88 करोड़ की ठगी का आरोपी अविनाश अर्जुन राठौड़ यूएई से प्रत्यर्पित, पुणे पुलिस ने किया गिरफ्तार
88 करोड़ की ठगी का आरोपी अविनाश अर्जुन राठौड़ यूएई से प्रत्यर्पित, पुणे पुलिस ने किया गिरफ्तार
NewsPoint•
पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने करीब 88 करोड़ रुपये की निवेश ठगी के मामले में मुख्य आरोपी अविनाश अर्जुन राठौड़ को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से प्रत्यर्पित कर गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के बाद हुई है। अविनाश राठौड़, जो एपीएस वेल्थ वेंचर्स एलएलपी का संचालक था, निवेशकों को अधिक मुनाफे का लालच देकर ठगी करता था। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। भारत लाए जाने के बाद उसे मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर पुणे लाया गया, जहां अदालत ने उसे 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
यह मामला 2023 में चतुःश्रृंगी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। शिकायत 20 अप्रैल 2023 को दर्ज हुई थी, जिसके बाद जांच पुणे शहर की आर्थिक अपराध शाखा को सौंपी गई। जांच में पता चला कि बाणेर स्थित एपीएस वेल्थ वेंचर्स एलएलपी के संचालक अविनाश अर्जुन राठौड़ और उसकी पत्नी विशाखा अविनाश राठौड़ ने निवेशकों को थोड़े समय में बहुत ज्यादा और आकर्षक रिटर्न देने का वादा किया था। उन्होंने लोगों से बाकायदा निवेश के समझौते भी किए, लेकिन बाद में उन समझौतों का पालन नहीं किया और निवेशकों के पैसे वापस नहीं लौटाए।शिकायतकर्ता ने कंपनी में 86 लाख 37 हजार 500 रुपये का निवेश किया था, जो उसे वापस नहीं मिला। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह साफ हो गया कि यह सिर्फ एक निवेशक के साथ हुई ठगी नहीं थी। बल्कि, बड़ी संख्या में लोगों से इसी तरह निवेश कराया गया था और कुल मिलाकर करीब 88 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी।
मामला दर्ज होने के बाद अविनाश और उसकी पत्नी विशाखा दोनों फरार हो गए थे। पुलिस को इस बात का अंदेशा था कि वे देश छोड़कर विदेश भाग सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, 24 अप्रैल 2024 को दोनों आरोपियों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया। इसका मकसद यह था कि वे भारत से बाहर न जा सकें या अगर विदेश से लौटें तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जा सके।
इसके बाद, पुणे के विशेष एमपीआईडी न्यायालय, शिवाजीनगर ने दोनों आरोपियों के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। साथ ही, उन्हें भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अदालत में दोषारोप पत्र (charge sheet) भी दाखिल कर दिया था और उनके पासपोर्ट को भी निलंबित कर दिया गया था।
देशभर में तलाश करने के बावजूद जब आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिला, तो पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद लेने का फैसला किया। 4 जून 2026 को दोनों आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया। इस नोटिस के आधार पर, यूएई की संबंधित एजेंसियों ने अविनाश अर्जुन राठौड़ को हिरासत में ले लिया।
23 जुलाई 2026 को, आरोपी अविनाश अर्जुन राठौड़ को भारत प्रत्यर्पित किया गया। मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद, आरोपी को पुणे लाया गया और अदालत में पेश किया गया। अदालत ने विस्तृत पूछताछ के लिए उसे 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
अब आर्थिक अपराध शाखा यह पता लगाने में जुटी है कि निवेशकों से जुटाए गए 88 करोड़ रुपये कहां और किस तरह खर्च किए गए। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस पूरे ठगी के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि कितनी संपत्तियां खरीदी गईं, क्या रकम विदेश भेजी गई थी, और अन्य सहयोगियों की क्या भूमिका रही।
जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी अविनाश राठौड़ से पूछताछ में इस कथित ठगी के पूरे नेटवर्क और निवेशकों के पैसे के प्रवाह से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। पुणे पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में जो अन्य आरोपी अभी भी विदेशों में छिपे हुए हैं, उन्हें भी कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत लाने की कार्रवाई युद्धस्तर पर जारी है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ लगातार तालमेल बिठाया जा रहा है।
यह मामला निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक है कि वे किसी भी योजना में निवेश करने से पहले उसकी पूरी तरह से जांच-पड़ताल कर लें। अधिक मुनाफे का लालच अक्सर धोखाधड़ी का जाल हो सकता है। पुलिस की यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक संदेश है जो इस तरह की ठगी में शामिल हैं। यह भी उम्मीद है कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया से भविष्य में ऐसे मामलों में कार्रवाई आसान होगी।
अविनाश राठौड़ की पत्नी विशाखा राठौड़ की तलाश भी जारी है और पुलिस उसे भी जल्द गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। इस मामले में पुलिस की सक्रियता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से यह उम्मीद जगी है कि निवेशकों को उनका पैसा वापस मिल सकेगा और ठगों को सजा मिलेगी। यह मामला दिखाता है कि कैसे एक सुनियोजित तरीके से लोगों को ठगा जा सकता है और कैसे पुलिस को ऐसे मामलों को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करना पड़ता है।
आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारी इस मामले की हर कड़ी को जोड़ने में लगे हैं। वे यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या इस ठगी में किसी बड़े वित्तीय संस्थान या व्यक्ति का हाथ था। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी संदिग्ध योजना में निवेश न करें और अगर उन्हें कोई धोखाधड़ी का मामला नजर आए तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। यह मामला वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है।