लोकतंत्र बचाओ संकल्प रैली: कांग्रेस ने संवैधानिक संस्थाओं पर हमलों के खिलाफ जताई चिंता

NewsPoint
Navbharat Times
मुंबई, 2 जुलाई। मुंबई के तिलक भवन में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 'लोकतंत्र बचाओ संकल्प रैली' का आयोजन किया। इस रैली में राज्य के कई बड़े नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। सबने मिलकर लोकतंत्र, संवैधानिक संस्थाओं और नागरिकों के अधिकारों पर हो रहे कथित हमलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस खतरे से निपटने के लिए एक बड़े जन-आंदोलन की जरूरत है। कार्यक्रम के बाद नेताओं ने मीडिया से बात की और कई राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखी।

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि पूरे देश में लोकतंत्र पर जो हमले हो रहे हैं, उसका विरोध हो रहा है। इसी विरोध की कड़ी में महाराष्ट्र में यह कार्यक्रम रखा गया था। उन्होंने चिंता जताई कि जिस तरह से लोकतंत्र पर हमला हुआ है, संस्थाएं भी समझौता कर चुकी हैं और सत्ता पक्ष के साथ मिलकर काम कर रही हैं। इसी के खिलाफ आज कई संगठनों ने मिलकर यह कार्यक्रम आयोजित किया था। तेलंगाना के सीएम के बयान पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई वैचारिक है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री संवैधानिक मूल्यों पर चलने वाली विचारधारा के साथ काम करते हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती विचार व्यवस्था है और वे उसी के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वोट चोरी के बाद अब पार्टियां भी चोरी हो रही हैं, जो लोकतंत्र के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है।
मुंबई में मैनहोल में गिरे शख्स की मौत पर कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने पूरी बीएमसी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक पेड़ गिरने से एक बच्चे की मौत हुई और अब एक व्यक्ति की मैनहोल में गिरने से मौत हो गई। इन मौतों के लिए बीएमसी जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इन संस्थाओं को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है।

कार्यक्रम में शामिल हुए तुषार गांधी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज किया जाना एक साजिश है। उन्होंने कहा कि ऐसी साजिशें और लोकतंत्र के खतरे को देखते हुए ही इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें तमाम लोग शामिल हुए। तुषार गांधी ने कहा कि पहले वोटों की चोरी हुई, फिर वोट देने के अधिकार की चोरी हुई और अब जनप्रतिनिधियों की चोरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि वे इसके विरोध में आंदोलन करेंगे। जनता के बीच जाकर इन सभी मुद्दों पर अपना गुस्सा जाहिर करने का समय आ गया है। यह लड़ाई स्वतंत्रता संग्राम से कम नहीं है। वैचारिक गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने के लिए अब संग्राम करना पड़ेगा। राम मंदिर मामले पर उन्होंने कहा कि समाज अमर्यादित हो गया है। चोर चोरी करते ही हैं, क्योंकि यह उनकी फितरत है। लेकिन चोरी पर शांत रहना चिंताजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चोर को ही चौकीदारी की जिम्मेदारी दी जाएगी तो चोर कैसे पकड़ा जाएगा। टीएमसी में हो रही टूट पर उन्होंने कहा कि यह सत्ता के लालच का उदाहरण है। जनप्रतिनिधियों में अब वैचारिकता बची ही नहीं है। वे बस किसी तरह सत्ता के करीब बने रहना चाहते हैं। बंगाल और महाराष्ट्र में इसका उदाहरण दिख रहा है। जो भी पार्टी उन्हें कड़ी टक्कर देने वाली लगती है, उसे ही तोड़ देते हैं।

चरण सापरा ने कहा कि मुंबई में पिछले कुछ दिनों से हम देख रहे हैं कि कहीं पेड़ गिर रहा है तो कहीं लोग मैनहोल में गिर रहे हैं, जिससे लोगों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस सरकार और बीएमसी को ही खड्डे में फेंक देना चाहिए। ये लोग सिर्फ भ्रष्टाचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह भाजपा नफरत और विभाजन की राजनीति करती है, राम मंदिर में डकैती होती है। ऐसे लोग अगर राज करेंगे तो जनता को इस बारे में एक बार जरूर सोचना चाहिए।

