीट पर नहीं थे। चारों तरफ लोग चिल्ला रहे थे और मदद के लिए पुकार रहे थे। दिव्या ने किसी तरह अपने दोनों बच्चों को बस से बाहर निकाला। उन्होंने अपने पति को हर जगह ढूंढा, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने पुलिस और प्रशासन से लगातार अपने पति के बारे में पूछताछ की।

जितेंद्र की कहानी और भी दर्दनाक है। उन्होंने बताया कि टक्कर के बाद उनकी पत्नी बस की सीट के पास फंस गई थी। आग इतनी तेजी से फैली कि वह अपनी पत्नी को बचा नहीं सके। उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपनी पत्नी को जलते हुए देखा। यह मंजर उनके दिलो-दिमाग पर गहरा घाव छोड़ गया है। वह अपने बेटे के साथ रोते रहे।

इस हादसे में कुल 40 यात्री सवार थे। अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। कई यात्री घायल हैं और अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है। प्रशासन की टीम लापता यात्रियों की तलाश में जुटी हुई है। परिवारों के लिए यह इंतजार बहुत मुश्किल है। वे अपने प्रियजनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।

यह हादसा हमें याद दिलाता है कि सड़क सुरक्षा कितनी जरूरी है। लंबी दूरी की यात्राओं में बस कंपनियों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करना चाहिए। यात्रियों की जान की कीमत सबसे ज्यादा है। इस तरह की दुर्घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

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