सपा प्रमुख अखिलेश यादव के घुसपैठियों वाले बयान पर सफाई दी, भाजपा पर लगाया आरोप
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के घुसपैठियों वाले बयान पर सफाई दी, भाजपा पर लगाया आरोप
NewsPoint•
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के हालिया बयान पर विवाद गहरा गया है। इस बयान में घुसपैठियों का जिक्र किया गया था। इस पर सपा की उत्तराखंड प्रभारी सोनम बगवाड़ी ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह बयान केवल नौ सेकंड की एक क्लिप है, जिसे भाजपा ने काटकर प्रचारित किया है। उनका मानना है कि माफी मांगने की तो कोई आवश्यकता ही नहीं है। सोनम बगवाड़ी ने आगे कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का बयान प्रवासी मजदूरों के संदर्भ में था। वह यह समझा रहे थे कि ऐसे मजदूरों को घुसपैठिया कहा जाता है। जैसे की प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों में काम करने आते हैं, उन्हें भी घुसपैठिया कहकर संबोधित किया जाता है।
सोनम ने कहा कि यह बयान भाजपा और योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाए गए घुसपैठिया जैसे शब्दों के संदर्भ में था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रवासी मजदूरों को घुसपैठिया कहा जाएगा, तो क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी घुसपैठिया कहलाएंगे, क्योंकि वे भी उत्तराखंड से आते हैं? सपा नेता ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को हर चुनाव में उठाती है। लेकिन भाजपा ने कभी स्पष्ट नहीं किया कि घुसपैठिया किसे कहा जाए। इसलिए यह सवाल उठता है कि भाजपा किन लोगों को घुसपैठिया मानती है। सोनम ने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले वे सोचते थे कि बांग्लादेश से आए लोग ही घुसपैठिये होते हैं। लेकिन अब भाजपा की सरकार के दौरान पिछले 12 से 14 सालों में केवल 4,000 घुसपैठिये ही देश से बाहर भेजे गए हैं।
सोनम ने कहा कि पूरा बयान संदर्भ से दूर हटकर पेश किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अखिलेश यादव ने उत्तराखंड या वहां की जनता के खिलाफ कोई भी गलत टिप्पणी नहीं की है। उनका एकमात्र उद्देश्य यह था कि काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए इन शब्दों का सही मतलब क्या है।
इस बीच, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने भी इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गलत बयान की कोई परवाह नहीं करनी चाहिए। रावत ने कहा कि हमारा राज्य, जो कभी उत्तराखंड का भी राज्य था, वो उत्तर प्रदेश था। उन्होंने याद दिलाया कि उत्तराखंड के बेशुमार लोग उत्तर प्रदेश की राजकीय सेवाओं में कार्यरत हैं।
हरीश रावत ने समझाया कि जो लोग एक जगह रह जाते हैं, वे वहां के नागरिक होते हैं। उन्हें घुसपैठिया कैसे कहा जा सकता है? उनकी भावना आहत हुई है क्योंकि यह शब्द उपयोग किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अखिलेश यादव खुद इस बात को समझेंगे और इसे सही करेंगे।
इस विवाद की जड़ में कुछ समय पहले दिए गए अखिलेश यादव के एक बयान का एक और पहलू भी है। उन्होंने कहा था कि प्रवासी श्रमिकों के संदर्भ में जो भी कहा गया है, वह दुर्भाग्य से गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उनके अनुसार, भाजपा जानबूझकर उनके बयान को संदर्भ से हटा कर प्रचारित कर रही है।
इस पूरे संकट में सोनम बगवाड़ी का कहना है कि भले ही भाजपा इस मुद्दे को चुनावों में उठाती है, लेकिन इससे संबंधित दिशा नहीं दी जाती। उन्होंने यह भी बताया कि बहुत से लोग आज भी अपने मूल राज्य को छोड़कर दूसरों राज्यों में रोजी-रोटी के लिए जाते हैं। ऐसे लोगों को घुसपैठिया कहकर संदिग्ध दृष्टि से देखा जाता है, जोकि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
सोनम ने एक ओर महत्वपूर्ण बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता अक्सर घुसपैठिया शब्द का इस्तेमाल करते हैं, जबकि इसकी कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई। ऐसे में समाज में संशय जन्म लेता है। उन्हें इस मामले में और स्पष्टता की जरूरत महसूस होती है।
समाजवादी पार्टी का यह मानना है कि बयान को संदर्भ में समझना बहुत महत्वपूर्ण है। इस विवाद ने समाज में कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। क्या हम प्रवासी श्रमिकों को घुसपैठिया कह सकते हैं? क्या यह उचित है? इस विषय पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है।
अखिलेश यादव के बयान के संदर्भ में सपा के नेताओं ने जहां एक तरफ सफाई दी, वहीं दूसरी ओर इस विषय पर एक नई बहस भी छिड़ गई है। अब जनता की प्रतिक्रियाएं भी इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण होंगी। ऐसे में यह देखना होगा कि आगे क्या होता है।
इस प्रकार, भाजपा और सपा के बीच चल रहे इस विवाद में एक ओर पहलू यह है कि राजनीतिक बयानबाजियों के कारण समाज में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। यह बहुत आवश्यक है कि ऐसे बयानों के संदर्भ में सभी पक्ष सावधानी बरतें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें।