भारत के रियल एस्टेट में 2026 की पहली छमाही में 8.5 अरब डॉलर का रिकॉर्ड इक्विटी निवेश

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नई दिल्ली, 16 जुलाई: भारत के रियल एस्टेट सेक्टर ने 2026 की पहली छमाही में 8.5 अरब डॉलर का रिकॉर्ड इक्विटी निवेश हासिल किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि से 32% अधिक है। यह उछाल भूमि और डेवलपमेंट साइट्स की खरीद के साथ-साथ तैयार ऑफिस परिसंपत्तियों में लगातार मजबूत निवेश के कारण आया है। रियल एस्टेट कंसल्टिंग फर्म सीबीआरई साउथ एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सकारात्मक रुझान पूरे 2026 में जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि नई परियोजनाओं के विकास और तैयार प्रोजेक्ट्स की खरीद दोनों में पैसा आ रहा है।

सीबीआरई के चेयरमैन और सीईओ अंशुमान मैगजीन ने कहा कि मुश्किल वैश्विक माहौल के बावजूद, घरेलू निवेशकों का भारतीय रियल एस्टेट की लंबी अवधि की संभावनाओं पर गहरा भरोसा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि साल की दूसरी छमाही में भी यह गति बनी रहेगी और विदेशी निवेशक भी वैश्विक हालात सुधरने पर फिर से सक्रिय होंगे। मैगजीन के अनुसार, यह प्रदर्शन भारत के रियल एस्टेट कैपिटल मार्केट की ताकत और गहराई को दिखाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 (दूसरी तिमाही) के दौरान रियल एस्टेट सेक्टर में 3.4 अरब डॉलर का निवेश आया। यह पिछले साल की इसी अवधि के लगभग बराबर रहा। इस दौरान, कुल निवेश का लगभग 94% हिस्सा जमीन और डेवलपमेंट साइट्स के साथ-साथ तैयार ऑफिस परिसंपत्तियों में लगाया गया।

निवेश के मामले में डेवलपर्स सबसे आगे रहे, जिनकी हिस्सेदारी करीब 34% थी। इसके बाद घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी लगभग 32% रही। संस्थागत निवेशकों से आने वाली कुल पूंजी में पिछली तिमाही की तुलना में 51% की बढ़ोतरी देखी गई।

शहरों की बात करें तो बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और मुंबई ने मिलकर दूसरी तिमाही में कुल निवेश का लगभग 60% आकर्षित किया। इस दौरान, कुल निवेश का करीब 92% हिस्सा घरेलू निवेशकों, खासकर डेवलपर्स की ओर से आया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जमीन और साइट अधिग्रहण में हुए कुल निवेश का 88% से अधिक हिस्सा आवासीय और ऑफिस प्रोजेक्ट्स में लगाया गया। बाकी निवेश डेटा सेंटर, मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट्स और इंडस्ट्रियल एवं लॉजिस्टिक्स (आईएंडएल) प्रोजेक्ट्स में हुआ।

सीबीआरई इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और को-हेड (कैपिटल मार्केट्स) गौरव कुमार ने कहा कि भारत का रियल एस्टेट निवेश बाजार लगातार मजबूत हो रहा है। उनके अनुसार, मुख्य संपत्तियों (कोर एसेट्स) में संस्थागत निवेश और जमीन के सौदों में तेज गतिविधि इस क्षेत्र की मजबूती को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक और घरेलू दोनों तरह के निवेशक विभिन्न प्रकार की संपत्तियों (एसेट क्लास) में अपने रियल एस्टेट पोर्टफोलियो का तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

यह रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। घरेलू निवेशकों का विश्वास और सक्रियता इस सेक्टर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। तैयार परियोजनाओं में निवेश और नई परियोजनाओं के विकास के लिए पूंजी का निरंतर प्रवाह इस सेक्टर के भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की वापसी से इस सेक्टर को और भी बढ़ावा मिलेगा। भारत के रियल एस्टेट कैपिटल मार्केट की गहराई और मजबूती इसे वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाती है। विभिन्न प्रकार की संपत्तियों में निवेश का विविधीकरण (diversification) इस सेक्टर की परिपक्वता को दर्शाता है।

यह भी महत्वपूर्ण है कि बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और मुंबई जैसे प्रमुख शहर निवेश को आकर्षित करने में अग्रणी बने हुए हैं। यह इन शहरों में रियल एस्टेट की बढ़ती मांग और विकास की क्षमता को दर्शाता है। आवासीय और ऑफिस परियोजनाओं में भूमि और साइट अधिग्रहण पर अधिक ध्यान केंद्रित करना इस बात का संकेत है कि इन क्षेत्रों में विकास की काफी संभावनाएं हैं।

डेटा सेंटर, मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट्स और आईएंडएल परियोजनाओं में निवेश का बढ़ना यह भी दर्शाता है कि रियल एस्टेट सेक्टर अब केवल पारंपरिक आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नए और उभरते क्षेत्रों में भी विस्तार कर रहा है। यह विविधीकरण सेक्टर को और अधिक लचीला और टिकाऊ बनाता है।

कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बहुत ही सकारात्मक तस्वीर पेश करती है, जो मजबूत निवेश, घरेलू विश्वास और भविष्य के विकास की अपार संभावनाओं से प्रेरित है।

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