ई20 पेट्रोल से कार खराब होने पर उपभोक्ता को राहत, रायपुर कोर्ट का बड़ा फैसला
ई20 पेट्रोल से कार खराब होने पर उपभोक्ता को राहत, रायपुर कोर्ट का बड़ा फैसला
NewsPoint•
रायपुर, 16 जुलाई। ई20 पेट्रोल से कार खराब होने के एक अनोखे मामले में रायपुर की जिला उपभोक्ता अदालत ने कार मालिक को बड़ी राहत दी है। अदालत ने फैसला सुनाया है कि अगर कंपनी कार बदलकर नई ई20 समर्थित कार नहीं देती है, तो उसे कार की पूरी कीमत और अन्य खर्चों का भुगतान करना होगा। साथ ही, कार मालिक को मानसिक क्षति और मुकदमे के खर्च के लिए भी मुआवजा मिलेगा। यह देश का पहला ऐसा फैसला है जो ई20 पेट्रोल से वाहन में खराबी को लेकर आया है।
यह मामला तब सामने आया जब उपभोक्ता प्रेमराज देवता ने आरोप लगाया कि उनकी मारुति ग्रैंड विटारा कार में ई20 पेट्रोल डलवाने के बाद बार-बार दिक्कतें आने लगीं। उन्होंने बताया कि कार का इंजन खराब होने लगा, परफॉर्मेंस गिर गई, मिसफायरिंग होने लगी और माइलेज भी लगातार कम होने लगा। प्रेमराज देवता ने यह भी कहा कि कई बार सर्विस सेंटर में जांच और मरम्मत कराने के बाद भी समस्या दूर नहीं हुई।रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में इस मामले की शिकायत ऑनलाइन 12 मार्च 2025 को की गई थी, और इसका पंजीयन 16 अप्रैल 2025 को हुआ। आयोग ने 14 जुलाई को अपना फैसला सुनाया। आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार किया।
आयोग ने इस बात को भी माना कि ई20 पेट्रोल के मामले में उपभोक्ता के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। ऐसा इसलिए, क्योंकि ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर यही ई20 पेट्रोल ही उपलब्ध कराया जा रहा था। ऐसे में, उपभोक्ता के पास यही ईंधन इस्तेमाल करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था।
आयोग ने संबंधित कंपनियों और पक्षों को आदेश दिया है कि वे उपभोक्ता की कार वापस लें। इसके बदले, उन्हें उसी मॉडल की एक नई ई20 ईंधन समर्थित कार आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर देनी होगी। अगर तय समय में कार नहीं बदली जाती है, तो कंपनियों को कार की कीमत और उससे जुड़े अन्य खर्चों का भुगतान करना होगा। यह कुल राशि 20,50,494 रुपये है।
इतना ही नहीं, आयोग ने यह भी आदेश दिया है कि संबंधित पक्षकारों को उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए भी मुआवजा देना होगा। उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए एक लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर यह राशि 45 दिनों के भीतर नहीं दी जाती है, तो भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह फैसला ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से होने वाली संभावित समस्याओं को लेकर उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत है और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक नज़ीर पेश करेगा।