यह रैली लोकतंत्र के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों पर प्रकाश डालने के लिए आयोजित की गई थी। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि संस्थाओं की स्वायत्तता और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब संवैधानिक संस्थाएं ही सत्ता के दबाव में काम करने लगें और जनप्रतिनिधियों को ही निशाना बनाया जाए, तो यह लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा होता है।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कैसे राजनीतिक दल सत्ता हासिल करने के लिए अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वोट चोरी और जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त जैसी घटनाओं को लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने वाला बताया गया। नेताओं ने जनता से आह्वान किया कि वे इन मुद्दों पर जागरूक हों और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।

मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि "जिस तरह से पूरे देश में लोकतंत्र पर प्रहार हुआ है, उसका पूरे देश में विरोध हो रहा है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिस तरह लोकतंत्र पर हमला हुआ, संस्थाओं ने समझौता कर लिया है और सत्ता पक्ष के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसी के खिलाफ आज कई संगठनों द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।" उन्होंने यह भी कहा कि "हमारी लड़ाई वैचारिक है और Chief Minister संवैधानिक मूल्यों पर चलने वाली विचारधारा के साथ काम करते हैं। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती विचार व्यवस्था है। हम उसी के खिलाफ लड़ रहे हैं। वोट चोरी के बाद पार्टियां भी चोरी हो रही हैं, यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।"

हर्षवर्धन सपकाल ने मुंबई की घटनाओं पर कहा कि "इसके लिए पूरी बीएमसी जिम्मेदार है। पिछले दिनों एक पेड़ गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई और अब एक शख्स की मौत हो गई है। इसके लिए बीएमसी जिम्मेदार है। Government ने इन संस्थाओं को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है।"

तुषार गांधी ने मीनाक्षी नटराजन के पर्चे खारिज होने की घटना को साजिश बताते हुए कहा कि "मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज किया जाना एक साजिश है। ऐसी साजिश और लोकतंत्र के खतरे को देखते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें तमाम लोग शामिल हुए थे।" उन्होंने आगे कहा कि "पहले वोटों की चोरी, फिर वोट देने के अधिकार की चोरी और अब जनप्रतिनिधियों की चोरी की जा रही है। हम इसके विरोध में आंदोलन करने वाले हैं। जनता के बीच जाकर इन तमाम मुद्दों को लेकर आक्रोश व्यक्त करने का वक्त आ गया है। यह लड़ाई स्वतंत्रता संग्राम से कम नहीं है। वैचारिक गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने के लिए अब संग्राम करना पड़ेगा।" राम मंदिर मामले पर उन्होंने कहा कि "समाज अमर्यादित हो गया है, क्योंकि चोरी करने वाले चोरी करते ही हैं, क्योंकि यह उनकी फितरत है, लेकिन चोरी पर शांत रहना चिंताजनक है। चोर को ही चौकीदारी की जिम्मेदारी दी जाएगी तो चोर कैसे पकड़ा जाएगा।" टीएमसी की टूट पर उन्होंने कहा कि "यह सत्ता के प्रलोभन का उदाहरण है। जनप्रतिनिधियों में वैचारिकता बची ही नहीं है, वह बस किसी तरह सत्ता के करीब बने रहना चाहते हैं। बंगाल, Maharashtra में इसका उदाहरण दिखाई दे रहा है। जो भी पार्टी उन्हें कड़ी टक्कर देने वाली लगती है, उसे ही तोड़ देते हैं।"

चरण सापरा ने कहा कि "Mumbai में हम पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं कि कहीं पेड़ गिर रहा है तो कहीं लोग मैनहोल में गिर रहे हैं, जिनसे लोगों की मौत हुई है। इस Government और बीएमसी को ही खड्डे में फेंक देना चाहिए। ये लोग सिर्फ भ्रष्टाचार कर रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा कि "जिस तरह भाजपा नफरत और विभाजन की राजनीति करती है, राम मंदिर में डकैती होती है। ऐसे लोग अगर राज करेंगे तो जनता को इस बारे में एक बार जरूर सोचना चाहिए।"

यह रैली इस बात का संकेत थी कि जनता अब इन मुद्दों पर चुप नहीं बैठेगी और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाएगी। नेताओं ने जनता से अपील की कि वे आगामी चुनावों में सोच-समझकर वोट दें और ऐसे लोगों को चुनें जो वास्तव में देश और जनता के हित में काम करें।

रेकमेंडेड खबरें