अमेरिका में वीजा प्रोसेसिंग और इमिग्रेशन में Ai का इस्तेमाल, जानिए क्या है नई योजना
अमेरिका में वीजा प्रोसेसिंग और इमिग्रेशन में AI का इस्तेमाल, जानिए क्या है नई योजना
NewsPoint•
वाशिंगटन, 26 जून (आईएएनएस)। अमेरिका का गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) वीजा प्रोसेसिंग और कानूनी आप्रवासन सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करने की तैयारी में है। इस पहल के तहत एक नया मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य आवेदनों को जल्दी मंजूर करना, कागजी कार्रवाई कम करना और पूरी प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाना है। यह बदलाव ट्रंप सरकार की योजना का हिस्सा है, जिसके बारे में गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने सांसदों को जानकारी दी। डीएचएस का लक्ष्य आप्रवासन प्रणाली को आधुनिक बनाकर कानूनी प्रवास को तेज करना है, साथ ही सुरक्षा की निगरानी को और मजबूत करना है।
मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब-कमेटी के सामने देश की आंतरिक सुरक्षा पर बात करते हुए बताया कि विभाग एक स्वचालित प्रणाली विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि पहला एआई-संचालित प्लेटफॉर्म अगले 30 दिनों में शुरू हो जाएगा। शुरुआत में, इस प्लेटफॉर्म का ध्यान 'डेफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स' (डीएसीए) कार्यक्रम के तहत लंबित आवेदनों की संख्या को कम करने पर होगा। डीएचएस अपनी आवेदन प्रक्रिया को भी फिर से डिजाइन कर रहा है ताकि उन सामान्य गलतियों को कम किया जा सके जो अक्सर वीजा मंजूर होने में देरी का कारण बनती हैं। मुलिन ने कहा, "हम इसे ऐसे सिस्टम में क्यों नहीं ले जा सकते कि आप कागजी कार्रवाई तब तक जमा न कर सकें जब तक वह सही ढंग से भरी न जाए? तकनीक मौजूद है, हमें बस उसे अपनाना है।"सचिव ने यह भी बताया कि डीएचएस वाणिज्य विभाग के साथ मिलकर एक मोबाइल एप्लिकेशन विकसित कर रहा है। यह ऐप आप्रवासियों के लिए इमिग्रेशन सेवाओं का उपयोग करना आसान बना देगा। मुलिन ने कहा, "हम वास्तव में एक ऐप बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने इस हफ्ते राष्ट्रपति को इसके बारे में बताया और प्रेसिडेंट को यह आइडिया बहुत पसंद आया।" उनका मानना है कि इस डिजिटल बदलाव से न केवल आवेदकों को बल्कि नियोक्ताओं को भी फायदा होगा, जिससे उनकी क्षमताएं बेहतर होंगी। मुलिन ने इस बात पर जोर दिया कि आप्रवासन प्रक्रिया में होने वाली किसी भी देरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
वाशिंगटन के कांग्रेसी डैन न्यूहाउस के एक सवाल के जवाब में, मुलिन ने बताया कि विभाग ने एच-2ए एग्रीकल्चरल वीजा के लिए प्रोसेसिंग समय में काफी सुधार किया है। उन्होंने कहा, "यह 15 दिन का टर्नअराउंड है। इनमें से बहुत से कृषि श्रमिक जाने-पहचाने हैं। वे आते-जाते रहते हैं, हम उन्हें हर बार देखते हैं।" उन्होंने आगे बताया कि डीएचएस डेयरी फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी को दूर करने के तरीकों पर भी विचार कर रहा है। इन क्षेत्रों में, मौजूदा वीजा नियम मौसमी कृषि रोजगार से थोड़े अलग हैं।
मुलिन ने स्वीकार किया कि विभाग पिछली सरकार के दौरान मंजूर किए गए आप्रवासन मामलों की भी समीक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा, "हमें बहुत से लोगों की दोबारा जांच करनी पड़ रही है।" डीएचएस ने अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने और अधिक स्क्रीनिंग के तरीके शुरू किए हैं। सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार चाहती है कि आप्रवासन कानूनों को लागू करते हुए कानूनी आप्रवासन अधिक प्रभावी ढंग से काम करे। मुलिन ने कहा, "इस देश में रहने का एक सही तरीका है और इस देश का नागरिक बनने का भी एक सही तरीका है। आपको कांग्रेस के पास किए गए कानूनों को मानना होगा।"
