नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से की मुलाकात, जानें क्या हुई चर्चा
नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से की मुलाकात, जानें क्या हुई चर्चा
NewsPoint•
नई दिल्ली, 2 जुलाई। भारतीय थलसेना के नए प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। यह मुलाकात नई दिल्ली स्थित रक्षा मंत्रालय के कर्तव्य भवन-2 में हुई। जनरल धीरज सेठ के सेना प्रमुख बनने के बाद यह उनकी पहली मुलाकात थी। इस दौरान रक्षा मंत्री ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। दोनों के बीच सेना की तैयारियों, सीमाओं की सुरक्षा, सेना को आधुनिक बनाने, स्वदेशी हथियारों को बढ़ावा देने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की रणनीतियों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
जनरल धीरज सेठ ने हाल ही में थलसेना की कमान संभाली है। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने बुधवार को 'विजय' नाम से अपना दृष्टिकोण पेश किया है। उनका लक्ष्य भारतीय सेना को आधुनिक तकनीक से लैस बनाना है। वे चाहते हैं कि सेना भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहे और अलग-अलग मोर्चों पर प्रभावी ढंग से काम कर सके। उन्होंने साफ किया है कि उनकी प्राथमिकताएं सेना में नई तकनीकों का खूब इस्तेमाल करना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्षमताओं को बढ़ाना, देश के रक्षा उद्योग को बढ़ावा देना, आत्मनिर्भरता को मजबूत करना और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को और बेहतर बनाना है। उनका मूल मंत्र 'जय से विजय' है। यह मंत्र बताता है कि तालमेल, आत्मनिर्भरता और नई सोच से सेना की ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है।रक्षा मंत्रालय में यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी सैन्य शक्ति को तेजी से बढ़ा रहा है। दुनिया में बदल रहे सुरक्षा हालात को देखते हुए सेना के आधुनिकीकरण पर खास जोर दिया जा रहा है। ऐसे में रक्षा मंत्री और नए सेना प्रमुख के बीच यह बैठक भारतीय सेना की भविष्य की योजनाओं और प्राथमिकताओं के लिए बहुत अहम मानी जा रही है।
जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के नए प्रमुख हैं। इससे पहले वे सेना के उप प्रमुख थे। उन्होंने 30 जून, 2026 को सेना प्रमुख का पद संभाला है। उन्होंने सेना में रेगिस्तानी इलाकों से लेकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियानों में अहम भूमिकाएं निभाई हैं। इससे पहले सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम 30 जून को सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के 31वें थलसेना प्रमुख बने।
यह पद संभालने पर उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का नेतृत्व करना उनके लिए गर्व और विनम्रता की बात है। उन्होंने 'कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सर्वोपरि' के सिद्धांतों के प्रति अपनी पक्की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने का संकल्प लिया है।
जनरल धीरज सेठ का 'विजय' दृष्टिकोण भारतीय सेना को भविष्य के लिए तैयार करने पर केंद्रित है। इसमें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल, जैसे कि AI, को बढ़ावा देना शामिल है। AI का मतलब है मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने की क्षमता देना। इससे सेना को बेहतर फैसले लेने और तेजी से काम करने में मदद मिलेगी।
स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने का मतलब है कि भारत अपने हथियार और रक्षा उपकरण खुद बनाएगा। इससे देश आत्मनिर्भर बनेगा और विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी। यह देश की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
तीनों सेनाओं, यानी थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्तता को मजबूत करने का मतलब है कि वे मिलकर काम करें। जब तीनों सेनाएं एक साथ मिलकर योजना बनाती हैं और कार्रवाई करती हैं, तो उनकी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। यह भविष्य के युद्धों के लिए बहुत जरूरी है, जहां अलग-अलग मोर्चों पर एक साथ लड़ना पड़ सकता है।
जनरल धीरज सेठ का मार्गदर्शक मंत्र 'जय से विजय' एक प्रेरणादायक संदेश देता है। 'जय' का मतलब जीत है, और 'विजय' का मतलब बड़ी जीत या विजय प्राप्त करना है। यह मंत्र बताता है कि कैसे हम मिलकर, आत्मनिर्भर बनकर और नई चीजें सीखकर बड़ी से बड़ी जीत हासिल कर सकते हैं। यह भारतीय सेना के लिए एक नई दिशा और नई ऊर्जा का संचार करेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जनरल धीरज सेठ को नई जिम्मेदारी संभालने पर शुभकामनाएं दीं। यह दिखाता है कि सरकार सेना के आधुनिकीकरण और सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है। रक्षा मंत्री और नए सेना प्रमुख के बीच हुई यह मुलाकात भारतीय सेना के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आने वाले समय में भारतीय सेना की रणनीतिक दिशा और प्राथमिकताओं को तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
जनरल धीरज सेठ का सेना में लंबा अनुभव है। उन्होंने कई मुश्किल परिस्थितियों में काम किया है। रेगिस्तानी इलाकों में तैनाती का मतलब है कि उन्होंने गर्मी और रेत भरी जगहों पर लड़ने का अनुभव हासिल किया है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी अभियानों में उनकी भूमिका ने उन्हें जमीनी हकीकत से वाकिफ कराया है। यह अनुभव उन्हें सेना प्रमुख के तौर पर बेहतर फैसले लेने में मदद करेगा।
निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल भी महत्वपूर्ण रहा है। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद जनरल धीरज सेठ ने यह बड़ी जिम्मेदारी संभाली है। यह एक पीढ़ी का बदलाव है, जो सेना को नई ऊर्जा और नए विचारों के साथ आगे बढ़ाएगा। जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में भारतीय सेना निश्चित रूप से और मजबूत होगी और देश की सुरक्षा को और पुख्ता करेगी।