नीट परीक्षा विवाद: एनडीए सांसदों का विपक्ष पर हमला, चर्चा के लिए तैयार सरकार
नीट परीक्षा विवाद: एनडीए सांसदों का विपक्ष पर हमला, चर्चा के लिए तैयार सरकार
NewsPoint•
नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। संसद में लगातार हंगामे, नीट परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया ट्वीट को लेकर सत्ताधारी एनडीए के सांसदों ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। भाजपा और जदयू के सांसदों का कहना है कि सरकार नीट मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष सदन की कार्यवाही चलने ही नहीं देना चाहता। उनका यह भी कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद भी विपक्ष का आंदोलन जारी रखना बेतुका है।
भाजपा सांसद एसपी सिंह बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को भरोसा दिलाया है कि नीट परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच पहले से चल रही है। इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, पुलिस रिमांड पर लिया गया है और संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है। अब प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा करके यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि दोषियों को जल्दी सजा मिले और छात्रों को जल्द न्याय मिले। उन्होंने विपक्षी नेताओं और मेडिकल छात्रों से अपील की कि प्रधानमंत्री के आश्वासन के बाद आंदोलन खत्म कर संसद की कार्यवाही चलने दी जाए।भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसद तख्तियां लेकर संसद में आते हैं, लेकिन जिन मुद्दों को उठाने का दावा करते हैं, उन पर चर्चा करने से बचते हैं। अगर विपक्ष सचमुच छात्रों के हितों की चिंता करता, तो वह सदन में बहस के लिए तैयार होता। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी के सांसदों की एक ही मांग थी कि नीट पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में युवाओं को भरोसा दिलाया है कि सरकार उनके भविष्य की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से दोषियों को जल्द से जल्द कठोर सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो बड़े से बड़े कानूनी विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी ताकि अपराधियों को सजा दिलाई जा सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि नीट की पुनर्परीक्षा कराई जा चुकी है और उसका परिणाम भी घोषित हो चुका है। लगभग 60 लाख से अधिक छात्रों से जुड़ी विभिन्न परीक्षाएं बिना किसी गड़बड़ी के सफलतापूर्वक संपन्न हुई हैं। उन्होंने छात्रों से राजनीतिक दलों के बहकावे में नहीं आने की अपील करते हुए कहा कि मोदी सरकार उनके भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर और प्रतिबद्ध है।
विपक्ष की इस मांग पर कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही चर्चा होगी, मनोज तिवारी ने कहा कि संसद देश का सबसे पवित्र लोकतांत्रिक मंच है और यदि विपक्ष के पास कोई तथ्य या प्रमाण हैं तो उन्हें सदन में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना चर्चा किए केवल इस्तीफे की मांग करना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार देश संसद-तंत्र से चलता है, न कि सड़क पर आंदोलन के आधार पर।
भाजपा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने भी विपक्ष के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शुरुआत में विपक्ष खुद नीट पर चर्चा की मांग कर रहा था, लेकिन जब सरकार ने चर्चा के लिए सहमति दे दी तो विपक्ष पीछे हट गया। इससे यह सवाल उठता है कि विपक्ष वास्तव में छात्रों की समस्याओं का समाधान चाहता है या केवल राजनीतिक लाभ के लिए संसद की कार्यवाही बाधित करना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि पेपर लीक के दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द और कड़ी सजा दी जाएगी और सरकार इस मामले में पहले से ही कई कदम उठा चुकी है।
जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने विपक्ष के रवैये को पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को डर है कि यदि सदन में चर्चा हुई तो उसके आरोप टिक नहीं पाएंगे, इसलिए वह लगातार नई-नई शर्तें रख रहा है। विपक्ष की शुरुआती मांग केवल नीट पेपर लीक पर चर्चा की थी और सरकार ने इसे स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन अब विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसी शर्तें जोड़कर चर्चा से बच रहा है। संसद में कभी भी शर्तों के आधार पर बहस नहीं होती।
उन्होंने विपक्ष के छात्र आंदोलन से जुड़े आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले अपने इतिहास की ओर भी देखना चाहिए। पेपर लीक एक संगठित आपराधिक गतिविधि है और ऐसे अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना ही समाधान है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी जिससे भविष्य में कोई भी इस प्रकार का अपराध करने का साहस न कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का उद्देश्य समाधान निकालना नहीं, बल्कि राजनीतिक नाटक कर संसद की कार्यवाही बाधित करना है।
