ईरान का हिज्बुल्लाह को समर्थन: खामेनेई ने कहा 'रणनीतिक जिम्मेदारी', इजरायल के खिलाफ 'मजबूत चट्टान'

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Navbharat Times
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने हिज्बुल्लाह के प्रति ईरान के समर्थन को 'रणनीतिक जिम्मेदारी' बताया है। उन्होंने हिज्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम को लिखे एक पत्र में यह बात कही, जिसमें कासिम ने ईरान के प्रति अपनी निष्ठा जताई थी। खामेनेई ने हिज्बुल्लाह की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संगठन इजरायल की 'भयंकर आक्रामकता' के सामने 'एक मजबूत चट्टान की तरह' खड़ा है। यह बयान ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार है।

खामेनेई ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि ईरान के संस्थापक इमाम सैयद अली खामेनेई की नीति के अनुसार, इस्लामी गणराज्य ईरान इन 'दबे-कुचले लेकिन शक्तिशाली मुजाहिदीन' की रक्षा को अपनी 'रणनीतिक जिम्मेदारी' मानता है। उन्होंने हिज्बुल्लाह प्रमुख के पत्र को 'प्रशंसा और सम्मान के योग्य' बताया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान के साथ हुए शांति समझौते (एमओयू) के उल्लंघन पर भी खामेनेई ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। पिछले हफ्ते, उन्होंने एक संदेश में कहा था कि अमेरिका का यह कदम साबित करता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर 'बेकार और अमान्य' हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने 'एक बार फिर अपना असली चेहरा दिखा दिया है।'

खामेनेई ने जोर देकर कहा कि अमेरिका की ओर से बार-बार एमओयू का उल्लंघन यह साबित करता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की कोई कीमत नहीं है। उन्होंने अमेरिका के रवैये को 'झूठ बोलने वाला, अविश्वसनीय, तर्कहीन और गलत' बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका युद्ध जैसी नीतियां जारी रखता है और ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश करता है, तो उसे ईरान और 'प्रतिरोध मोर्चे' से ऐसा जवाब मिलेगा जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगा।

यह घटनाक्रम ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। हिज्बुल्लाह, लेबनान का एक शक्तिशाली शिया राजनीतिक और सैन्य संगठन है, जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त है। यह संगठन इजरायल के खिलाफ संघर्ष में सक्रिय रहा है। ईरान का यह बयान हिज्बुल्लाह के प्रति अपने मजबूत समर्थन को दोहराता है और यह भी संकेत देता है कि वह किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

ईरान के सर्वोच्च नेता का यह पत्र न केवल हिज्बुल्लाह के लिए एक संदेश है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक स्पष्ट संकेत है कि ईरान अपने सहयोगियों का समर्थन करना जारी रखेगा, खासकर उन लोगों का जो इजरायल के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। अमेरिका के साथ चल रहे तनाव के बीच, यह बयान ईरान की दृढ़ता को दर्शाता है।

खामेनेई ने अपने संदेश में ईरानी लोगों को संबोधित करते हुए देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने अमेरिका के बार-बार वादे तोड़ने के अनुभव को 'अपराध और वादे तोड़ने' का उदाहरण बताया। यह दर्शाता है कि ईरान अमेरिका पर भरोसा नहीं करता और उसके इरादों पर संदेह करता है।

कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम ईरान की विदेश नीति और क्षेत्रीय रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ईरान हिज्बुल्लाह को एक महत्वपूर्ण सहयोगी मानता है और उसके समर्थन को अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए आवश्यक समझता है। अमेरिका के साथ टकराव के बीच, ईरान अपने सहयोगियों को मजबूत करने और किसी भी संभावित खतरे का सामना करने के लिए तैयार दिख रहा है।

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