पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे आरपीएफ ने 6 महीने में 430 लोगों को बचाया, बाल संरक्षण पर जोर

NewsPoint
6 430
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) की रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने हाल ही में अपने अधिकार क्षेत्र में बच्चों और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। जनवरी से जून 2026 तक, आरपीएफ ने 430 लोगों को बचाया है, जिनमें बच्चे और अन्य यात्री शामिल हैं। विशेष रूप से, 18 से 20 जुलाई के बीच, आरपीएफ ने कई नाबालिगों को रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों से बचाया और उन्हें बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी), बाल सहायता लाइन और अन्य अधिकृत एजेंसियों को सौंप दिया। यह कार्रवाई बाल संरक्षण और यात्री सुरक्षा के प्रति आरपीएफ की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिनजल किशोर शर्मा ने बताया कि आरपीएफ लगातार सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा कि चालू वर्ष में जनवरी से जून 2026 तक, एनएफआर की आरपीएफ ने एनएफआर नेटवर्क के रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों से 430 लोगों (पुरुष और महिला दोनों) को बचाया है, जो बाल संरक्षण और यात्री सुरक्षा के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह आंकड़ा आरपीएफ के प्रयासों की व्यापकता को दिखाता है।
हाल के दिनों में आरपीएफ ने कई महत्वपूर्ण बचाव अभियान चलाए हैं। 18 जुलाई को, पश्चिम बंगाल के न्यू अलीपुरदुआर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ कर्मियों ने एक 12 वर्षीय लड़के को बचाया। उसे तुरंत अलीपुरदुआर बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया ताकि उसकी उचित देखभाल हो सके। यह घटना दर्शाती है कि आरपीएफ बच्चों की सुरक्षा के लिए कितनी तत्परता से काम कर रहा है।

इसके बाद, 19 जुलाई को असम के न्यू बोंगाईगांव में आरपीएफ ने एक और बड़ी सफलता हासिल की। उन्होंने ट्रेन से यात्रा कर रही चार नाबालिग लड़कियों को बचाया। इन लड़कियों को आगे की देखभाल और पुनर्वास के लिए बोंगाईगांव बाल कल्याण समिति को सुरक्षित रूप से सौंप दिया गया। उसी दिन, बिहार के किशनगंज में आरपीएफ ने एक 10 वर्षीय लड़के को ट्रेन से बचाया और उसे किशनगंज बाल सहायता लाइन को सौंप दिया। यह दिखाता है कि आरपीएफ देश के विभिन्न हिस्सों में बच्चों की सुरक्षा के लिए सक्रिय है।

आरपीएफ की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। बिहार के कटिहार में, आरपीएफ कर्मियों ने कटिहार रेलवे स्टेशन से एक 14 वर्षीय लड़की को बचाया। उसे चाइल्ड लाइन, कटिहार को सौंप दिया गया। एक अन्य अभियान में, आरपीएफ ट्रेन एस्कॉर्ट पार्टी ने ट्रेन में यात्रा कर रही एक 14 वर्षीय लड़की को बचाया। उसकी सुरक्षित हिरासत और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस से समन्वय किया गया। इसी अभियान के दौरान, एक 18 वर्षीय युवक को भी उसके पिता से सुरक्षित मिला दिया गया। यह घटना दर्शाती है कि आरपीएफ न केवल बच्चों बल्कि अन्य जरूरतमंद यात्रियों की भी मदद करता है।

बाल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए, असम के गोलपारा में आरपीएफ कर्मियों ने 20 जुलाई को एक 13 वर्षीय लड़की को ट्रेन से बचाया। उसे गोलपारा बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया। गुवाहाटी के पास कामाख्या रेलवे स्टेशन पर भी आरपीएफ ने एक महत्वपूर्ण बचाव कार्य किया। उन्होंने गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर ट्रेन में यात्रा कर रही एक 16 वर्षीय लड़की को बचाया। उसे सुरक्षित रखने के लिए गुवाहाटी रेलवे चाइल्ड लाइन को सौंप दिया गया।

सीपीआरओ शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे एक सुरक्षित रेल वातावरण सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रेलवे सुरक्षा बल बाल कल्याण समितियों, बाल सहायता लाइनों, गैर सरकारी संगठनों और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर जरूरतमंद बच्चों की देखभाल और सहायता करने और उन्हें यथासंभव उनके परिवारों से मिलाने के लिए निरंतर काम कर रहा है। यह एक समन्वित प्रयास है जिसमें विभिन्न एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) का मुख्यालय गुवाहाटी के पास मालिगांव में है। यह रेलवे नेटवर्क पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के सात जिलों और उत्तरी बिहार के पांच जिलों में फैला हुआ है। इस व्यापक क्षेत्र में आरपीएफ की सक्रियता यह सुनिश्चित करती है कि यात्रियों और विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। आरपीएफ के ये प्रयास न केवल सराहनीय हैं बल्कि यात्रियों के बीच विश्वास भी पैदा करते हैं कि वे सुरक्षित यात्रा कर सकते हैं।

रेकमेंडेड खबरें