कर्नाटक में स्थायी निवास प्रमाण पत्र के लिए 11 पात्रता मानदंड: ईसीआई मतदाता सूची पुनरीक्षण के बीच नई गाइडलाइंस
कर्नाटक में स्थायी निवास प्रमाण पत्र के लिए 11 पात्रता मानदंड: ईसीआई मतदाता सूची पुनरीक्षण के बीच नई गाइडलाइंस
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बेंगलुरु, 20 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निवास संबंधी बढ़ते विवादों के बीच स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) जारी करने के लिए 11 कड़े पात्रता मानदंड तय किए हैं। यह घोषणा उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार को की। उन्होंने बताया कि यह कदम नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जिसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण दस्तावेज सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाए बिना जरूरतमंदों तक पहुंचें। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने विधान सौधा सम्मेलन हॉल में राज्य की निःशुल्क जाति प्रमाण पत्र और स्थायी निवास प्रमाण पत्र वितरण सेवा के शुभारंभ के दौरान यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस बात पर जोर दिया कि स्थायी निवास प्रमाण पत्र उन 11 दस्तावेजों में से एक है, जिन्हें चुनाव आयोग मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मान्यता देता है।
कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया है कि जाति प्रमाण पत्र (पीआरसी) कर्नाटक में जन्म, रोजगार, विवाह और राज्य में कम से कम 10 साल के निरंतर निवास जैसे कारकों के आधार पर जारी किए जाएंगे। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने विस्तार से बताया कि निर्धारित 11 मानदंडों में से किसी एक को भी पूरा करने वाले आवेदक प्रमाण पत्र प्राप्त करने के पात्र होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने बड़े पैमाने पर जाति प्रमाण पत्रों का वितरण भी शुरू कर दिया है। इस वितरण के लिए लगभग 48 लाख जाति प्रमाण पत्रों की पहचान की गई है। इनमें श्रेणी 2ए, 2बी, 3ए और 3बी के तहत 13 लाख लाभार्थी, श्रेणी 1 के तहत 86 लाख और 26 करोड़ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र धारक शामिल हैं।नागरिकों की सुविधा के लिए, उपमुख्यमंत्री ने बताया कि वे आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपने प्रमाण पत्र निःशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं या व्हाट्सएप के माध्यम से भी प्राप्त कर सकते हैं। जिन आवेदकों को प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है, उनके लिए एक शिकायत निवारण तंत्र भी स्थापित किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि तहसीलदार, उप तहसीलदार और उप-विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपील दायर की जा सकती है। इसके अलावा, उपायुक्तों को शिकायतों के आधार पर पुन: सत्यापन का आदेश देने का अधिकार भी दिया गया है।
स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) के लिए निर्धारित 11 पात्रता शर्तों की व्याख्या करते हुए उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने बताया कि आवेदक पात्र हो सकते हैं यदि उनका जन्म कर्नाटक में हुआ हो। एक अन्य महत्वपूर्ण शर्त यह है कि उनके माता-पिता कम से कम एक दशक से राज्य में स्थायी रूप से निवास कर रहे हों। इसके अलावा, यदि आवेदक ने कर्नाटक में 12वीं कक्षा या 10 साल की शिक्षा पूरी की हो, तो वे भी पात्र माने जाएंगे। एक और पात्रता कारक यह है कि उनके जीवनसाथी, माता-पिता या कानूनी अभिभावक राज्य के स्थायी निवासी हों।
इन मुख्य शर्तों के अलावा, कुछ अतिरिक्त पात्रता कारक भी निर्धारित किए गए हैं। इनमें कर्नाटक में आवासीय या अचल संपत्ति का स्वामित्व शामिल है। यदि कोई व्यक्ति कानूनी उत्तराधिकारी के दर्जे में है, तो वह भी पात्र हो सकता है। मतदाता सूची में नाम होना या आधार कार्ड, राशन कार्ड, राजस्व रिकॉर्ड या अन्य सरकारी दस्तावेजों के माध्यम से निवास का दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करना भी पात्रता को मजबूत करता है। कर्नाटक में कम से कम सात वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी भी इस सुविधा के लिए पात्र होंगे। साथ ही, कर्नाटक के निवासियों से विवाहित व्यक्ति भी पीआरसी के लिए आवेदन कर सकते हैं।
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने बताया कि लगभग 4.8 करोड़ प्रमाण पत्र अटल जनस्नेही केंद्रों के माध्यम से उपायुक्तों को भेजे जा चुके हैं। जिला प्रशासन तहसीलदारों और अन्य जमीनी स्तर के अधिकारियों के माध्यम से घर-घर जाकर वितरण की निगरानी कर रहा है। इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) कर्नाटक के निवासियों को एसआईआर प्रक्रिया में सहायता प्रदान करेंगे। यह उन चिंताओं को दूर करने में भी मदद करेगा जो कथित तौर पर गैर-निवासियों और अवैध प्रवासियों द्वारा कर्नाटक के लोगों के लिए निर्धारित लाभों का दुरुपयोग करने से संबंधित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, वे पीआरसी प्रणाली के दायरे से बाहर रहेंगे।
यह कदम कर्नाटक सरकार द्वारा नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण दस्तावेज, जैसे कि जाति प्रमाण पत्र और स्थायी निवास प्रमाण पत्र, सरकारी कार्यालयों में बार-बार जाने की आवश्यकता के बिना सीधे लाभार्थियों तक पहुंचें। यह पहल न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करेगी बल्कि नागरिकों को सशक्त भी बनाएगी।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस अवसर पर कहा कि स्थायी निवास प्रमाण पत्र उन 11 महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक है, जिन्हें चुनाव आयोग मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मान्यता देता है। यह दर्शाता है कि पीआरसी का महत्व केवल निवास साबित करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिक पहचान और सरकारी योजनाओं के लाभों तक पहुंच के लिए भी एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
