ई20 पेट्रोल से कार खराब होने पर उपभोक्ता को राहत, कोर्ट ने कंपनी को कार बदलने या भुगतान का आदेश दिया
ई20 पेट्रोल से कार खराब होने पर उपभोक्ता को राहत, कोर्ट ने कंपनी को कार बदलने या भुगतान का आदेश दिया
NewsPoint•
रायपुर, 16 जुलाई (आईएएनएस)। ई20 पेट्रोल से कार खराब होने के एक अनोखे मामले में रायपुर की जिला उपभोक्ता अदालत ने कार मालिक को बड़ी राहत दी है। अदालत ने फैसला सुनाया है कि अगर कंपनी कार बदलकर नई ई20 ईंधन समर्थित कार नहीं देती है, तो उसे कार की पूरी कीमत और अन्य खर्चों के साथ-साथ मानसिक क्षति और मुकदमे के खर्च का भी भुगतान करना होगा। यह देश का पहला ऐसा फैसला है जहां ई20 पेट्रोल से वाहन में खराबी को लेकर उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय आया है।
उपभोक्ता प्रेमराज देवता ने अपनी मारुति ग्रैंड विटारा कार में ई20 पेट्रोल डलवाने के बाद लगातार आ रही समस्याओं की शिकायत की थी। उनकी शिकायत के अनुसार, कार का इंजन खराब होने लगा, परफॉर्मेंस गिर गई, मिसफायरिंग होने लगी और माइलेज भी बहुत कम हो गया। उन्होंने बताया कि कई बार सर्विस सेंटर में कार की जांच और मरम्मत करवाने के बाद भी समस्या हल नहीं हुई।रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले में 14 जुलाई को अपना आदेश जारी किया। आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया। आयोग ने यह भी माना कि ई20 पेट्रोल के संबंध में उपभोक्ता के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था, क्योंकि ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर यही ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा था।
आयोग ने कंपनी और संबंधित पक्षों को आदेश दिया है कि वे उपभोक्ता की कार वापस लें और उसी मॉडल की एक नई ई20 ईंधन समर्थित कार आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं। अगर तय समय सीमा में कार नहीं बदली जाती है, तो कंपनी को कार की कीमत और उससे जुड़े अन्य खर्चों के तौर पर कुल 20,50,494 रुपये का भुगतान करना होगा।
इसके अलावा, आयोग ने कंपनी को उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए एक लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया है। यह भी कहा गया है कि अगर यह राशि 45 दिनों के भीतर नहीं दी जाती है, तो भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
यह मामला उपभोक्ता के लिए एक बड़ी जीत है, क्योंकि यह पहली बार है जब ई20 पेट्रोल के कारण वाहन में आई खराबी के लिए अदालत ने उपभोक्ता को राहत पहुंचाई है। इस फैसले से यह उम्मीद जगी है कि भविष्य में ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं को न्याय मिल सकेगा। परिवाद की ऑनलाइन शिकायत 12 मार्च 2025 को की गई थी और इसका पंजीयन 16 अप्रैल 2025 को हुआ था।