India 61 यूनिकॉर्न के साथ हुरुन ग्लोबल इंडेक्स में चौथे स्थान पर, बेंगलुरु बनी राजधानी

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नई दिल्ली, 26 जून: हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 के अनुसार, भारत 61 यूनिकॉर्न (एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाले स्टार्टअप) के साथ दुनिया में चौथे स्थान पर आ गया है। यह रिपोर्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव को भी उजागर करती है, जिसने वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम में यूनिकॉर्न की संख्या को 1,603 तक पहुंचा दिया है, जिनका कुल मूल्य 8 ट्रिलियन डॉलर है। अमेरिका 806 यूनिकॉर्न के साथ सूची में सबसे ऊपर है, इसके बाद चीन (381) और यूके (70) का स्थान है। भारत में, बेंगलुरु 25 यूनिकॉर्न के साथ देश की 'यूनिकॉर्न राजधानी' बना हुआ है, जबकि मुंबई 13 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे स्थान पर है।

इस साल 308 नए स्टार्टअप यूनिकॉर्न बने हैं, जो पिछले साल के 203 से काफी अधिक है। हालांकि, यह संख्या 2021 के 700 के आंकड़े से कम है। लेकिन इस बार बने यूनिकॉर्न की गुणवत्ता बहुत अच्छी है, क्योंकि कई एआई, रोबोटिक्स और नई ऊर्जा (न्यू एनर्जी) के स्टार्टअप लॉन्च होते ही यूनिकॉर्न बन गए। एआई ने वैश्विक वेंचर कैपिटल (उद्यम पूंजी) में अपनी धाक जमा ली है। दुनिया भर के सभी यूनिकॉर्न की कुल वैल्यू में एआई यूनिकॉर्न की हिस्सेदारी 36% है, जबकि इनकी संख्या 215 है। यह फिनटेक (वित्तीय प्रौद्योगिकी) के 216 यूनिकॉर्न के लगभग बराबर है।
हुरुन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक 965 अरब डॉलर के मूल्यांकन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा यूनिकॉर्न है। इसके बाद 852 अरब डॉलर के मूल्यांकन के साथ ओपनएआई दूसरे स्थान पर है। चीन की कंपनी बाइटडांस 480 अरब डॉलर के मूल्यांकन के साथ तीसरे स्थान पर है। एआई के कारण दुनिया के सभी यूनिकॉर्न की वैल्यू में सालाना 43% की बढ़ोतरी हुई है। शीर्ष 10 यूनिकॉर्न का कुल मूल्य 3.9 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।

भारत में, बेंगलुरु 25 यूनिकॉर्न के साथ देश का सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बना हुआ है। यहां कई टेक कंपनियां और नए स्टार्टअप पनप रहे हैं। मुंबई भी 13 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे नंबर पर है, जो देश के वित्तीय केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को दर्शाता है।

यह रिपोर्ट बताती है कि एआई का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। यह सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि एक ऐसा इंजन बन गया है जो स्टार्टअप्स को रातोंरात बड़ा बना रहा है। जिन स्टार्टअप्स में एआई का इस्तेमाल हो रहा है, उनकी वैल्यू बहुत तेजी से बढ़ रही है। यह दिखाता है कि भविष्य में एआई का दबदबा और बढ़ेगा।

वैश्विक स्तर पर, अमेरिका इस दौड़ में सबसे आगे है, जिसके पास दुनिया के आधे यूनिकॉर्न हैं। चीन भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत का चौथे स्थान पर आना एक अच्छी खबर है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। यूनिकॉर्न बनने का मतलब है कि ये कंपनियां बहुत बड़ी हो गई हैं और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि यूनिकॉर्न क्या होते हैं। ये ऐसी कंपनियां होती हैं जिनकी कीमत एक अरब डॉलर (लगभग 8,300 करोड़ रुपये) से ज्यादा हो जाती है। ये कंपनियां अक्सर नई तकनीकों पर काम करती हैं और बहुत तेजी से बढ़ती हैं। एआई, रोबोटिक्स और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्र आज के यूनिकॉर्न के मुख्य आधार बन रहे हैं।

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