नीट पेपर लीक: जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज, दिलजीत दोसांझ और सोनू सूद ने जताया दुख

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Navbharat Times
दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और शिक्षा में धांधली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में अभिनेता-गायक दिलजीत दोसांझ ने मंगलवार को अपना दुख जताया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर वरिष्ठ अधिकारियों से छात्रों की बात सुनने की अपील की। दिलजीत ने यह भी बताया कि किसानों के आंदोलन का समर्थन करने पर उन्हें 'देशद्रोही' कहा गया था और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इस घटना पर सोनू सूद और आयशा“अहमद ने भी दुख व्यक्त किया है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को नीट (NEET) परीक्षा में कथित पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में गड़बड़ी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प पर बॉलीवुड हस्तियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस घटना से आहत अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ ने मंगलवार को अपना गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर एक नोट साझा किया, जिसमें उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों को सुनने की गुहार लगाई।
दिलजीत दोसांझ ने अपने नोट में यह भी बताया कि कैसे किसानों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने के कारण उन्हें खुद भी काफी विरोध और कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले भी 'देशद्रोही' कहा जा चुका है और अपनी बात रखने की वजह से उन्हें कानूनी पचड़ों में भी फंसना पड़ा था। उन्होंने लिखा, "जो हुआ, वह बहुत गलत था। छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए था। मैं अधिकारियों से अपील करता हूं कि वे छात्रों की मांगों को सुनें। लोगों की आवाज ही भगवान की आवाज होती है।"

उन्होंने आगे कहा, "मुझे पहले भी देशद्रोही कहा जा चुका है और अब भी शायद ऐसा ही कहा जाएगा। किसान आंदोलन के बाद मुझे काफी विरोध और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिनके बारे में मैं अभी बात भी नहीं कर सकता। अब आगे जो होगा, उसे भगवान ही संभालेंगे।"

इस घटना पर अभिनेता सोनू सूद ने भी सोमवार को हुई कार्रवाई पर दुख जताते हुए कहा, "हमारे छात्रों को लाठियां नहीं, गले लगाने वाले हाथ चाहिए।"

अभिनेत्री आयशा“अहमद ने भी इंस्टाग्राम पर एक नोट जारी कर इस घटना पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा, "प्रदर्शन के दौरान सामने आए दृश्य बहुत दुखद और दिल दहला देने वाले हैं। मेरे कुछ दोस्त वहां मौजूद थे, जिन्होंने बताया कि प्रदर्शन में लोग शांतिपूर्ण तरीके से सम्मान के साथ और अनुशासन में रहकर अपनी बात रख रहे थे। फिर भी जो कुछ हुआ, वह हो गया।"

आयशा“अहमद ने आगे कहा, "मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि वहां पहुंचने वाले हर व्यक्ति पर मुझे बहुत गर्व है। लंबे समय बाद पहली बार मुझे अपने देश के भविष्य को लेकर थोड़ी कम निराशा महसूस हो रही है। मुझे पूरा विश्वास है कि आज जिन लोगों ने तकलीफें झेलीं, उनका संघर्ष बेकार नहीं जाएगा। कई ऐसे लोग, जो हमेशा खुद को 'राजनीति से दूर' रखते थे, उन्होंने भी अब अपनी आवाज उठाई है। भले ही कुछ लोगों ने शुरुआत सामाजिक दबाव के कारण की हो, फिर भी यह एक सकारात्मक कदम है। आज मेरे मन में गर्व, दुख और गहरी शर्मिंदगी है।"

यह घटना छात्रों के भविष्य और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर कई लोग छात्रों के प्रति समर्थन जता रहे हैं और पुलिस की कार्रवाई की निंदा कर रहे हैं। यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और छात्रों की जायज मांगों पर ध्यान देगी।

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