मध्य प्रदेश में अल्प वर्षा की तैयारी: सीएम मोहन यादव ने की समीक्षा, किसानों को वैज्ञानिक खेती की सलाह

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Navbharat Times
भोपाल, 2 जुलाई। मध्य प्रदेश सरकार ने संभावित कम बारिश की आशंका को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक सोच और पूरी तैयारी के साथ करें। उन्होंने कहा कि कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली फसलों, जैसे ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर, कोदो-कुटकी को अपनाने पर जोर दिया जाए। ये फसलें कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देती हैं और किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जल्दबाजी में बुवाई न करें, बल्कि खेतों में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुवाई करें और नमी संरक्षण के उपाय अपनाएं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित अन्य संबंधित विभागों के साथ बैठक की। इस बैठक में उन्होंने संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को एक चुनौती के बजाय बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समय पर की जाने वाली तैयारियों के अवसर के रूप में देखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग आपस में मिलकर काम करें और किसानों को समय पर जरूरी सलाह दें, ताकि प्रदेश में खेती-किसानी और किसानों की आय पर कोई बुरा असर न पड़े।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि प्रदेश का हर किसान मौसम की मुश्किलों का सामना वैज्ञानिक सोच और सही तैयारी से करे। उन्होंने कहा कि समय पर सही फैसले लेने और विभागों के बीच तालमेल बिठाने से हम कम बारिश के असर को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि किसानों को कम पानी और कम समय में पकने वाली फसलों की खेती के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूक किया जाए। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर और कोदो-कुटकी जैसी मोटे अनाज और दलहनी फसलों को अपनाने पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये फसलें कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देती हैं और किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को यह भी समझाया जाए कि वे जल्दबाजी में बुवाई न करें। खेतों में जब पर्याप्त नमी हो तभी बुवाई करें और नमी को बचाने के तरीके अपनाएं। साथ ही, कम समय में ज्यादा उत्पादन देने वाली नई किस्मों और आधुनिक खेती के तरीकों का भरपूर इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि कृषि वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों की सलाह को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से सही फसल चुन सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और भी सक्रिय बनाने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार संभावित कम बारिश की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। सभी संबंधित विभाग अपनी पहले से बनाई गई योजना के अनुसार मिलकर काम करें और किसानों को हर संभव तकनीकी और प्रशासनिक मदद उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि प्रदेश का प्रत्येक किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक सोच और उचित तैयारी के साथ करे। समय पर सही निर्णय और विभागों के प्रभावी समन्वय से हम संभावित अल्प वर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर तथा कोदो-कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने के साथ किसानों के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को जल्दबाजी में बुआई नहीं करने के लिए भी प्रेरित किया जाए। खेतों में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुआई की जाए तथा नमी संरक्षण के उपाय अपनाए जाएं। साथ ही कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि कृषि वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों के सुझावों को प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसल का चयन कर सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य Government संभावित अल्प वर्षा की स्थिति पर सतत निगरानी रखे हुए है। सभी संबंधित विभाग पूर्व नियोजित कार्य योजना के अनुसार समन्वित रूप से कार्य करें और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएं।

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