होशियारपुर की लीची पहली बार ओमान को निर्यात, किसानों की आय बढ़ाने में अहम कदम
होशियारपुर की लीची पहली बार ओमान को निर्यात, किसानों की आय बढ़ाने में अहम कदम
NewsPoint•
नई दिल्ली, 2 जुलाई। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को एक बड़ी खुशखबरी दी। पंजाब के होशियारपुर की उम्मत एग्री एलाइड कोऑपरेटिव सोसायटी की ताजी लीची पहली बार ओमान भेजी गई है। यह निर्यात भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के तहत मिले नए बाजारों का फायदा उठाकर किया गया है। मंत्री गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस कदम से किसानों की आमदनी बढ़ेगी, कृषि निर्यात को नई रफ्तार मिलेगी और भारतीय कृषि उत्पादों की दुनिया में पहचान और मजबूत होगी। उन्होंने इस सफलता के लिए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) के प्रयासों की भी खूब तारीफ की।
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय लीची को विदेशी बाजार मिला है। पिछले महीने ही, मंत्री गोयल ने उत्तराखंड की मशहूर देहरादून लीची के इटली निर्यात का भी स्वागत किया था। उन्होंने तब कहा था कि इससे यूरोपीय बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों के लिए नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा था, “देवभूमि की लीची अब इटली की पसंद बन गई है। एपीईडीए के सहयोग से उत्तराखंड की प्रसिद्ध देहरादून लीची का पहली बार इटली को निर्यात किया गया है।” गोयल ने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है और किसानों को अपनी उपज से बेहतर कमाई के नए मौके मिल रहे हैं।देहरादून की लीची अपनी खासियतों के लिए जानी जाती है। इसकी प्राकृतिक मिठास, खूबसूरत लाल रंग, मनमोहक खुशबू और बेहतरीन गूदा इसे खास बनाता है। यहां रोज सेंटेड, कलकत्तिया और बेदाना जैसी मशहूर किस्मों की खेती होती है। यह निर्यात न केवल किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह भारत के कृषि निर्यात को भी बढ़ावा देता है।
इससे पहले, असम की तेजपुर लीची का पहला निर्यात दुबई भेजा गया था। यह निर्यात पूर्वोत्तर भारत के फल उत्पादकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के नए अवसर लेकर आया था। सोनितपुर जिले के तेजपुर इलाके में उगने वाली यह लीची अपनी मिठास, खुशबू और रसीले गूदे के लिए पूरे देश में मशहूर है। तेजपुर लीची को साल 2014 में भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग भी मिला था। इस टैग ने इस क्षेत्र की खास जलवायु और लीची की गुणवत्ता को आधिकारिक मान्यता दी थी। यह जीआई टैग किसी खास इलाके के उत्पाद को उसकी गुणवत्ता और पहचान के लिए दिया जाता है।
यह लगातार हो रहे निर्यात भारतीय कृषि की बढ़ती ताकत और गुणवत्ता का प्रमाण हैं। भारत सरकार कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इन प्रयासों से न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान भी मजबूत हो रही है। यह सब भारत-ओमान सीईपीए जैसे समझौतों और एपीईडीए जैसे संस्थानों के सहयोग से संभव हो पा रहा है। यह दिखाता है कि कैसे सही नीतियां और सहयोग भारतीय किसानों और उनके उत्पादों को दुनिया के नक्शे पर ला सकते हैं।