ट्रंप का बचाव: सरकारी लीक पर पत्रकारों से पूछताछ, राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला
ट्रंप का बचाव: सरकारी लीक पर पत्रकारों से पूछताछ, राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला
NewsPoint•
वाशिंगटन, 25 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुप्त या संवेदनशील जानकारी लीक करने वाले सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार पत्रकारों को निशाना नहीं बना रही है, बल्कि उन लोगों को पकड़ना चाहती है जो देश की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को बचाने के लिए पत्रकारों को भी अपने गुप्त स्रोतों का खुलासा करने के लिए मजबूर किया जा सकता है। यह बयान तब आया जब न्याय विभाग ने एयर फोर्स वन से जुड़ी रिपोर्टिंग के मामले में न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकारों को जारी किए गए समन वापस ले लिए। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा, "हम पत्रकारों के पीछे नहीं हैं, हम जानकारी लीक करने वालों के पीछे हैं। हम उन कायरों और देशद्रोहियों के पीछे हैं जो देश को नुकसान पहुंचाते हैं।"
ट्रंप ने तर्क दिया कि जब कोई सरकारी अधिकारी बिना इजाजत के संवेदनशील जानकारी लीक करता है, तो उसकी पहचान करने के लिए पत्रकारों से पूछताछ करना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने कहा कि रिपोर्टरों को यह समझना चाहिए कि कुछ जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कितनी महत्वपूर्ण होती है और उसे सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या लीक की जांच के दौरान पत्रकारों के परिवार वालों को समन भेजना सही है, तो ट्रंप ने सीधे जवाब देने से परहेज किया। हालांकि, उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कानूनी तरीकों के इस्तेमाल का समर्थन किया और कहा, "हम इसे कानूनी तौर पर करते हैं।"राष्ट्रपति ने बार-बार पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि ओबामा प्रशासन के दौरान भी लीक की जांच के नाम पर पत्रकारों को परेशान किया गया था। ट्रंप ने कहा, "बराक हुसैन ओबामा हमेशा ऐसा करते थे। वह पत्रकारों के पीछे पड़ जाते थे। उन्होंने ऐसा कई बार किया और किसी ने इस बारे में कुछ नहीं कहा। जब कोई रिपब्लिकन ऐसा करता है, खासकर मैं तो हर कोई इसे बड़ी बात बना देता है।"
ट्रंप का मानना है कि गुप्त जानकारी लीक करने वालों को बचाने के बजाय, सरकार को उस जानकारी को सुरक्षित रखने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, "जब आपके पास कोई है जो राष्ट्रीय सुरक्षा लीक कर रहा है या बहुत महत्वपूर्ण जानकारी लीक कर रहा है मान लीजिए, व्हाइट हाउस की दीवारों के अंदर कोई व्यक्ति लीक कर रहा है, तो मुझे लगता है कि यह एक राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है।" ऐसे मामलों में, राष्ट्रपति के अनुसार, पत्रकारों से उनके गुप्त स्रोतों की पहचान करने के लिए कहना बिल्कुल उचित है। उन्होंने कहा, "आप पत्रकारों से पूछकर पता लगा सकते हैं कि अगर यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, तो आपको यह जानकारी किसने दी? मुझे लगता है कि यह बिल्कुल ठीक है।"
राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के डॉब्स केस के ड्राफ्ट राय के लीक होने का भी उदाहरण दिया, जिसने रो बनाम वेड को पलट दिया था। उन्होंने कहा कि उस मामले में भी जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार की चिंता समाचार संगठनों से नहीं, बल्कि उन सरकारी अधिकारियों से है जो बिना अनुमति के संवेदनशील जानकारी साझा करते हैं। उन्होंने इसे सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा।
यह प्रश्नोत्तर सत्र व्हाइट हाउस में नागरिक परमाणु ऊर्जा पहल के तहत नई उपलब्धियों पर आयोजित एक कार्यक्रम के बाद हुआ। इस दौरान ट्रंप ने ईरान, सऊदी अरब, टैरिफ, ऊर्जा नीति, वेनेजुएला और घरेलू राजनीतिक मुद्दों जैसे कई अहम विषयों पर सवालों के जवाब दिए। इसके बाद उन्होंने न्याय विभाग द्वारा गोपनीय सूचनाएं लीक करने के मामलों की जांच पर भी अपनी राय रखी।
गोपनीय स्रोतों को लेकर अमेरिकी सरकार और मीडिया के बीच संबंध हमेशा से ही विवाद का विषय रहे हैं। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की सरकारों ने हमेशा गोपनीय और वर्गीकृत सूचनाओं के अनधिकृत खुलासे की जांच कराई है। वहीं, समाचार संगठनों का तर्क रहा है कि खोजी पत्रकारिता और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए अपने गुप्त स्रोतों की पहचान को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि अमेरिकी संघीय कानून पत्रकारों को समन से पूरी तरह सुरक्षा प्रदान नहीं करता है। हालांकि, समाचार माध्यमों से जुड़े मामलों की जांच को लेकर न्याय विभाग की नीतियां समय-समय पर बदलती और विकसित होती रही हैं।
ट्रंप का यह रुख इस बात पर जोर देता है कि उनकी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि मानती है। उनका मानना है कि जो लोग देश की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए, भले ही इसके लिए पत्रकारों से उनके स्रोतों का खुलासा करने के लिए कहना पड़े। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर अमेरिका में हमेशा बहस होती रही है, और ट्रंप के बयान ने इस बहस को एक बार फिर गरमा दिया है।
राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य पत्रकारों को परेशान करना नहीं है, बल्कि उन सरकारी अधिकारियों को पकड़ना है जो अपनी जिम्मेदारियों का उल्लंघन करते हैं। उनका मानना है कि ऐसे लीक से देश की प्रतिष्ठा और सुरक्षा दोनों को नुकसान पहुंचता है। इसलिए, वे इस मामले में किसी भी तरह की नरमी बरतने के पक्ष में नहीं हैं।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि ट्रंप ने ओबामा के कार्यकाल का हवाला देकर यह बताने की कोशिश की कि पत्रकारों को परेशान करने का यह कोई नया चलन नहीं है। उनका कहना है कि जब ओबामा ने ऐसा किया तो किसी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन जब वह ऐसा करते हैं तो हर कोई उन पर सवाल उठाता है। यह उनके लिए एक तरह की दोहरी मार है।
संक्षेप में, राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे ऊपर है और इसके लिए पत्रकारों को भी अपने स्रोतों का खुलासा करने के लिए मजबूर किया जा सकता है। वे उन सरकारी अधिकारियों को पकड़ना चाहते हैं जो संवेदनशील जानकारी लीक करते हैं और उनका मानना है कि यह देशद्रोह के समान है। यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति और मीडिया के बीच एक संवेदनशील बिंदु बना हुआ है।