अमित शाह ने सहकारी बैंकिंग को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय पहलों की समीक्षा की, तकनीक और निर्यात पर जोर

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सहकारी क्षेत्र की राष्ट्रीय पहलों की समीक्षा की। उन्होंने सहकारी बैंकिंग को मजबूत करने, जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने और निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में तकनीक अपनाने, साइबर सुरक्षा और डिजिटल भुगतान पर चर्चा हुई। प्रस्तावित कोऑपरेटिव बैंक ऑफ इंडिया की भूमिका पर भी विचार किया गया।

Navbharat Times
नई दिल्ली, 18 जून। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर की सहकारी पहलों की समीक्षा की। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाना, सहकारी संस्थाओं के ज़रिए जैविक उत्पादों को बढ़ावा देना और निर्यात के ज़रिए सहकारी उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाना है। इस महत्वपूर्ण बैठक में सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी, नाबार्ड के अध्यक्ष शाजी के.वी., मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी और कोऑपरेटिव बैंक ऑफ इंडिया (सीओबीआई), सहकार सारथी प्राइवेट लिमिटेड (एसएसपीएल), राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम (एनयूसीएफडीसी), राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) और राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) जैसे प्रमुख सहकारी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में अमित शाह ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक बनाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने तकनीक को अपनाने, बेहतर प्रबंधन, साइबर सुरक्षा को मज़बूत करने, डिजिटल भुगतान को आसान बनाने, एक साझा सेवा मंच (shared service platform) बनाने और सेवाओं को बेहतर ढंग से लोगों तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे कामों की जानकारी ली। उन्होंने प्रस्तावित कोऑपरेटिव बैंक ऑफ इंडिया (सीओबीआई) की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की, जो भविष्य में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को सहारा देगा। सहकार सारथी (एसएसपीएल) की तकनीक-आधारित पहलों की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जो सहकारी बैंकों के लिए काम कर रही है।
बैठक में बताया गया कि सहकारी बैंक साझा डिजिटल मंच और साझा सेवाओं को लेकर काफी उत्साहित हैं। शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों में स्वदेशी (local) तकनीकी समाधानों को अपनाने और डिजिटल ढांचे को मज़बूत करने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। सहकारी बैंकों के लिए एक खास बैंकिंग डोमेन पहल, बैंक डॉट इन (bank.in) की प्रगति की भी समीक्षा हुई। सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में तकनीक-आधारित सेवाओं और डिजिटल समाधानों के ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल के लिए चल रहे प्रयासों पर भी बात हुई।

सहकारी बैंकों में धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने और साइबर सुरक्षा को और मज़बूत करने के लिए म्यूलहंटर एआई (MuleHunter AI) को भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) से जोड़ने के काम को भी सराहा गया। इस कदम से सहकारी बैंकों को नए डिजिटल खतरों से निपटने में मदद मिलेगी और डिजिटल सहकारी बैंकिंग सेवाओं पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा। अमित शाह ने क्षेत्रीय संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने और सहकारी बैंकों की साझा सेवा मंच में भागीदारी बढ़ाने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक मज़बूत साइबर सुरक्षा ढांचा, आधुनिक बैंकिंग तकनीक और टिकाऊ व्यावसायिक मॉडल के महत्व को भी समझाया।

एनयूसीएफडीसी, जो शहरी सहकारी बैंकों का एक बड़ा संगठन है, सभी शहरी सहकारी बैंकों को एक साझा मंच पर लाने और पूरे क्षेत्र को कवर करने के लिए अपने सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर तेज़ी से काम कर रहा है। इससे शहरी सहकारी बैंकों को साझा सेवाएं, तकनीकी समाधान और संस्थागत मदद आसानी से मिल सकेगी। यह भी बताया गया कि एसएसपीएल ने आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) सेवाएं शुरू कर दी हैं और कुछ सहकारी बैंकों में इलेक्ट्रॉनिक केवाईसी (ई-केवाईसी) की सुविधा पहले से ही चालू है। इसे कुछ और राज्यों में भी शुरू किया जा रहा है और अगस्त 2026 तक 100 सहकारी बैंकों को इसमें शामिल करने का लक्ष्य है। इस पहल से सहकारी बैंकों के लिए डिजिटल बैंकिंग सेवाओं की लागत में काफी कमी आई है।

गृह मंत्री शाह ने कहा कि सभी ग्रामीण सहकारी बैंकों को सहकार सारथी प्राइवेट लिमिटेड (एसएसपीएल) का सदस्य बनना चाहिए और सभी शहरी सहकारी बैंकों को राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम (एनयूसीएफडीसी) का सदस्य बनना चाहिए। साथ ही, इन संस्थाओं की सेवाओं का भी भरपूर उपयोग करना चाहिए। उन्होंने भविष्य में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को मज़बूत बनाने में सीओबीआई, एसएसपीएल और एनयूसीएफडीसी की अहम भूमिका को भी रेखांकित किया।

जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने और निर्यात के ज़रिए वैश्विक पहुंच बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) और राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) जैसी संस्थाएं इस दिशा में काम कर रही हैं। इन पहलों का उद्देश्य किसानों को उनकी जैविक उपज का बेहतर मूल्य दिलाना और भारतीय सहकारी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में स्थापित करना है।

अमित शाह ने कहा कि सहकारी आंदोलन भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के ज़रिए और मज़बूत करने की ज़रूरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन राष्ट्रीय स्तर की पहलों से सहकारी क्षेत्र में नई ऊर्जा आएगी और यह देश के विकास में और भी बड़ा योगदान देगा। उन्होंने अधिकारियों को इन पहलों की प्रगति पर नियमित रूप से नज़र रखने और ज़रूरी सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सहकारी बैंकों को यूपीआई (UPI) जैसी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे ग्राहकों को ज़्यादा सुविधा मिलेगी और लेन-देन तेज़ होगा। साइबर सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि ग्राहकों के पैसे और डेटा सुरक्षित रहें।

सहकारी बैंकों के लिए एक साझा सेवा मंच (shared service platform) बनाने का विचार बहुत महत्वपूर्ण है। इससे छोटे सहकारी बैंक भी बड़ी बैंकों की तरह आधुनिक तकनीक और सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। यह मंच उन्हें एक-दूसरे से सीखने और अपनी समस्याओं का समाधान खोजने में भी मदद करेगा।

कुल मिलाकर, यह बैठक सहकारी क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। तकनीक, बेहतर प्रबंधन और आपसी सहयोग के ज़रिए सहकारी बैंकिंग और अन्य सहकारी पहलों को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया गया है, जिससे आम आदमी को सीधा फायदा होगा।

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