वर्जीनिया के पूर्व गवर्नर टेरी मैकऑलिफ ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का समर्थन किया, श्रमिकों के लाभ पर जोर

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Navbharat Times
वर्जीनिया के पूर्व गवर्नर टेरी मैकऑलिफ ने भारत-अमेरिका के बीच एक मजबूत व्यापार समझौते की वकालत की है, जिसमें दोनों देशों के श्रमिकों और व्यापार को समान लाभ मिले। आईएएनएस को दिए एक खास इंटरव्यू में मैकऑलिफ ने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी व्यापार समझौता ऐसा नहीं होना चाहिए जिसमें केवल एक पक्ष को फायदा हो, क्योंकि इससे अंततः नुकसान ही होता है। उन्होंने कहा कि समझौते से दोनों देशों को संतुष्टि मिलनी चाहिए और यह दोनों के हित में काम करना चाहिए, जिससे प्रगति हो और सभी को लाभ मिले। मैकऑलिफ, जो खुद को वैश्विक व्यापार का प्रबल समर्थक बताते हैं, का मानना है कि व्यापार समझौतों में श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ आर्थिक अवसरों का सृजन भी होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश वैश्विक व्यापार में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेंगे, वे पीछे रह जाएंगे। मैकऑलिफ ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के उद्यमिता, प्रौद्योगिकी और परोपकार के क्षेत्र में योगदान की भी खूब सराहना की और कहा कि इस समुदाय ने अमेरिका को मजबूत बनाया है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन संबंधी बयानबाजी की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को हमेशा नए प्रवासियों, खासकर भारतीय-अमेरिकियों से लाभ हुआ है।

वर्जीनिया के पूर्व गवर्नर टेरी मैकऑलिफ ने भारत और अमेरिका के बीच एक ऐसे व्यापार समझौते का समर्थन किया है जिससे दोनों देशों के श्रमिकों और व्यापार को बराबर का फायदा हो। आईएएनएस को दिए एक खास इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते ऐसे होने चाहिए जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हों। उन्होंने साफ कहा कि ऐसा समझौता नहीं किया जाना चाहिए जिसमें सिर्फ एक पक्ष को जीत मिले, क्योंकि ऐसे में अंत में नुकसान ही होता है। मैकऑलिफ, जो 2014 से 2018 तक वर्जीनिया के गवर्नर रहे, का मानना है कि अंतिम व्यापार समझौते से दोनों देशों को खुशी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, जब दोनों पक्ष संतुष्ट होते हैं और समझौता उनके हित में काम करता है, तभी दोनों देशों की तरक्की होती है और सबको फायदा पहुंचता है।
मैकऑलिफ ने खुद को वैश्विक व्यापार का एक बड़ा समर्थक बताया। उनका मानना है कि व्यापार समझौतों में सिर्फ आर्थिक फायदे ही नहीं, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया एक बड़ा आर्थिक और व्यापारिक मंच है। जो देश इस मंच पर सक्रिय रूप से हिस्सा नहीं लेंगे, वे पीछे छूट जाएंगे और उनके नागरिकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

गवर्नर के तौर पर अपने चार साल के कार्यकाल में मैकऑलिफ ने 35 विदेशी व्यापार मिशनों का नेतृत्व किया था। इस दौरान उन्होंने 1,100 कंपनियों को वर्जीनिया में निवेश करने के लिए आकर्षित किया। उनके मुताबिक, इन निवेशों से उत्तरी वर्जीनिया के साथ-साथ राज्य के दक्षिण-पश्चिमी ग्रामीण इलाकों में भी लोगों को रोजगार मिला।

पूर्व गवर्नर ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कामों की भी खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह समुदाय उद्यमिता, तकनीक और समाज सेवा के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम कर रहा है। मैकऑलिफ ने कहा कि सिर्फ व्यापार और रोजगार ही नहीं, बल्कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय समाज को भी बहुत कुछ देता है। उन्होंने कहा कि इस समुदाय ने अमेरिका को मजबूत बनाया है। खासकर तकनीक और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के क्षेत्र में अमेरिका को दुनिया में आगे बढ़ाने में इनका बड़ा योगदान रहा है।

मैकऑलिफ ने कहा कि अमेरिका में हम सब उन प्रवासियों के शुक्रगुजार हैं, खासकर भारतीय-अमेरिकियों के। उन्होंने यहां आकर व्यवसाय शुरू किए और समाज सेवा व परोपकार के कामों में भी बहुत योगदान दिया। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन (immigration) को लेकर की गई बातों की भी आलोचना की। मैकऑलिफ ने कहा कि अमेरिका को हमेशा नए प्रवासियों से फायदा हुआ है, खासकर भारतीय-अमेरिकियों से।

उन्होंने कहा कि यह बहुत दुख की बात है कि वर्तमान प्रशासन के दौरान प्रवासियों के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। मैकऑलिफ ने कहा कि अमेरिका आज एक बेहतर देश है क्योंकि यहां प्रवासी आए हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय-अमेरिकी समुदाय का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इस महान देश में आकर इसे और मजबूत बनाया है।

मैकऑलिफ ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की सीमाएं सुरक्षित रहनी चाहिए और प्रवासियों को कानूनी तरीके से ही देश में आना चाहिए। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की विविधता (diversity) उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा, "हम एक 'मेल्टिंग पॉट' (melting pot) हैं और यही विविधता हमें और मजबूत बनाती है।"

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