बांग्लादेश में खसरे का बढ़ता प्रकोप: 820 मौतें, 1.23 लाख से अधिक संदिग्ध मामले

NewsPoint
820 1 23
ढाका, 26 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों वाले चार और बच्चों की मौत हो गई, जिससे देश में खसरे से जुड़ी कुल मौतों का आंकड़ा 820 तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, इनमें से 725 मौतें संदिग्ध हैं, जबकि 95 मामलों की प्रयोगशाला में पुष्टि हो चुकी है। इस दौरान 990 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 1,23,753 हो गई है। वहीं, 170 नए पुष्ट मामले दर्ज हुए, जिससे कुल पुष्ट संक्रमितों की संख्या 15,442 हो गई है। यह गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट तब है जब सरकार का दावा है कि उसने आपातकालीन टीकाकरण अभियान का लक्ष्य पार कर लिया है, लेकिन अस्पतालों में अब भी बड़ी संख्या में बिना टीका लगे मरीज पहुंच रहे हैं, जो टीकाकरण अभियान की खामियों को उजागर कर रहा है।

डीजीएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, 15 मार्च से अब तक खसरे के संदिग्ध 1,06,239 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 1,02,467 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। इसके बावजूद, देश में खसरे से हर दिन औसतन लगभग चार बच्चों की मौत हो रही है और 800 से अधिक मरीज रोज अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। जुलाई के पहले तीन हफ्तों में भी स्थिति चिंताजनक बनी रही, जहां प्रतिदिन औसतन 1,005 संदिग्ध और पुष्ट मामले, 821 अस्पताल में भर्ती और करीब चार मौतें दर्ज की गईं।
मीजल्स और रूबेला उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय सत्यापन समिति के अध्यक्ष महमूदुर रहमान ने चिंता जताते हुए कहा कि टीकाकरण अभियान शुरू होने के दो महीने बाद भी हालात उम्मीद के मुताबिक नहीं सुधरे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अधिकारी इस गंभीर समस्या की गंभीरता को पूरी तरह नहीं समझ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकोप के लगातार बने रहने के पीछे कई कारण हैं। इनमें करीब 40 लाख बच्चों का टीकाकरण से वंचित रह जाना, अभियान की लक्षित आयु सीमा से अधिक उम्र के बच्चों में संक्रमण का फैलना और संक्रमण नियंत्रण के कमजोर उपाय शामिल हैं।

पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ बे-नजीर अहमद ने इस स्थिति पर गहरा अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि मीजल्स-रूबेला टीकाकरण और विटामिन-ए अभियान के आंकड़ों में करीब 40 लाख बच्चों का अंतर बेहद चौंकाने वाला है। उनके अनुसार, यह साफ तौर पर दिखाता है कि टीकाकरण का लक्ष्य ही पर्याप्त नहीं रखा गया था। उन्होंने आगे कहा कि कमजोर योजना और लोगों में जागरूकता की कमी के कारण बड़ी संख्या में परिवार संशोधित टीकाकरण कार्यक्रम की जानकारी से वंचित रह गए, जिसका असर अब सामने आ रहा है।

यह स्थिति बांग्लादेश के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है। खसरे जैसी गंभीर बीमारी का प्रकोप, खासकर बच्चों में, चिंता का विषय है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान के बावजूद, बड़ी संख्या में बच्चों का टीका न लग पाना और उसके बाद भी संक्रमण का फैलना, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए टीकाकरण के लक्ष्यों को बढ़ाने और जन जागरूकता अभियान को तेज करने की आवश्यकता है। साथ ही, संक्रमण नियंत्रण के उपायों को भी मजबूत करने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसे प्रकोपों को रोका जा सके।

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। हर दिन बच्चों की मौतें और अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही है। सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर चिंताजनक है। यह आवश्यक है कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले और प्रभावी कदम उठाए ताकि निर्दोष बच्चों की जान बचाई जा सके। टीकाकरण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने और छूटे हुए बच्चों तक पहुंचने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।

रेकमेंडेड खबरें