Bengaluru पत्थर खदान हादसा: सात मजदूरों की मौत, जेसीबी मशीन की लापरवाही आई सामने

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बेंगलुरु के पास एक पत्थर की खदान में हुए दर्दनाक हादसे में सात मजदूरों की जान चली गई। यह हादसा तब हुआ जब ऊपर वाली खदान में चल रही जेसीबी मशीन ने एक विशाल पत्थर को धक्का दिया, जो लुढ़ककर नीचे काम कर रहे मजदूरों पर गिर गया। यह घटना बेंगलुरु दक्षिण तालुक के तवरेकेरे पुलिस थाना क्षेत्र के मडापटना गांव में कावेरी क्रशर यूनिट में गुरुवार सुबह हुई। मृतकों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर कर्नाटक के प्रवासी मजदूर शामिल हैं।

यह भयानक हादसा बेंगलुरु दक्षिण के मडापटना गांव में कावेरी क्रशर यूनिट में हुआ। गुरुवार की सुबह, जब मजदूर अपनी रोजमर्रा की मजदूरी कर रहे थे, तभी ऊपर वाली खदान में एक जेसीबी मशीन पत्थरों को हटा रही थी। इसी दौरान, एक बहुत बड़ा पत्थर (बोल्डर) नीचे खदान में काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा। इस हादसे में सात मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, यह पत्थर इतना बड़ा था कि इसके नीचे दबकर मजदूरों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया था।
मृतकों की पहचान रामू, राजपाल सिंह, सत्यानारायण सिंह, राम अवतार सिंह, राजेंद्र प्रसाद, नुहार और भुवनेश्वर सिंह के रूप में हुई है। इन सभी की उम्र 30 से 40 साल के बीच बताई जा रही है। पुलिस ने बताया कि मरने वालों में एक मजदूर कर्नाटक के यादगिर जिले का रहने वाला था, जबकि बाकी सभी मध्य प्रदेश के थे। घायलों में एक मजदूर छत्तीसगढ़ का है।

सेंट्रल जोन के आईजीपी एस. गिरीश ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद बताया कि यहां दो खदानें हैं, जो अलग-अलग मालिकों की हैं। ऊपर वाली खदान एक मालिक की है और नीचे वाली खदान दूसरे मालिक की। गुरुवार सुबह दोनों खदानों में काम चल रहा था। ऊपर वाली खदान में एक जेसीबी मशीन पत्थरों को हटा रही थी, तभी एक बड़ा पत्थर लुढ़क गया और नीचे काम कर रहे मजदूरों पर गिर गया।

आईजीपी गिरीश ने आगे बताया कि नीचे वाली खदान में कुल 16 मजदूर काम कर रहे थे। इनमें से सात की मौके पर ही मौत हो गई। पांच मजदूरों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से एक की हालत नाजुक बनी हुई है। वहीं, चार अन्य मजदूर किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहे।

हादसे में बाल-बाल बचे तमिलनाडु के गोपी ने इस घटना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ऊपर वाली खदान में काम कर रहे लोगों ने नीचे काम कर रहे मजदूरों को कोई चेतावनी नहीं दी। गोपी ने कहा, “ऊपर काम करने वालों को नीचे काम कर रहे मजदूरों को पहले से बता देना चाहिए था, लेकिन किसी ने हमें नहीं बताया। मैं पिछले आठ साल से यहां काम कर रहा हूं। ऊपर वाले हमेशा हमें पहले सूचना देते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। हम चार लोग किसी तरह भागकर बच गए। अगर पहले से बताया गया होता तो हमें खतरे का पता चल जाता। एक पत्थर मुझे भी लगा, लेकिन फिर भी मैं वहां से भागने में सफल रहा। उस समय वहां 15 से 30 लोग काम कर रहे थे।”

गोपी ने बताया कि पत्थर इतनी तेजी से गिरा कि कई मजदूर उसके नीचे बुरी तरह दब गए। उन्होंने यह भी बताया कि हादसे में एक ट्रैक्टर, एक टिपर और अन्य भारी मशीनें भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं।

इस दुखद घटना पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने विधान सौधा में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मगदी रोड पर स्थित दो पास-पास की खदानों में यह दुखद हादसा हुआ है। मुझे जानकारी मिली है कि सात लोगों की मौत हुई है। सभी शव निकाल लिए गए हैं और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं। यह साफ हो गया है कि वहां कोई ब्लास्टिंग नहीं हुई थी। मुझे आज दोपहर तक पूरी रिपोर्ट मिल जाएगी। अभी यह जांच की जा रही है कि दोनों खदानें कानूनी रूप से चल रही थीं या अवैध रूप से। सभी नियमों का पालन होना चाहिए। मुझे यशवंतपुर के विधायक एस.टी. सोमशेखर से भी जानकारी मिली है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। पूरी जानकारी मिलने के बाद मुआवजे का भी ऐलान किया जाएगा। सबसे जरूरी बात यह है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए।”

मृतकों में से एक मजदूर के बेटे ने इस हादसे को याद करते हुए बताया कि उसे फोन पर घटना की जानकारी मिली। उसने कहा, “मैं रात की शिफ्ट में काम करके घर जाने वाला था, तभी मुझे फोन आया। मेरे पिता सुबह करीब 6.20 बजे काम पर आए थे। वे पत्थर लोड कर रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। मेरे पिता का शव वहीं पड़ा था और मैं ही उसे वहां से लेकर आया। मेरे पिता पिछले छह महीने से यहां काम कर रहे थे।”

पुलिस ने बताया कि शवों की हालत इतनी खराब थी कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो गया था। इस हादसे में न केवल मजदूरों की जान गई, बल्कि ट्रैक्टर और टिपर जैसी भारी मशीनें भी पूरी तरह से नष्ट हो गईं। यह घटना खदानों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और लापरवाही को उजागर करती है। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या खदानें वैध रूप से चल रही थीं और क्या सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही गई है।

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