दक्षिण कोरिया के पूर्व फ्लोर लीडर क्वोन सियोंग-डोंग को अवैध धन स्वीकार करने पर सुप्रीम कोर्ट से मिली सजा, संसद सदस्यता समाप्त

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Navbharat Times
सोल, 16 जुलाई: दक्षिण कोरिया के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मुख्य विपक्षी पीपुल पावर पार्टी (पीपीपी) के सांसद क्वोन सियोंग-डोंग को यूनिफिकेशन चर्च से अवैध रूप से पैसे लेने के मामले में दो साल की जेल की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ ही उनकी संसद की सदस्यता भी खत्म हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें क्वोन को 'पोलिटिकल फंड्स एक्ट' का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया था। अदालत के मुताबिक, क्वोन ने जनवरी 2022 में चर्च के एक अधिकारी से 10 करोड़ वॉन (लगभग 67,300 अमेरिकी डॉलर) लिए थे। यह अधिकारी तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक-योल की सरकार से अपने फायदे की कोशिश कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्हें अपीलीय अदालत के फैसले में कोई कानूनी गलती नहीं मिली। क्वोन से 10 करोड़ वॉन की जब्ती का आदेश भी बरकरार रखा गया है। दक्षिण कोरिया में, अगर किसी सांसद को राजनीतिक कोष कानून के उल्लंघन में 10 लाख वॉन या उससे ज्यादा का जुर्माना या सजा मिलती है, तो उसकी नेशनल असेंबली की सदस्यता चली जाती है।

क्वोन ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे अंतिम फैसले को मानते हैं, लेकिन उन्होंने इसे "Political प्रतिशोध" बताते हुए खत्म करने की मांग की। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले हफ्ते यून यंग-हो के खिलाफ दोषसिद्धि को अंतिम रूप दिए जाने के बाद आया है। यून यंग-हो वही चर्च अधिकारी हैं जिन पर क्वोन को 10 करोड़ वॉन देने सहित कई आरोप लगे थे।
पांच बार सांसद रह चुके क्वोन, जिन्हें कभी राष्ट्रपति यून सुक-योल का करीबी माना जाता था, ने पहले दावा किया था कि उन्होंने चर्च अधिकारी से सिर्फ खाने के दौरान मुलाकात की थी और कोई पैसा नहीं लिया था। हालांकि, सोल हाई कोर्ट ने विशेष अभियोजक मिन जोंग-की की टीम द्वारा पेश किए गए सबूतों का हवाला देते हुए उनके इस दावे को खारिज कर दिया था। अपीलीय अदालत ने क्वोन के उस तर्क को भी नहीं माना, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्व प्रथम महिला किम क्योन-ही (यून सुक-योल की पत्नी) से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए नियुक्त विशेष अभियोजक मिन के अधिकार क्षेत्र में उनका मामला नहीं आता।

क्वोन जून 2025 तक पीपीपी के संसदीय दल के नेता (फ्लोर लीडर) थे। उन्हें सितंबर में गिरफ्तार किया गया था और नवंबर में उन पर आरोप तय किए गए थे। विशेष अभियोजक मिन की टीम ने क्वोन के लिए चार साल की जेल की सजा और 10 करोड़ वॉन की जब्ती की मांग की थी।

यह मामला दक्षिण कोरिया की राजनीति में एक बड़ा झटका है, खासकर पीपुल पावर पार्टी के लिए। क्वोन सियोंग-डोंग जैसे वरिष्ठ नेता का इस तरह के आरोप में दोषी पाया जाना पार्टी की छवि पर भी असर डालता है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला यह भी दर्शाता है कि कानून किसी भी व्यक्ति पर लागू होता है, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।

यह घटना राजनीतिक चंदे के नियमों के महत्व को भी उजागर करती है। 'पोलिटिकल फंड्स एक्ट' जैसे कानून यह सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं कि राजनीतिक प्रक्रिया निष्पक्ष रहे और किसी भी तरह के अनुचित प्रभाव से मुक्त हो। इस मामले में, चर्च अधिकारी द्वारा राष्ट्रपति की सरकार से अपने हितों को साधने के लिए पैसे देने की कोशिश और सांसद द्वारा उसे स्वीकार करना, इन कानूनों के उल्लंघन का सीधा मामला था।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विशेष अभियोजक मिन जोंग-की के पास इस मामले की जांच करने का पूरा अधिकार था, भले ही क्वोन ने इसका विरोध किया हो। यह उन लोगों के लिए एक संदेश है जो जांच को बाधित करने या उससे बचने की कोशिश करते हैं।

कुल मिलाकर, यह फैसला दक्षिण कोरिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह सुनिश्चित करता है कि राजनीतिक नेता अपने कार्यों के लिए जवाबदेह हों। क्वोन सियोंग-डोंग का संसद से निष्कासन इस बात का प्रमाण है कि कानून के उल्लंघन के गंभीर परिणाम होते हैं।

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