जैसे-जैसे आवेदनों की संख्या बढ़ रही है, संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी सरकारी सेवाओं, जिसमें आप्रवासन प्रसंस्करण भी शामिल है, को आधुनिक बनाने के लिए तेजी से डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ रहा है। संघीय एजेंसियां प्रशासनिक देरी को कम करने, सटीकता में सुधार करने और पहचान सत्यापन को मजबूत करने के लिए ऑटोमेशन का उपयोग कर रही हैं। भारत, अमेरिका में कुशल पेशेवरों, छात्रों और नौकरी के लिए वीजा आवेदकों का सबसे बड़ा स्रोत है। तेज प्रोसेसिंग, डिजिटल आवेदन और एआई-सहायता प्राप्त केस प्रबंधन से उन हजारों भारतीय आवेदकों को फायदा हो सकता है जो अमेरिका में पढ़ाई, काम या रहने के लिए कानूनी रास्ते तलाश रहे हैं। हालांकि, वीजा की योग्यता और मंजूरी मौजूदा आप्रवासन कानूनों और नियमों के अनुसार ही तय होती रहेगी।
यह नई पहल आप्रवासन प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एआई और मोबाइल ऐप का उपयोग करके, डीएचएस का लक्ष्य प्रक्रिया को तेज करना और इसे आवेदकों के लिए अधिक सुलभ बनाना है। यह न केवल आप्रवासियों के लिए बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद होगा, क्योंकि यह कुशल श्रमिकों को देश में लाने में मदद करेगा। डीएचएस का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न हो, जबकि प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा रहा है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि एआई का उपयोग केवल प्रक्रिया को तेज करने के लिए है, न कि वीजा नियमों को बदलने के लिए। सभी आवेदकों को अभी भी मौजूदा कानूनों और विनियमों का पालन करना होगा। डीएचएस का लक्ष्य एक ऐसी प्रणाली बनाना है जो कुशल, पारदर्शी और सुरक्षित हो। यह कदम अमेरिका की आप्रवासन प्रणाली को 21वीं सदी के अनुरूप बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
भारत जैसे देशों के लिए, जहां से बड़ी संख्या में लोग अमेरिका में शिक्षा, रोजगार और रहने के लिए आवेदन करते हैं, यह खबर राहत भरी हो सकती है। तेज और अधिक कुशल प्रक्रिया का मतलब होगा कि भारतीय आवेदकों को अपने वीजा के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे उन्हें अपनी योजनाओं को बेहतर ढंग से बनाने में मदद मिलेगी और वे अमेरिका की अर्थव्यवस्था में योगदान कर सकेंगे।
डीएचएस द्वारा उठाए जा रहे ये कदम दिखाते हैं कि सरकार आप्रवासन प्रणाली की चुनौतियों को समझती है और उन्हें दूर करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। एआई और डिजिटल तकनीक का उपयोग करके, वे न केवल प्रशासनिक बोझ को कम कर रहे हैं, बल्कि आप्रवासन प्रक्रिया को अधिक मानवीय और कुशल भी बना रहे हैं। यह एक ऐसा बदलाव है जिसका लंबे समय से इंतजार था।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि डीएचएस ने एच-2ए वीजा के लिए प्रोसेसिंग समय को 15 दिनों तक कम करने में सफलता पाई है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और दर्शाता है कि विभाग अपनी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। डेयरी फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी को दूर करने के लिए भी विचार किया जा रहा है, जो अमेरिकी कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है।
कुल मिलाकर, अमेरिका की आप्रवासन प्रणाली में यह डिजिटल क्रांति एक सकारात्मक विकास है। यह न केवल आप्रवासियों के लिए बल्कि देश के लिए भी फायदेमंद होगा। एआई और नई तकनीकों का उपयोग करके, अमेरिका अपनी आप्रवासन प्रणाली को अधिक कुशल, सुरक्षित और आधुनिक बना रहा है। यह उन हजारों भारतीय आवेदकों के लिए एक अच्छी खबर है जो अमेरिका में अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।