इस कार्यक्रम में बोलते हुए उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने कहा कि यह कदम नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में एक और कदम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कर्नाटक सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण दस्तावेज लाभार्थियों तक सरकारी कार्यालयों में बार-बार जाने की आवश्यकता के बिना पहुंच जाएं। यह नागरिकों के समय और ऊर्जा की बचत करेगा और सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाएगा।
कर्नाटक सरकार के अनुसार, जाति प्रमाण पत्र (पीआरसी) कर्नाटक में जन्म, रोजगार, विवाह और राज्य में कम से कम 10 वर्षों के निरंतर निवास जैसे कारकों के आधार पर जारी किए जाएंगे। यह स्पष्ट करता है कि पीआरसी केवल निवास का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह राज्य के साथ व्यक्ति के जुड़ाव के विभिन्न पहलुओं को भी दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि निर्धारित 11 मानदंडों में से किसी एक को भी पूरा करने वाले आवेदक प्रमाण पत्र प्राप्त करने के पात्र होंगे। यह लचीलापन सुनिश्चित करता है कि अधिक से अधिक योग्य नागरिक इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों का लाभ उठा सकें।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बड़े पैमाने पर जाति प्रमाण पत्रों का वितरण भी शुरू कर दिया है। वितरण के लिए लगभग 48 लाख जाति प्रमाण पत्रों की पहचान की गई है, जिनमें श्रेणी 2ए, 2बी, 3ए और 3बी के तहत 13 लाख लाभार्थी, श्रेणी 1 के तहत 86 लाख और 26 करोड़ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र धारक शामिल हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार इस पहल को कितनी गंभीरता से ले रही है और कितने बड़े पैमाने पर लाभार्थियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि नागरिक आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपने प्रमाण पत्र निःशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं या व्हाट्सएप के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। यह डिजिटल पहुंच नागरिकों को सुविधा प्रदान करती है और बिचौलियों की भूमिका को कम करती है।
कठिनाइयों का सामना कर रहे आवेदकों के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र भी स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि तहसीलदार, उप तहसीलदार और उप-विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपील दायर की जा सकती है, जबकि उपायुक्तों को शिकायतों के आधार पर पुन: सत्यापन का आदेश देने का अधिकार दिया गया है। यह तंत्र सुनिश्चित करता है कि किसी भी नागरिक को न्याय से वंचित न रखा जाए और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।
पीआरसी के लिए 11 पात्रता शर्तों की व्याख्या करते हुए परमेश्वर ने कहा कि आवेदक पात्र हो सकते हैं यदि उनका जन्म कर्नाटक में हुआ हो, उनके माता-पिता कम से कम एक दशक से राज्य में स्थायी रूप से निवास कर रहे हों, उन्होंने कर्नाटक में 12वीं कक्षा या 10 वर्ष की शिक्षा पूरी की हो, या उनके जीवनसाथी, माता-पिता या कानूनी अभिभावक राज्य के स्थायी निवासी हों। ये शर्तें कर्नाटक के वास्तविक निवासियों की पहचान सुनिश्चित करने में मदद करेंगी।
अतिरिक्त पात्रता कारकों में कर्नाटक में आवासीय या अचल संपत्ति का स्वामित्व, कानूनी उत्तराधिकारी का दर्जा, मतदाता सूची में नाम और आधार कार्ड, राशन कार्ड, राजस्व रिकॉर्ड या अन्य सरकारी दस्तावेजों के माध्यम से दस्तावेजी प्रमाण शामिल हैं। ये कारक निवास और राज्य के साथ जुड़ाव के अन्य प्रमाण प्रदान करते हैं।
कर्नाटक में कम से कम सात वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी और कर्नाटक के निवासियों से विवाहित व्यक्ति भी पात्र हैं। यह उन लोगों को भी शामिल करता है जिन्होंने राज्य की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है या राज्य के निवासियों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित किए हैं।
परमेश्वर ने कहा कि लगभग 4.8 करोड़ प्रमाण पत्र अटल जनस्नेही केंद्रों के माध्यम से उपायुक्तों को भेजे जा चुके हैं, और जिला प्रशासन तहसीलदारों और अन्य जमीनी स्तर के अधिकारियों के माध्यम से घर-घर जाकर वितरण की निगरानी कर रहा है। यह जमीनी स्तर पर वितरण सुनिश्चित करता है कि प्रमाण पत्र उन लोगों तक भी पहुंचें जो डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं।
इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी) कर्नाटक के निवासियों को एसआईआर प्रक्रिया में सहायता प्रदान करेंगे और उन चिंताओं को दूर करने में मदद करेंगे जो कथित तौर पर गैर-निवासियों और अवैध प्रवासियों द्वारा कर्नाटक के लोगों के लिए निर्धारित लाभों का दुरुपयोग करने से संबंधित हैं। यह पहल राज्य के संसाधनों और लाभों को वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा कि जो लोग निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, वे पीआरसी प्रणाली के दायरे से बाहर रहेंगे। यह स्पष्ट करता है कि प्रणाली का उद्देश्य केवल योग्य व्यक्तियों को लाभ पहुंचाना है और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोकना है।