एनडीए सांसदों का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर संसद की कार्यवाही को बाधित कर रहा है। वे नीट परीक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा से भाग रहे हैं, जबकि सरकार इस मामले में छात्रों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस मामले में त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की बात कही है। इसके बावजूद विपक्ष का अड़ियल रवैया समझ से परे है।
भाजपा सांसद एसपी सिंह बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश को आश्वस्त किया है कि नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की जांच पहले से जारी है। इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, पुलिस रिमांड हुई है और संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है। अब प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि दोषियों को जल्द सजा मिले और छात्रों को शीघ्र न्याय प्राप्त हो। उन्होंने विपक्षी नेताओं और मेडिकल छात्रों से अपील करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के आश्वासन के बाद आंदोलन जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बचता और संसद की कार्यवाही चलने देनी चाहिए।
मनोज तिवारी ने कहा कि विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस नेता राहुल गांधी, गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपना रहे हैं। विपक्षी सांसद तख्तियां लेकर संसद में आते हैं, लेकिन जिन मुद्दों को उठाने का दावा करते हैं, उन पर चर्चा करने से कतराते हैं। यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के हितों की चिंता करता, तो वह सदन में बहस के लिए तैयार होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी के सांसदों की एक ही मांग थी कि नीट पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
तिवारी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में युवाओं को भरोसा दिलाया है कि सरकार उनके भविष्य की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से दोषियों को जल्द से जल्द कठोर सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। यदि आवश्यकता पड़ी तो बड़े से बड़े कानूनी विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी ताकि अपराधियों को सजा दिलाई जा सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि नीट की पुनर्परीक्षा कराई जा चुकी है और उसका परिणाम भी घोषित हो चुका है। लगभग 60 लाख से अधिक छात्रों से जुड़ी विभिन्न परीक्षाएं बिना किसी गड़बड़ी के सफलतापूर्वक संपन्न हुई हैं। उन्होंने छात्रों से राजनीतिक दलों के बहकावे में नहीं आने की अपील करते हुए कहा कि मोदी सरकार उनके भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर और प्रतिबद्ध है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर मनोज तिवारी ने कहा कि संसद देश का सबसे पवित्र लोकतांत्रिक मंच है और यदि विपक्ष के पास कोई तथ्य या प्रमाण हैं तो उन्हें सदन में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना चर्चा किए केवल इस्तीफे की मांग करना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार देश संसद-तंत्र से चलता है, न कि सड़क पर आंदोलन के आधार पर।
हर्षवर्धन श्रृंगला ने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि शुरुआत में विपक्ष खुद नीट पर चर्चा की मांग कर रहा था, लेकिन जब सरकार ने चर्चा के लिए सहमति दे दी तो विपक्ष पीछे हट गया। इससे यह सवाल उठता है कि विपक्ष वास्तव में छात्रों की समस्याओं का समाधान चाहता है या केवल राजनीतिक लाभ के लिए संसद की कार्यवाही बाधित करना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि पेपर लीक के दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से जल्द और कड़ी सजा दी जाएगी और सरकार इस मामले में पहले से ही कई कदम उठा चुकी है।
जदयू के सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने विपक्ष के रवैये को पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को डर है कि यदि सदन में चर्चा हुई तो उसके आरोप टिक नहीं पाएंगे, इसलिए वह लगातार नई-नई शर्तें रख रहा है। विपक्ष की शुरुआती मांग केवल नीट पेपर लीक पर चर्चा की थी और सरकार ने इसे स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन अब विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसी शर्तें जोड़कर चर्चा से बच रहा है। संसद में कभी भी शर्तों के आधार पर बहस नहीं होती।
उन्होंने विपक्ष के छात्र आंदोलन से जुड़े आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले अपने इतिहास की ओर भी देखना चाहिए। पेपर लीक एक संगठित आपराधिक गतिविधि है और ऐसे अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना ही समाधान है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी जिससे भविष्य में कोई भी इस प्रकार का अपराध करने का साहस न कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का उद्देश्य समाधान निकालना नहीं, बल्कि राजनीतिक नाटक कर संसद की कार्यवाही बाधित करना है।
एनडीए सांसदों का मानना है कि विपक्ष का असली मकसद छात्रों की समस्याओं का समाधान करना नहीं, बल्कि राजनीतिक रोटियां सेंकना है। वे संसद जैसे महत्वपूर्ण मंच का दुरुपयोग कर रहे हैं और देश के विकास में बाधा डाल रहे हैं। सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।