अमला शंकर: 93 साल की उम्र में कान्स में छाईं, आधुनिक भारतीय नृत्य की पुरोधा

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नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। आधुनिक भारतीय नृत्य की महान हस्ती और मशहूर कोरियोग्राफर अमला शंकर का 24 जुलाई 2020 को कोलकाता में 101 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 1948 की ऐतिहासिक फिल्म 'कल्पना' में अपनी मुख्य भूमिका और 2012 में कान्स फिल्म फेस्टिवल में 93 साल की उम्र में 'सबसे युवा फिल्म स्टार' के रूप में की गई उनकी मज़ेदार टिप्पणी के लिए वे हमेशा याद की जाएंगी। अमला शंकर ने न केवल नृत्य में बल्कि चित्रकला और लेखन में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने बच्चों को भारतीय कला सिखाने के लिए उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर (यूएसआईसीसी) की स्थापना की और सामाजिक अभियानों से भी जुड़ी रहीं।

अमला शंकर का जन्म 27 जून 1919 को ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रेसीडेंसी के मगूरा जिले (जो आज बांग्लादेश में है) के बाटाजोर गांव में हुआ था। उनके पिता अक्षय कुमार नंदी एक स्वर्ण व्यापारी थे, लेकिन उन्हें शिक्षा और कला से बहुत लगाव था। वे प्रकृति और ग्रामीण जीवन को भी बहुत पसंद करते थे। अमला का बचपन का नाम अमला नंदी था।
1931 में, जब अमला सिर्फ 11 साल की थीं, वे अपने पिता के साथ पेरिस में 'अंतर्राष्ट्रीय औपनिवेशिक प्रदर्शनी' देखने गईं। वहां उनकी मुलाकात महान भारतीय नर्तक उदय शंकर और उनके परिवार से हुई। उदय शंकर की मां हेमांगिनी देवी ने अमला को प्यार से एक साड़ी दी। यहीं से अमला के कलात्मक सफर की शुरुआत हुई और वे उदय शंकर के नृत्य दल का हिस्सा बन गईं।

देश के महान नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अमला की नृत्य में रुचि के बारे में पता था। उन्होंने अमला के पिता को समझाया कि वे अमला को अल्मोड़ा में उदय शंकर डांस अकादमी भेजें। बाद में, नेताजी ने अमला को यूरोप में भारत के सांस्कृतिक दूत के रूप में भी भेजा। 1931 में ही बेल्जियम में 'कालिया दमन' नामक एक प्रस्तुति के साथ अमला ने पहली बार मंच पर कदम रखा।

जैसे-जैसे उदय शंकर और अमला नृत्य की दुनिया में आगे बढ़ते गए, उनका रिश्ता भी गहरा होता गया। 1939 में, जब उनका नृत्य दल चेन्नई में रुका हुआ था, तब उदय शंकर ने अमला को शादी का प्रस्ताव दिया। 1942 में दोनों ने शादी कर ली। इस प्रतिभाशाली जोड़े के दो बच्चे हुए। दिसंबर 1942 में उनके बेटे आनंद शंकर का जन्म हुआ, जो एक प्रसिद्ध संगीतकार बने। जनवरी 1954 में उनकी बेटी ममता शंकर का जन्म हुआ, जो एक जानी-मानी नृत्यांगना और अभिनेत्री हैं।

मंच पर शानदार प्रदर्शन के अलावा, अमला शंकर ने 1948 में उदय शंकर की फिल्म 'कल्पना' में मुख्य भूमिका निभाई। यह फिल्म एक युवा नर्तक के अपने नृत्य अकादमी खोलने के सपने पर आधारित थी। अमला शंकर सिर्फ एक बेहतरीन नृत्यांगना ही नहीं थीं, बल्कि एक कमाल की चित्रकार भी थीं। उनकी चित्रकला की सबसे खास बात यह थी कि वे कभी ब्रश का इस्तेमाल नहीं करती थीं। वे अपनी उंगलियों, नाखूनों और टूथपिक की मदद से ही कैनवास पर रंग भरती थीं।

अमला शंकर ने लेखन के क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया। उन्होंने एक किताब लिखी थी, जिसकी प्रस्तावना खुद नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने लिखी थी। अमला शंकर का जीवन सिर्फ कला तक ही सीमित नहीं था। अल्मोड़ा में उदय शंकर का केंद्र बंद होने के बाद, उन्होंने कोलकाता में 'उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर' (यूएसआईसीसी) की स्थापना की। यहां उन्होंने पांच साल की छोटी उम्र से ही बच्चों को भारतीय कला और संस्कृति की शिक्षा देना शुरू किया।

वे 'स्त्री शक्ति - द पैरेलल फोर्स' जैसे सामाजिक अभियानों से भी सक्रिय रूप से जुड़ी रहीं। इसके अलावा, वे सत्य साईं बाबा की बहुत बड़ी भक्त थीं और उनका आध्यात्मिक जीवन भी बहुत समृद्ध था। 92 साल की उम्र में भी उन्होंने 'सीता स्वयंवर' नामक एक नृत्य नाटिका में राजा जनक की भूमिका निभाई, जिसने दर्शकों को हैरान कर दिया था।

24 जुलाई 2020 को कोलकाता में सोते समय हृदय गति रुकने से अमला शंकर का निधन हो गया। उन्होंने 101 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन कला के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा जीवित रहेगा। उनकी मुस्कान, उनका आत्मविश्वास और उनकी कलात्मकता हमेशा लोगों को प्रेरित करती रहेगी। कान्स फिल्म फेस्टिवल में 93 साल की उम्र में उनका मज़ाकिया अंदाज़, "मैं इस साल कान्स में आई सबसे युवा फिल्म स्टार हूं," उनकी जिंदादिली का प्रतीक था।

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