दतिया विधानसभा उपचुनाव 30 जुलाई को, कांग्रेस ने भाजपा-चुनाव आयोग पर रची साजिश का आरोप लगाया

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दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को उपचुनाव होगा, जिसकी घोषणा चुनाव आयोग ने गुरुवार को की। कांग्रेस ने अपने विधायक राजेंद्र भारती की अयोग्यता को भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से रची गई साजिश बताया है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि दतिया की जनता ने 2023 में भारती को भारी बहुमत से चुना था और अब भाजपा इस सीट पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है, लेकिन जनता फिर कांग्रेस पर भरोसा जताएगी। यह उपचुनाव एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट' के तहत भारती को अयोग्य घोषित किए जाने के कारण जरूरी हो गया है। यह सीट ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की राजनीतिक रूप से अहम सीटों में से एक है, जहां 2023 में भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराकर भाजपा के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को खत्म कर दिया था।

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन 6 से 13 जुलाई तक स्वीकार किए जाएंगे। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, और 16 जुलाई तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 30 जुलाई को होगा, जबकि वोटों की गिनती 3 अगस्त को की जाएगी। कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं से उपचुनाव की तैयारी शुरू करने की अपील की है।
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इस पूरे मामले को एक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा, “दतिया की जनता ने 2023 में राजेंद्र भारती को भारी बहुमत से चुना था। एक साजिश के तहत उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई। भाजपा उपचुनाव के जरिए इस सीट पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है, लेकिन जनता एक बार फिर कांग्रेस पर भरोसा जताएगी।” सिंघार का मानना है कि भाजपा इस सीट को वापस पाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

दतिया विधानसभा सीट, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सीट है। 2023 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने मध्य प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों के अंतर से हराया था। इस जीत ने इस सीट पर भाजपा के दिग्गज नेता के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को तोड़ दिया था। अब भाजपा इस सीट को वापस जीतने के लिए पूरी ताकत झोंकने की उम्मीद है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर भाजपा के उम्मीदवार हो सकते हैं।

वहीं, कांग्रेस इस सीट को अपने पास बनाए रखने और 2023 की चुनावी जीत को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में होने वाले इस उपचुनाव को दोनों प्रमुख पार्टियों के लिए एक कड़ा राजनीतिक मुकाबला माना जा रहा है। यह उपचुनाव यह भी तय करेगा कि इस क्षेत्र में जनता का झुकाव किस पार्टी की ओर है। कांग्रेस इस सीट को जीतकर अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है, जबकि भाजपा इसे वापस जीतकर अपना दबदबा फिर से कायम करना चाहती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इस बार किसे अपना समर्थन देती है।

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