Rajasthan हाईकोर्ट का अनोखा फैसला: जेल में उम्रकैद काट रहे दो कैदियों को शादी की मिली इजाजत

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जयपुर, 16 जुलाई: राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए जोधपुर ओपन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे दो कैदियों को शादी करने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि अपनी मर्जी से शादी करने वाले दो बालिग लोगों का यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत आजादी के अधिकार में आता है। जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की बेंच ने यह अहम फैसला नागौर के रहने वाले मूलाराम की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मूलाराम ने अपनी शादी के लिए सजा को कुछ समय के लिए रोकने की मांग की थी।

मूलाराम 16 फरवरी 2017 से हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है और फिलहाल जोधपुर के मंडोर ओपन एयर कैंप में है। वहीं, महिला कैदी सीमा गाडसे गुलाब भी अपने पति की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा भुगत रही है। वकील कालूराम भाटी ने बताया कि मूलाराम, सीमा गाडसे गुलाब से शादी करना चाहता है। सीमा फिलहाल 40 दिन की पैरोल पर बाहर है। याचिका में यह भी कहा गया कि इस शादी से दोनों कैदियों को सुधारने और समाज में फिर से शामिल होने में मदद मिलेगी। इससे वे रिहाई के बाद एक सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकेंगे।
इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले का भी हवाला दिया गया। उस फैसले में कोर्ट ने कहा था कि कैदियों को शादी करने और बच्चे पैदा करने का अधिकार है। यह अधिकार भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। राज्य सरकार ने भी अपनी रिपोर्ट में कोर्ट को बताया कि दोनों कैदी शादी करना चाहते हैं और वे लिव-इन रिलेशनशिप में भी रहे हैं। सरकारी वकीलों ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार को ओपन-एयर कैंप में शादी कराने पर कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते यह जेल के नियमों के अनुसार हो।

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सजा काट रहे कैदियों को सिर्फ इसलिए उनकी मर्जी से शादी करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि वे जेल में हैं। कोर्ट का मानना है कि ऐसी शादी की इजाजत देने से कैदियों के सुधार की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, उन्हें मुख्यधारा के समाज में फिर से जुड़ने में भी मदद मिलेगी। यह फैसला कैदियों के मानवीय अधिकारों और उनके पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

हाईकोर्ट ने शादी के लिए कुछ खास निर्देश भी दिए हैं। मंडोर ओपन एयर कैंप में शादी के दौरान दोनों पक्षों के अधिकतम 21 परिवार के सदस्य ही शामिल हो सकेंगे। इसमें शादी कराने वाले पंडित भी शामिल होंगे। अगर परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ाने का कोई अनुरोध आता है, तो उस पर जेल प्रशासन ही फैसला करेगा। कोर्ट ने जोड़े को यह भी निर्देश दिया कि वे शादी की तारीख तय होने से काफी पहले जेल प्रशासन को इसकी सूचना दें। शादी समारोह से जुड़ा सारा खर्च मूलाराम ही उठाएंगे। यह आदेश कैदियों के जीवन में एक नई उम्मीद लेकर आया है, जो उन्हें समाज में एक सामान्य जीवन जीने का अवसर प्रदान करता है। यह दिखाता है कि कानून सिर्फ सजा देने के लिए नहीं है, बल्कि सुधार और पुनर्वास के लिए भी है।

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