टेरी मैकऑलिफ का भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बयान: श्रमिकों और ट्रेड को मिले लाभ

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Navbharat Times
वर्जीनिया के पूर्व गवर्नर टेरी मैकऑलिफ ने भारत-अमेरिका के बीच एक मजबूत व्यापार समझौते का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने आईएएनएस को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा कि किसी भी समझौते से दोनों देशों के श्रमिकों और व्यापार को बराबर फायदा मिलना चाहिए। मैकऑलिफ का मानना है कि ऐसा समझौता नहीं होना चाहिए जिसमें सिर्फ एक पक्ष को फायदा हो, क्योंकि इससे अंततः नुकसान ही होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतिम व्यापार समझौते से दोनों देशों को संतुष्टि मिलनी चाहिए और यह दोनों के हित में काम करना चाहिए, जिससे दोनों देशों की प्रगति हो और सभी को लाभ मिले।

मैकऑलिफ, जो 2014 से 2018 तक वर्जीनिया के गवर्नर रह चुके हैं, खुद को वैश्विक व्यापार का एक बड़ा समर्थक बताते हैं। उनका कहना है कि व्यापार समझौतों में श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ नए आर्थिक अवसर भी पैदा होने चाहिए। उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया एक बड़ा आर्थिक और व्यापारिक अवसर है। जो देश इसमें सक्रिय रूप से भाग नहीं लेंगे, वे पीछे रह जाएंगे और उनके नागरिकों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।"
गवर्नर के तौर पर अपने चार साल के कार्यकाल में मैकऑलिफ ने 35 विदेशी व्यापार मिशनों का नेतृत्व किया था। इस दौरान उन्होंने 1,100 कंपनियों को वर्जीनिया में निवेश के लिए आकर्षित किया। उनके मुताबिक, इन निवेशों से उत्तरी वर्जीनिया के साथ-साथ राज्य के दक्षिण-पश्चिमी ग्रामीण इलाकों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा हुए।

पूर्व गवर्नर ने उद्यमिता, प्रौद्योगिकी और परोपकार के क्षेत्र में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान की भी खूब सराहना की। उन्होंने कहा, "रोजगार सृजन और उद्यमिता क्षेत्र में उनका योगदान असाधारण रहा है। लेकिन बात केवल उद्यमिता और रोजगार तक सीमित नहीं है, भारतीय-अमेरिकी समुदाय समाज को भी बहुत कुछ लौटाता है।" मैकऑलिफ ने आगे कहा कि इस समुदाय ने अमेरिका को मजबूत बनाया है और देश को प्रौद्योगिकी तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा, "अमेरिका में हम सभी उन प्रवासियों के ऋणी हैं, विशेष रूप से भारतीय-अमेरिकियों के, जिन्होंने यहां व्यवसाय स्थापित किए और समाज सेवा व परोपकार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।"

मैकऑलिफ ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन संबंधी बयानबाजी की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका को हमेशा नए प्रवासियों, खासकर भारतीय-अमेरिकियों से लाभ हुआ है। उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से वर्तमान प्रशासन के दौरान प्रवासियों के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।" मैकऑलिफ का मानना है कि अमेरिका आज एक "बेहतर देश" है क्योंकि यहां प्रवासी आए हैं, "विशेष रूप से भारतीय-अमेरिकी समुदाय, जिसने इस महान देश में आकर इसे और मजबूत बनाया है।"

पूर्व गवर्नर ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की सीमाएं सुरक्षित रहनी चाहिए और प्रवासियों का कानूनी रूप से प्रवेश होना चाहिए। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। उन्होंने कहा, "हम एक 'मेल्टिंग पॉट' हैं और यही विविधता हमें और अधिक मजबूत बनाती है।"

मैकऑलिफ के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच एक ऐसा व्यापार समझौता होना चाहिए जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो। यह समझौता सिर्फ एक पक्ष को लाभ पहुंचाने वाला नहीं होना चाहिए, बल्कि दोनों देशों के श्रमिकों और व्यापार को समान रूप से लाभ पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कोई समझौता दोनों पक्षों को संतुष्ट करता है और दोनों के हित में काम करता है, तभी दोनों देशों की प्रगति होती है और सभी को लाभ मिलता है।

उन्होंने वैश्विक व्यापार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जो देश व्यापार में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेते, वे पीछे रह जाते हैं और उनके नागरिकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। इसलिए, व्यापार समझौतों में श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ नए आर्थिक अवसर पैदा करना भी बहुत जरूरी है।

वर्जीनिया के गवर्नर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, मैकऑलिफ ने विदेशी व्यापार मिशनों का नेतृत्व करके और कंपनियों को राज्य में निवेश के लिए आकर्षित करके आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान की सराहना की, जिन्होंने उद्यमिता, प्रौद्योगिकी और समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, इस समुदाय ने अमेरिका को मजबूत बनाने में मदद की है और देश को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनने में योगदान दिया है।

मैकऑलिफ ने आव्रजन के प्रति वर्तमान प्रशासन के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि प्रवासियों ने हमेशा अमेरिका को मजबूत बनाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका की विविधता उसकी ताकत है और यह देश को एक "मेल्टिंग पॉट" बनाती है, जो इसे और भी मजबूत बनाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश की सीमाएं सुरक्षित रहनी चाहिए और प्रवासियों का प्रवेश कानूनी होना चाहिए, लेकिन साथ ही उन्होंने प्रवासियों के सकारात्मक योगदान को भी स्वीकार किया।

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