राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने नए सदस्यों को साइबर हमलों से आगाह किया, डिजिटल उपकरणों की सुरक्षा पर जोर
राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने नए सदस्यों को साइबर हमलों से आगाह किया, डिजिटल उपकरणों की सुरक्षा पर जोर
NewsPoint•
नई दिल्ली, 26 जुलाई (आईएएनएस)। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने नवनिर्वाचित सदस्यों को साइबर हमलों से सावधान रहने और अपने डिजिटल उपकरणों को सुरक्षित रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि सदस्यों को मिले लॉगिन क्रेडेंशियल्स (लॉगिन करने के लिए यूजरनेम और पासवर्ड) सदन की संपत्ति हैं और इनकी सुरक्षा हर सदस्य की जिम्मेदारी है। यह बात उन्होंने 'प्रारंभ' नामक दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यशाला के समापन पर कही, जिसका उद्देश्य नए सदस्यों को संसदीय कामकाज की बारीकियों से अवगत कराना था। हरिवंश ने इस बात पर जोर दिया कि आज के तकनीकी युग में संसद को आगे बढ़ने के लिए सदस्यों का प्रौद्योगिकी से अच्छी तरह वाकिफ होना बहुत ज़रूरी है।
हरिवंश ने बताया कि कैसे बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण ने संसद को कागज़-रहित और ज़्यादा कुशल बना दिया है। सभी सदस्यों को डिजिटल उपकरण दिए गए हैं, लेकिन इन उपकरणों को साइबर हमलों और अनधिकृत पहुंच से बचाना बेहद अहम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लॉगिन क्रेडेंशियल्स को सदन की संपत्ति माना जाना चाहिए और हर सदस्य को इन्हें सुरक्षित रखने की पूरी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए। यह सिर्फ़ एक शुरुआत है, सदस्यों को लगातार सीखते रहना होगा।उन्होंने नए सदस्यों को प्रोत्साहित किया कि वे सिर्फ़ इस ओरिएंटेशन प्रोग्राम तक ही सीमित न रहें, बल्कि आत्म-सुधार की इस प्रक्रिया को जारी रखें। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया कि वे पिछली संसदीय प्रक्रियाओं का अध्ययन करें, महत्वपूर्ण बहसों को पढ़ें, और अटल बिहारी वाजपेयी, अरुण जेटली और चंद्रशेखर जैसे महान सांसदों के भाषणों को देखें। साथ ही, उन्होंने अन्य देशों की संसदीय परंपराओं को समझने का भी आग्रह किया।
यह दो दिवसीय ओरिएंटेशन प्रोग्राम, जिसका नाम 'प्रारंभ' था, राज्यसभा के नव निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों के लिए खास तौर पर तैयार किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्यों को सदन के नियमों, प्रक्रियाओं, परंपराओं और कायदों से अच्छी तरह परिचित कराना था, ताकि वे सदन में अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभा सकें। कार्यक्रम को अलग-अलग सत्रों में बांटा गया था ताकि सदस्य कार्यविधि नियमों और सचिवालय के कामकाज को गहराई से समझ सकें।
वरिष्ठ सदस्यों और अधिकारियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं, जिनमें वास्तविक उदाहरणों का उपयोग करके संसदीय प्रक्रियाओं को समझाया गया। हरिवंश ने विश्वास जताया कि इन प्रस्तुतियों से सदस्यों को निश्चित रूप से लाभ हुआ है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि तकनीकी क्रांति का संसदीय कार्यप्रणाली पर गहरा प्रभाव पड़ा है। प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने सदस्यों को संसद में डिजिटल सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
हरिवंश ने कहा कि संसद तभी देश को तकनीकी क्रांति में आगे ले जा सकती है जब उसके सदस्य स्वयं प्रौद्योगिकी के बारे में अच्छी जानकारी रखते हों। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सदस्यों का सीखना ओरिएंटेशन प्रोग्राम के साथ समाप्त नहीं होता है, बल्कि यह आत्म-सुधार की एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया की शुरुआत मात्र है। उन्होंने सदस्यों को प्रेरित किया कि वे लगातार सीखते रहें और संसदीय ज्ञान को बढ़ाते रहें।